24 मई 2012
सेना प्रमुख के खिलाफ केंद्र भी पहुंचा सर्वोच्च न्यायालय
17 जनवरी 2012
वार्ता

नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने सेना प्रमुख जनरल वी. के. सिंह के जन्मतिथि विवाद मामले में आज उच्चतम न्यायालय में एक कैविएट (आपत्ति याचिका) दाखिल की।

केंद्र सरकार ने रक्षा मंत्रालय की ओर से कैविएट दाखिल करके न्यायालय से आग्रह किया है कि वह उसका पक्ष सुने बिना एक पक्षीय फैसला न सुनाए। मंत्रालय ने वकील टी. ए. खान के माध्यम से कैविएट दाखिल की।

उधर,  मलेशिया से रक्षा सचिव को भी वापस बुला लिया गया है।

रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी ने अटार्नी जनरल ए. जी. वाहनवती को बुलाया और उनसे सरकार के अगले कदम के बारे में चर्चा की।

सरकार ने इस मुद्दे पर कोर्ट में केवियट दाखिल कर दी है। इसका मतलब है कि कोर्ट को जनरल सिंह की याचिका पर कोई फैसला देने से पहले सरकार का पक्ष सुनना होगा। हालात देखते हुए सरकार ने मलेशिया के दौरे पर गए रक्षा सचिव एस. के. शर्मा को भी स्वदेश वापस बुला लिया है।

वहीं, जनरल वी के सिंह ने भी उम्र के मामले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी से मुलाकात की। उधर इस मसले पर केंद्रीय प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति जिसे लगता है कि उसे न्याय नहीं मिला है वह न्यायालय जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि जनरल सिंह ने अपने जन्मतिथि विवाद के हल के लिए केंद्र सरकार को उच्चतम न्यायालय में घसीटा है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसी सेना प्रमुख ने पद पर रहते हुए अपनी शिकायत दूर करने के लिए देश की सर्वोच्च अदालत में दस्तक दी है।

थलसेना प्रमुख ने सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में खींचा


हालांकि उन्होंने यह रिट याचिका व्यक्तिगत हैसियत से दायर की है। जनरल सिंह का कहना है कि उच्च विद्यालय के प्रमाणपत्र में दर्ज उनकी 10 मई 1951 की जन्मतिथि ही वैध है, जो सेना की रिकॉर्ड रखने वाली एजुटेंट शाखा में भी लिखी हुई है, लेकिन सैन्य सचिवालय में उनकी जन्मतिथि 10 मई 1950 लिखी हुई है और इसके आधार पर ही रक्षा मंत्रालय ने उनकी वैधानिक शिकायत को खारिज कर दिया था।

सेना प्रमुख की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता यू. यू. ललित के इस मामले की पैरवी करने की संभावना है। जनरल सिंह ने अपनी याचिका में कहा है कि वे 13 लाख फौजियों का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह उनके (जनरल सिंह के) सम्मान और गरिमा से जुड़ा मामला है।

उन्होंने दलील दी है कि उन्हें 36 वर्ष की सेवा के दौरान कई पदोन्नतियां भी दी गईं और इस दौरान सरकार ने जन्मतिथि का कोई विवाद सामने नहीं रखा। आश्चर्यजनक रूप से जनरल सिंह ने जन्मतिथि को लेकर जारी विवाद पर कोई टिप्पणी करने से इन्कार करते हुए रविवार को कहा था कि अब इस अध्याय को समाप्त कर दिया जाना चाहिए।

उन्होंने सेना दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में अलग से पत्रकारों से कहा था कि यह ऐसा मसला है, जिसे यहीं पर समाप्त कर दिया जाना चाहिए। इसे बहस का सार्वजनिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। इसलिए इस मसले को कोई मोड़ देना या तूल देना उचित नहीं। इसी से जुड़े एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा था कि मुझे इस विषय में टिप्पणी करने की कोई आवश्यकता नहीं है। मेरा मानना है कि मैं इस मसले पर पहले ही बहुत कुछ कह चुका हूं। मुझे इस बारे में बोलने की अब कोई जरूरत नहीं है; क्योंकि मैं जो कुछ भी कहूंगा, उसे या तो गलत तरीके से पेश किया जाएगा या लिखने वाला अपनी समझ के हिसाब से पेश करेगा।

जनरल सिंह इस वर्ष 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

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पाठकों की राय

24 मई 2012

Jan 17, 2012

यह सरकार सिर्फ़ चोरो और भृष्टाचारीओ की सरदार है,एक आम आदमी को भी स्मज़ मे आता है,की हाइ स्कूल की सर्टिफिकेट मे जो एज होती हैं वोही सही मानी जाती हैं.

PRAKASH MUMBAI

Jan 17, 2012

मेट्रिक के सर्टिफिकेट की तारीख सही होती है , उसको देखकर ही तो कोई भी आर्मी मे लेगता है
ये कोई विवाद की बात नही है,

Vijay Singh Delhi

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