07 फरवरी 2012
आईबीएन-7
योजना आयोग से जुड़ी एक कमेटी ने ऐसा कानून बनाने की सिफारिश की है जिसके तहत परिवार की संपत्ति में पति, पत्नी दोनों को बराबर का हिस्सेदार माना जाना चाहिए।
जी हां तलाक होने पर सारी संपत्ति दोनों के बीच बराबरी के साथ बांट दी जाए। संपत्ति चाहे किसी ने भी खरीदी क्यों न हो।
समिति ने यह भी कहा है कि यह कानून सभी लोगों पर लागू हो और इसके तहत लिव इन रिलेशनशिप को भी रखा जाए।
तलाकशुदा महिला को जबरदस्ती घर से नहीं निकाला जा सकता
जब परिवार, घर पति-पत्नी से बनाता है, दोनों मिलकर घर के फैसले लेते हैं तो फिर घर की संपत्ति में दोनों बराबर के भागीदार क्यों नहीं?
क्या चल-अचल संपत्ति पर पति-पत्नी दोनों का बराबर हक नहीं होना चाहिए है? जायदाद पति ने खरीदी हो या फिर पत्नी ने दोनों को उसके बराबर के हिस्सेदार नहीं होना चाहिए?
इन्हीं सवालों को उठाते हुए योजना आयोग के एक पैनल ने महिला अधिकारों को लेकर एक बड़ी और क्रांतिकारी पहल की है।
‘बेवफा’ तलाकशुदा पत्नी को भी देना होगा गुजारा भत्ता
महिला संशक्तिकरण पर काम कर रहे आयोग के इस उच्च स्तरीय पैनल ने सुझाव दिया है कि किसी दंपत्ति की सारी चल अचल संपत्ति में पुरुष और महिला दोनों का मालिकाना हक हो। फिर चाहे संपत्ति की खरीद किसी ने भी की हो।
पैनल ने पारिवारिक कानून की रूपरेखा में बदलाव की सिफारिश करते हुए ‘राइट टू मैरिटल प्रॉपर्टी एक्ट’ बनाने का सुझाव दिया है। इसके तहत तलाक होने पर पति और पत्नी के बीच सारी संपत्ति बराबर-बराबर बांटी जाएगी। यह कानून बिना भेदभाव के सभी समुदायों पर लागू हो।
लिव इन रिलेशनशिप में भी यह कानून लागू किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि इस मुद्दे पर कई सालों से चर्चा चल रही हैं। तलाक के बाद संपत्ति में महिला का अधिकार बड़ा सवाल बना हुआ है।
‘लिव-इन’ में गुजारा-भत्ते का अधिकार नहीं: सर्वोच्च न्यायालय
अक्सर ऐसा देखने में आया है कि तलाक के बाद महिला अपने मायके की दया पर निर्भर हो जाती है, उसके पास अपना कुछ भी नहीं होता। पिता की संपत्ति से भी महिला को ज्यादा कुछ नसीब नहीं होता है।
इसलिए पैनल ने पति-पत्नी की संपत्ति को ज्वाइंट संपत्ति बनाने का सुझाव दिया है। हालांकि कानूनी जानकारों का मानना है कि पैनल के सुझाव कागजी है और इसमें कई बुनियादी मुश्किले हैं।
सबसे बड़ी मुश्किल लिव इन रिलेशनशिप में रहने वालों लोगों को इस कानून के तहत आने में खड़ी होगी।
महिला अधिकारों से जुड़े लोगों का मानना है कि इन सुझावों से इन मुद्दों पर नई बहस खड़ी होगी, जो किसी नतीजे पर पहुंचेगी।
आईबीएन-7
योजना आयोग से जुड़ी एक कमेटी ने ऐसा कानून बनाने की सिफारिश की है जिसके तहत परिवार की संपत्ति में पति, पत्नी दोनों को बराबर का हिस्सेदार माना जाना चाहिए।
जी हां तलाक होने पर सारी संपत्ति दोनों के बीच बराबरी के साथ बांट दी जाए। संपत्ति चाहे किसी ने भी खरीदी क्यों न हो।
समिति ने यह भी कहा है कि यह कानून सभी लोगों पर लागू हो और इसके तहत लिव इन रिलेशनशिप को भी रखा जाए।
तलाकशुदा महिला को जबरदस्ती घर से नहीं निकाला जा सकता
जब परिवार, घर पति-पत्नी से बनाता है, दोनों मिलकर घर के फैसले लेते हैं तो फिर घर की संपत्ति में दोनों बराबर के भागीदार क्यों नहीं?
