24 मई 2012
2003 मुम्बई विस्फोट में 3 दोषियों का मृत्युदंड बरकरार
11 फरवरी 2012
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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मुम्बई।
बम्बई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को वर्ष 2003 में मुम्बई के दो बम विस्फोटों के दोषियों एक महिला सहित तीन लोगों की फांसी की सजा बरकरार रखी। आतंकवाद निरोधी अधिनियम (पोटा) की एक विशेष अदालत ने वर्ष 2009 में अशरत अंसारी, हनीफ सईद और उसकी पत्नी फहमिदा सईद को फांसी की सजा सुनाई थी।

2003 मुम्बई विस्फोट: दोषियों के मृत्युदंड पर फैसला टला



अदालत ने तीनों को दो टैक्सियों में बम लगाने का दोषी पाया था। 25 अगस्त 2003 को इन टैक्सियों में हुए विस्फोट से 52 लोग मारे गए। इनमें से एक टैक्सी में विस्फोट गेटवे ऑफ इंडिया के समीप और दूसरी टैक्सी में विस्फोट दक्षिण मुम्बई के झवेरी बाजार में हुआ।

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न्यायाधीश ए.एम. खानविलकर एवं न्यायाधीश पी.डी. कोडे ने पोटा अदालत के फैसले को सही ठहराया। इसके अलावा न्यायालय ने 28 जुलाई 2003 को मध्य मुम्बई के घाटकोपर में एक बस में हुए वस्फोट के लिए भी इन तीनों को दोषी करार दिया। इस विस्फोट में दो लोगों की जान गई थी।

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