24 मई 2012
फलक मामले में 2 गिरफ्तार, मानव तस्करी का शक
07 फरवरी 2012
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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नई दिल्ली।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पिछले दो सप्ताह से जिंदगी व मौत के बीच झूल रही दो साल की बच्ची फलक की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। उधर, सोमवार को इस मामले में दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस को यह मामला मानव तस्करी और देह व्यापार से जुड़ा होने का संदेह है।

इस बीच पुलिस ने 22 साल की एक युवती को ढूंढ निकाला है, जिसका दावा है कि वही फलक की मां है। गिरफ्तार किए गए दो लोगों में से एक महिला है जिसने कथित रूप से फलक की मां को दोबारा शादी करने और फलक के भाई-बहनों को गायब करने के लिए मजबूर किया।

पुलिस ने फलक की मां की पहचान मुन्नी खातून के रूप में की है। वह एक सप्ताह पहले राजस्थान के झुझुनूं जिले में मिली थी और रविवार रात उसे यहां लाया गया। उसके दो बच्चों का पता नहीं चल सका है।

मुन्नी ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी एक अन्य व्यक्ति से कर दी गई लेकिन वह उसके तीन बच्चों को साथ रखने के लिए राजी नहीं हुआ।

इस खुलासे के बाद पुलिस ने सोमवार को लक्ष्मी नामक महिला को गिरफ्तार किया। उसने मुन्नी से शादी कराने के एवज में उसके दूसरे पति से 2.7 लाख रुपये लिए थे। पुलिस ने बताया कि ऐसा प्रतीत होता है मुन्नी के दो बच्चों- एक लड़का और एक लड़की को बेचने में लक्ष्मी की अहम भूमिका रही है।

फलक को फिर से वेंटीलेटर पर रखा गया


पुलिस ने कांता चौधरी को भी गिरफ्तार किया है। समझा जाता है कि उसने मुन्नी को पहले पति मोहम्मद शाह हुसैन को छोड़कर दूसरी शादी करने के लिए राजी कराया। मुन्नी मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली है।

इस मामले में अब तक छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

पुलिस उपायुक्त छाया शर्मा ने संवाददाताओं से कहा कि 22 वर्षीय मुन्नी का डीएनए टेस्ट करवाया जाएगा जिससे पता चल सके कि वह फलक की जैविक मां है अथवा नहीं।

शर्मा ने कहा कि मुन्नी की शादी 16 साल की उम्र में 2006 में हो गई थी और उसके पहले पति से तीन संतान हैं जिसमें पांच साल का लड़का, साढ़े तीन साल की लड़की और फलक शामिल हैं। मुन्नी के दो बच्चे अभी कहां हैं यह स्पष्ट नहीं हो पाया है।

वहीं, फलक की हालत के बारे में एम्स ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख एम. सी. मिश्रा ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, "फलक की स्थिति अब भी नाजुक बनी है। उसके स्वास्थ्य में कोई सुधार या गिरावट दर्ज नहीं की गई है।"

फलक की देखभाल करने वाले चिकित्सकों ने उसके मस्तिष्क में संक्रमण को चिंता का कारण बताया। मिश्रा ने कहा, "मस्तिष्क में संक्रमण है, जो चिंता का कारण है, लेकिन संक्रमण रक्त में नहीं पाया गया है, जो सकारात्मक संकेत हैं। फेफड़े की स्थिति भी अच्छी है।"

उन्होंने बताया कि फलक को रह-रह कर वेंटिलेटर पर रखा जा रहा है। मिश्रा के अनुसार, "हम उसे लगातार वेंटिलेटर पर नहीं रख रहे हैं। यदि मरीज को लम्बे समय तक वेंटिलेटर पर रखा जाता है तो निमोनिया का खतरा बढ़ सकता है। निमोनिया के कारण होने वाले संक्रमण को नियंत्रित करना कठिन हो सकता है, क्योंकि बैक्टीरिया प्रतिरोधी हो जाते हैं। इसलिए हम उसे कुछ घंटों के लिए वेंटिलेटर से हटाने की कोशिश कर रहे हैं।"

उन्होंने यह भी कहा कि फलक के मस्तिष्क संक्रमण को दूर करने के लिए नए एंटीबायोटिक दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगले कुछ दिन उसकी जिंदगी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

फलक को 18 जनवरी को 14 साल की एक लड़की लेकर एम्स पहुंची थी और फिर उसे वहीं छोड़कर फरार हो गई थी। फलक के सिर पर गम्भीर चोट थी और चेहरे पर दांतों से काटे जाने के निशान थे। नाबालिग लड़की को फिलहाल सुधार गृह में रखा गया है।

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