क्या चल-अचल संपत्ति पर पति-पत्नी दोनों का बराबर हक नहीं होना चाहिए है? जायदाद पति ने खरीदी हो या फिर पत्नी ने दोनों को उसके बराबर के हिस्सेदार नहीं होना चाहिए?
इन्हीं सवालों को उठाते हुए योजना आयोग के एक पैनल ने महिला अधिकारों को लेकर एक बड़ी और क्रांतिकारी पहल की है।
‘बेवफा’ तलाकशुदा पत्नी को भी देना होगा गुजारा भत्ता
महिला संशक्तिकरण पर काम कर रहे आयोग के इस उच्च स्तरीय पैनल ने सुझाव दिया है कि किसी दंपत्ति की सारी चल अचल संपत्ति में पुरुष और महिला दोनों का मालिकाना हक हो। फिर चाहे संपत्ति की खरीद किसी ने भी की हो।
पैनल ने पारिवारिक कानून की रूपरेखा में बदलाव की सिफारिश करते हुए ‘राइट टू मैरिटल प्रॉपर्टी एक्ट’ बनाने का सुझाव दिया है। इसके तहत तलाक होने पर पति और पत्नी के बीच सारी संपत्ति बराबर-बराबर बांटी जाएगी। यह कानून बिना भेदभाव के सभी समुदायों पर लागू हो।
लिव इन रिलेशनशिप में भी यह कानून लागू किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि इस मुद्दे पर कई सालों से चर्चा चल रही हैं। तलाक के बाद संपत्ति में महिला का अधिकार बड़ा सवाल बना हुआ है।
‘लिव-इन’ में गुजारा-भत्ते का अधिकार नहीं: सर्वोच्च न्यायालय
अक्सर ऐसा देखने में आया है कि तलाक के बाद महिला अपने मायके की दया पर निर्भर हो जाती है, उसके पास अपना कुछ भी नहीं होता। पिता की संपत्ति से भी महिला को ज्यादा कुछ नसीब नहीं होता है।
इसलिए पैनल ने पति-पत्नी की संपत्ति को ज्वाइंट संपत्ति बनाने का सुझाव दिया है। हालांकि कानूनी जानकारों का मानना है कि पैनल के सुझाव कागजी है और इसमें कई बुनियादी मुश्किले हैं।
सबसे बड़ी मुश्किल लिव इन रिलेशनशिप में रहने वालों लोगों को इस कानून के तहत आने में खड़ी होगी।
महिला अधिकारों से जुड़े लोगों का मानना है कि इन सुझावों से इन मुद्दों पर नई बहस खड़ी होगी, जो किसी नतीजे पर पहुंचेगी।
यह खबर आपको कैसी लगी
10 में से 5 वोट मिले
पाठकों की राय
24 मई 2012
Mar 30, 2012
गुड १ दिन की बीवी ओर लाखो का फ़ायदा. बेटे के मा बाप गये चूल्हे में जिन्होने २५-३० वर्ष तक बेटे को पाला,
raichand delhi
Feb 07, 2012
अगर पत्नी बेबफा हो ओर पति उसे हिसा देने की जगह जैल जाना पसंद करे या उसके पेरेंट्स उसे संपति मे हिसना दे तब फिर क़ानून काया करेगा
vikas bhopal
प्रमुख ख़बरें
- 60 बरस बाद मिस्र की जनता आज करेगी मतदान
- जरूर देखें: आज सुर्खियों में रहने वाली अहम खबरें
- facebook पर hindi.in.com को LIKE किया क्या?
- स्पेशल रिपोर्ट: गर्मी से झुलसा देश, इंडिया @45 डिग्री!
- KBP: संगमा की दहाड़, समर्थन नहीं, तो निर्दलीय खड़ा हो जाऊंगा
- इटली में भूकम्प के झटके जारी, हजारों विस्थापित
- पायलटों की हड़ताल का 15वां दिन, नुकसान 250 करोड़!
- मनमोहन के बाद कौन पर राहुल, प्रणब आगे
- KBP: संगमा बोले, एक नजर इधर, मैं भी हूं रेस में!
- देखें, कैसे पिता ने बच्चे को वॉशिंग मशीन में धोया?
आज के वीडियो
आदर्श घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्रियों शिंदे, देशमुख को समन
ख़बरें
सबसे ज्यादा पाठकों की राय
तस्वीरें
क्रिकेट समाचार
Live TV | Stock Market India | IBNLive News | IBNKhabar Hindi News | Cricket News | In.com | हमारे बारे में | हमारा पता | हमें बताइए | विज्ञापन | अस्वीकरण | गोपनीयता | शर्तें | साइट जानकारी
© 2011, Web18 Software Services Ltd. All Rights Reserved.












