24 मई 2012
चांद की धरती से नजदीकी मचा सकती है भारी तबाही!

18 मार्च 2011
आईबीएन-7


19  मार्च 2011 यानी कल महापूर्णिमा है जब चांद अपने सामान्य आकार से 30 फीसदी ज्यादा बढ़ा नजर आएगा यानि कल आसमान में ‘सुपरमून’ दिखेगा जिससे महाविनाश या महातबाही के अंदेशे लगाए जा रहे हैं। कल धरती और  चांद 19 साल में सबसे करीब होंगे और इनकी इसी निकटता को तबाही की वजह  बताया जा रहा है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक 19 मार्च को आपकी आंखों को सुकून देने वाला चांद पृथ्वी के बेहद करीब होगा। धरती के ज्यादा करीब होने की वजह से, चंद्रमा की धरती कई गुना ज्यादा चांदनी बिखरेगी।

वैज्ञानिक और ज्योतिषी के मुताबिक आसमान में सुपरमून का नजर आना धरती के लिए एक बड़ी तबाही का संकेत है। 19 मार्च को महापूर्णिमा के  दिन चांद अपने पूरे रूप में दिखेगा और 20 साल बाद चांद पृथ्वी के सबसे करीब होगा।

19 मार्च को पृथ्वी से चांद सिर्फ 2 लाख 21 हजार 556 मील दूर होगा। आमतौर पर चांद हमसे 2 लाख 35 हजार मील दूर होता है। लेकिन इस बार धरती की परिक्रमा करते करते चांद 14,500 मील पास आ गया है। चांद की गुरुत्वाकर्षण से धरती पर तबाही मच सकती है।

दुनियाभर के वैज्ञानिक इस सुपरमेन को लेकर परेशान हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में खराब मौसम  का जिम्मेदार चांद ही है। वहीं कई वैज्ञानिकों का कहना है कि चांद में इतनी ताकत ही नहीं कि वो धरती के अंदर हलचल कर सके।

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आंकड़ों के मुताबिक आसमान में जब-जब ये सुपरमून नजर आया है अपने साथ तबाही ही लाया है। इस सुपरमून से समंदर में सुनामी आ सकती है, अचानक भयंकर गर्मी पड़ने लगे जिससे आग भी लग सकती है या फिर कहीं बारिश में पूरा शहर तबाह हो सकता है। तो कहीं धरती फटने की घटना भी हो सकती है।

पिछले आंकड़ों  के मुताबिक साल 1938  में जब सुपरमून नजर आया था तब न्यूइंग्लैंड में चक्रवात  ने भयंकर तबाही मचाई थी। फिर साल 1955 में सुपरमून दिखा और हंटर वैली में  बाढ़ और बारिश ने भयंकर तबाही मचाई थी। साल 1974 में फिर एक बार चंद्रमा धरती के नजदीक आया और ट्रेसी साइक्लॉन ने ऑस्ट्रेलिया के  डार्विन शहर को तबाह कर दिया था। जनवरी 2005 में सुपरमून से ठीक दो हफ्ते  पहले सुनामी आई। इंडोनेशिया में हजारों लोग मारे गए और तबाही के ठीक 14 दिन आसमान पर चमका ये सुपरमून।

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अब भले ही कई वैज्ञानिक ये कह रहे हैं कि ये सुपरमून किसी भी तरह की तबाही  नहीं मचाएगा। लेकिन आंकड़ों को देखकर वो भी परेशान हैं। क्योंकि जब-जब  आसमान में चांद या सूरज ने कि है हलचल धरती का कोई न कोई हिस्सा बर्बाद हो  गया है।

दरअसल पूर्णिमा के दिन सूरज और चांद धरती को अपनी अपनी तरफ खींचते हैं और हो सकता है कि धरती के अंदर थोड़ी हलचल भी भयंकर तबाही मचा सकती  है।

 

WEEK-END MAGAZINE: फिर कांपी धरती, फिर छाया सुनामी का खतरा!

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पाठकों की राय

24 मई 2012

Mar 21, 2011

अरे कुनाल तू बैंक नही गया जा जल्दी वरना देर हो जएगी

neraj india

Mar 19, 2011

जल्दी भाग कुणाल नहीं तो तेरी बैक बंद हो जाएगी और तू सिर पीटता रह जाएगा ......बूरा ना मानो हॉली है.....! ! !

Chandan Patna

Mar 18, 2011

क्या वाकई ऐसा होगा ये धरती पुर एतबाहा हो जाएगी फिरा तो बैइका से सारे पैसे निकाला लेने चाहिए

kunal kota

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