24 मई 2012
इरफान ऑस्ट्रेलियाई दौरे में धोनी की रणनीति में फिट होंगे?
10 फरवरी 2012
वार्ता

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एडिलेड।
ऑलराउंडर इरफान पठान ने चार साल पहले 2008 में ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर त्रिकोणीय शृंखला पर भारत की पहली ऐतिहासिक जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन इस दौरे में उन्हें एक अदद मौके का इंतजार है।

पठान को ऑस्ट्रेलिया दौरे में दो ट्वेंटी-20 मैचों और त्रिकोणीय शृंखला के लिए भारतीय टीम में यह कहते हुए शामिल किया गया था कि ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों में वह काफी कारगर साबित हो सकते हैं, लेकिन अभी तक वह कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी और टीम प्रबंधन की रणनीति में कहीं फिट दिखाई नहीं दे रहे हैं।

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घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन से भारतीय टीम में वापसी करने वाले पठान को अब तक न तो दोनों ट्वेंटी-20 में और न ही भारत के पहले दो एकदिवसीय में मौका मिल पाया। दोनों ट्वेंटी-20 मैच पठान के लिए बढ़िया मौके हो सकते थे मगर उन्हें अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली।

मेलबर्न में त्रिकोणीय शृंखला के पहले मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया से हारने के बाद कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने कहा था कि टीम को एक तेज गेंदबाज ऑलराउंडर की जरूरत है। पर्थ में होने वाले अगले मैच से पहले तक पठान नेट पर जमकर अभ्यास कर रहे थे। मगर उन्हें श्रीलंका के खिलाफ मौका नहीं दिया गया।

पर्थ में पठान का पिछला रिकॉर्ड काफी अच्छा था और उन्होंने वाका मैदान पर दो मैचों के छह विकेट हासिल किए थे। मगर उन्हें श्रीलंका के खिलाफ टीम में नहीं उतारा गया। श्रीलंका के खिलाफ मैच जीतने के बाद धोनी ने फिर कहा कि टीम एक तेज गेंदबाज ऑलराउंडर ढूंढने के लिए संघर्ष कर रही है।

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धोनी के इस बयान से ऐसा लगता है कि टीम प्रबंधन पठान के बारे में कुछ सोच नहीं रहा है। हालांकि बल्लेबाजी में शीर्ष क्रम में रोटेशन के हिसाब से काफी फेरबदल चल रहे हैं मगर क्या गेंदबाजी में इस तरह के रोटेशन का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह समय एक बड़ा सवाल है।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में भारत तीन स्पिनरों और दो तेज गेंदबाजों के साथ उतरा था जबकि श्रीलंका के खिलाफ उसने लेग स्पिनर राहुल शर्मा को बाहर कर तेज गेंदबाज जहीर खान को टीम में जगह दी थी।

तेज गेंदबाज विनय कुमार का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ प्रदर्शन अच्छा रहा था मगर श्रीलंका के खिलाफ वह उतने प्रभावी नहीं रहे। दूसरे तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार दोनों ही मैचों में कोई विकेट हासिल नहीं कर पाए। ऐसे में टीम प्रबंधन एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले अगले मैच में कम से कम प्रवीण की जगह पठान को एक मौका दे सकता है।

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कप्तान धोनी और टीम प्रबंधन बल्लेबाज रोहित शर्मा के दोनों मैचों में विफल रहने के बावजूद उन्हें और मौके देने की वकालत कर रहे हैं ताकि वह खुद को टीम में स्थापित कर सकें। इसके लिए चोटी के तीन बल्लेबाजों में वीरेन्द्र सेहवाग और गौतम गंभीर रोटेशन के शिकार हो चुके हैं और अगला नंबर सचिन का हो सकता है।

यदि सचिन जैसा विश्व रिकॉर्डधारी बल्लेबाज भी रोटेशन की बलि चढ़ सकता है तो फिर गेंदबाजी में भी रोटेशन का इस्तेमाल होना चाहिए और पठान को खुद को साबित करने के लिए एक अदद मौका मिलना चाहिए।

27 वर्षीय पठान अब तक 108 एकदिवसीय में 1372 रन बनाने के अलावा 154 विकेट भी हासिल कर चुके हैं। उन्होंने अपना पिछला एकदिवसीय चेन्नई में दिसम्बर 2011 को वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था। इससे पूर्व उन्होंने अपना अंतिम एकदिवसीय आठ फरवरी 2009 को कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ खेला था।

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यदि अब पठान को मौका नहीं दिया जाता है तो फिर उन्हें कब मौका मिलेगा?

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