06 फरवरी 2012
वार्ता
hindi.in.com अब फेसबुक के ऐप्स पर भी देखें
नयी दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने कहा है कि वह 11 वर्षों से भारतीय टीम के प्रायोजक और आईपीएल फ्रेंचाइजी पुणे वॉरियर्स का मालिकाना हक रखने वाले सहारा के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बोर्ड जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं करना चाहता है।
बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और आईपीएल के अध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा, हम सहारा के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। आखिर वह पिछले 11 वर्षों से भारतीय टीम के प्रायोजक हैं, लेकिन हम जल्दबाजी में किसी निर्णय पर नहीं पहुंचना चाहते हैं। उल्लेखनीय है कि सहारा ने शनिवार को बेंगलुरू में आईपीएल-5 के लिए खिलाड़ियों की नीलामी से ऐन पहले प्रायोजन करार से हाथ खींचने और पुणे वॉरियर्स से किनारा करने की घोषणा की थी। सहारा की शिकायत थी कि बीसीसीआई उसकी उचित मांगों पर ध्यान नहीं दे रहा है।
टीम इंडिया और आईपीएल को 'सहारा' का नहीं रहा सहारा
सहारा के हटने से पुणे वॉरियर्स के खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटक सकता है। लेकिन शुक्ला ने कहा, पुणे वॉरियर्स अभी भी आईपीएल का हिस्सा है क्योंकि हमें कुछ भी लिखित में नहीं मिला है। हमें पूरी उम्मीद है कि इस मुद्दे को सुलझा दिया जाएगा। सहारा अगर अपने फैसले पर अड़ा रहता है तो बीसीसीआई को 2234 करोड़ रुपए का नुकसान होगा जिससे उसकी वित्तीय स्थिति डांवाडोल हो सकती है। बीसीसीआई और सहारा के बीच प्रायोजन करार 532 करोड़ रुपए का था जबकि सहारा ने पिछले वर्ष आईपीएल टीम पुणे वॉरियर्स को 1702 करोड़ रुपए में खरीदा था।
वार्ता
hindi.in.com अब फेसबुक के ऐप्स पर भी देखें
नयी दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने कहा है कि वह 11 वर्षों से भारतीय टीम के प्रायोजक और आईपीएल फ्रेंचाइजी पुणे वॉरियर्स का मालिकाना हक रखने वाले सहारा के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बोर्ड जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं करना चाहता है।
बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और आईपीएल के अध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा, हम सहारा के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। आखिर वह पिछले 11 वर्षों से भारतीय टीम के प्रायोजक हैं, लेकिन हम जल्दबाजी में किसी निर्णय पर नहीं पहुंचना चाहते हैं। उल्लेखनीय है कि सहारा ने शनिवार को बेंगलुरू में आईपीएल-5 के लिए खिलाड़ियों की नीलामी से ऐन पहले प्रायोजन करार से हाथ खींचने और पुणे वॉरियर्स से किनारा करने की घोषणा की थी। सहारा की शिकायत थी कि बीसीसीआई उसकी उचित मांगों पर ध्यान नहीं दे रहा है।
टीम इंडिया और आईपीएल को 'सहारा' का नहीं रहा सहारा
सहारा के हटने से पुणे वॉरियर्स के खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटक सकता है। लेकिन शुक्ला ने कहा, पुणे वॉरियर्स अभी भी आईपीएल का हिस्सा है क्योंकि हमें कुछ भी लिखित में नहीं मिला है। हमें पूरी उम्मीद है कि इस मुद्दे को सुलझा दिया जाएगा। सहारा अगर अपने फैसले पर अड़ा रहता है तो बीसीसीआई को 2234 करोड़ रुपए का नुकसान होगा जिससे उसकी वित्तीय स्थिति डांवाडोल हो सकती है। बीसीसीआई और सहारा के बीच प्रायोजन करार 532 करोड़ रुपए का था जबकि सहारा ने पिछले वर्ष आईपीएल टीम पुणे वॉरियर्स को 1702 करोड़ रुपए में खरीदा था।
यह खबर आपको कैसी लगी
10 में से 0 वोट मिले
पाठकों की राय
23 मई 2012
Feb 06, 2012
Ab BCCI pehle jaisi nahin rahi,ab unmein bahoot ghamand aa gaya hai,apni
mann marzi chalate hain,poori india ko pata hai,paison ke liye BCCI
kuchh bhi kar sakti hai aur kisiko kuchh bhi bol sakti hai,Mr. Rajiv
Shukla ne jo kaha,itni ghatia baat kahi bade sharm ki baat hai,ke taraf
congress ka neta hai aur BCCI aur IPL se juda hua hai,jab inko kisi
khiladi ke baarein koi chinta nahin hai,poori BCCI unit paison ke kaam
karti hai.
Manoj Kumar Malik Gurgaon
प्रमुख ख़बरें
- जरूर देखें: आज सुर्खियों में रहने वाली अहम खबरें
- facebook पर hindi.in.com को LIKE किया क्या?
- स्पेशल रिपोर्ट: गर्मी से झुलसा देश, इंडिया @45 डिग्री!
- KBP: संगमा की दहाड़, समर्थन नहीं, तो निर्दलीय खड़ा हो जाऊंगा
- इटली में भूकम्प के झटके जारी, हजारों विस्थापित
- पायलटों की हड़ताल का 15वां दिन, नुकसान 250 करोड़!
- मनमोहन के बाद कौन पर राहुल, प्रणब आगे
- KBP: संगमा बोले, एक नजर इधर, मैं भी हूं रेस में!
- देखें, कैसे पिता ने बच्चे को वॉशिंग मशीन में धोया?
- KBP: ममता नहीं चाहतीं प्रणब दा राष्ट्रपति बनें!
आज के वीडियो
यूपीः कांस्टेबल ने लुटेरों को पकड़ा, तो थानेदार ने पीट दिया
ख़बरें
सबसे ज्यादा पाठकों की राय
तस्वीरें
क्रिकेट समाचार
Live TV | Stock Market India | IBNLive News | IBNKhabar Hindi News | Cricket News | In.com | हमारे बारे में | हमारा पता | हमें बताइए | विज्ञापन | अस्वीकरण | गोपनीयता | शर्तें | साइट जानकारी
© 2011, Web18 Software Services Ltd. All Rights Reserved.











