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बॉर्डर-गावस्कर सीरीज, भारत की यादगार जीतें, भाग दो

20 फरवरी 2013
Cricketnext.com      

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नई दिल्ली।मिलेनियम के दौर में भारतीय क्रिकेट लगातार सशक्त होता जा रहा था। उस दौर में कप्तान गांगुली को टीम इंडिया की कमान मिली थी। कंगारु टीम को एक मैच हराने में भी किसी टीम के पसीने छूट जाते थे पर भारतीय धुरंधरो ने यहां से कुछ यादगार मैच जीते।

इडन गार्डन का ग्रंथ
इडन गार्डन पर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ टेस्ट मैच कहीं ज्यादा था।भारत ने इस मैच को फोलो आन खेलने के बाद भी जीत लिया। सीरीज में भारत 0-1 से पीछे था।ऑस्ट्रेलिया ने 445 रनों का अंबार खड़ा किया था। 171 पर भारत की पारी सिमट गयी और उसे फोलो ऑन करना पड़ा। उसके बाद जो हुआ उसे देखकर बड़े बड़े क्रिकेट पंडित ने अपने दांतो तले उंगलियां दबा ली। वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ ने लगातार 1.5 दिन तक बल्लेबाजी करी और 376 रनों की साझेदारी करी। दूसरी पारी में भारत का स्कोर 589 पहुंच गया।
पहली पारी में हैट्रिक ले चुके हरभजन सिंह ने दूसरी पारी में भी अपना जलवा बरकरार रखा और दुसरी पारी में 6 विकेट चटके।


चेन्नई में मारा मैदान
कोलकाता में जीत के बाद सीरीज किसी थ्रिलर फिल्म की तरह दिख रही थी। आखिरी टेस्ट मैच में कंगारु के सलामी बल्लेबाज मैथ्यू हैडन ने पहली बार दोहरा शतक जमाया। वहीं भज्जी ने फिर 133 रन देकर 7 विकेट चटके। कंगारु की पहली पारी 391 रनों पर रोकने के बाद सचिन के शानदार 126 रनों की बदौलत टीम 110 रनों की बढ़त लेने में कामयाब रही। कंगारु बल्लेबाजी 5 वें दिन तक चली और ड्रा के लिए खेल रही कंगारु टीम के विकेट भज्जी ने चटकाए। आखिरी दिन 155 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के 7 विकेट 135 रनों पर सिमट गए। 151 रन पर जहीर खान का विकेट गंवाने के बाद भी सीरीज के अविष्कार रहे हरभजन सिंह ने चौका मारकर भारतीय टीम को एतिहासिक सीरीज जीत दिलवा दी।


ऐडीलेड में द्रविड़ का डंका
साल 2004 ऐडीलेड में द्रविड़ ने एक 223 रनों की पारी खेल कर अपने पुराने जोड़ीदार लक्ष्मण के साथ 303 रनों की साझेदारी कर ऑस्ट्रेलिया के पहाड़ जैसे स्कोर 556 की टीम इंडिया को बराबरी करवा दी। इसके बाद अजीत आगरकर के 6 विकेट ने भारत को चौथी पारी में 230 रनों का लक्ष्य दिया। चौथे दिन भारत का स्कोर 37-0 था पर पांचवे दिन लंच तक भारत 79 पर 2 विकेट गंवा चुका था। लंच के बाद सचिन और सौरव भी आउट हो गए 170 पर भारत के 4 विकेट चले गए।इसके बाद फिर लक्ष्मण और द्रविड़ ने लंबी साझेदारी करी।द्रविड़ ने चौका मार कर 22 साल से ऑस्ट्रेलियाई धरती पर हार झेल रही भारतीय टीम को जीत का स्वाद चखा दिया।

मुम्बई में कंगारु ढेर
यह सीरीज भारत कंगारु तेज गेंदबाजो के कारण पहले ही गंवा चुका था। सीरीज का यह आखिरी मैच तीन दिन में खत्म हो गया। पहली पारी में भारत 104 रनों पर आउट हो गया। दूसरी पारी में कंगारु टीम भी 203 रन बनाकर आउट हो गयी। सचिन और लक्ष्मण की बदौलत भारत अच्छे स्कोर की तरफ बढ़ रहा था कि तभी माइकल क्लार्क ने 9 रन देकर 6 विकेट चटका दिए। ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम 93 रन बनाकर आउट हो गयी और भारत 13 रन से जीत गया।

वाका में भारत का परचम
सिडनी टेस्ट मैच में खराब अंपायरिंग की शिकार रही टीम इंडिया ने वाका में जबरदस्त वापसी करी और कंगारु टीम को उन्हीं के हथियार तेज गेंदबाजी से घायल कर दिया। इस जीत से ऑस्ट्रेलिया का 16 टेस्ट का विजय रथ भी रुक गया। आखरी दिन ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 413 रनों की दरकार थी पर भारत यह मैच 72 रनों से जीत गया।

बोर्डर गावस्कर ट्रॉफी भारत की

नवंबर 2008 में भारतीय टीम ने कंगारुओं को चारों खाने चित्त कर दिया। नागपुर का आखिरी टेस्ट जीतने के बाद ऑस्ट्रेलिया को 172 रनों से हराकर भारत ने बोर्डर गावस्कर ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया। इस सीरीज में गांगुली और कुंबले ने संन्यास ले लिया। मैच के आखिरी पलों में कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने गांगुली को कप्तानी करने का मौका दिया।

लक्ष्मण और ओझा ने जीता कांटे का मैच
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक बार फिर कांटे का मैच देखने को मिला। मोहाली में भारत ने यह मैच एक विकेट से जीत लिया। इस बार भी ऑस्ट्रेलिया गेंदबाज़ी के सबसे बड़े दुश्मन वीवीएस लक्ष्मण ने उनसे मैच जीत लिया। 216 रनों का पीछा कर रही भारतीय टीम के 8 विकेट 124 रनों पर ही गिर गए थे। लक्ष्मण ने भारतीय पूंछ इशांत शर्मा (31) और प्रज्ञान ओझा (5) के साथ मिलकर भारतीय टीम को 1 विकेट से हरा दिया।


बॉर्डर-गावस्कर सीरीज, भारत की यादगार जीतें, भाग एक  

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