23 मई 2012
भारत की पहली टेस्ट जीत के 60 साल पूरे
10 फरवरी 2012
वार्ता

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नई दिल्ली।
भारत की टेस्ट क्रिकेट में पहली टेस्ट जीत हासिल करने के आज 60 साल पूरे हो गए। भारत ने दस फरवरी 1952 को चेपक में इंग्लैंड को एक पारी और आठ रन से हराकर अपनी पहली टेस्ट जीत हासिल की थी।

भारत का टेस्ट सफर 1932 में शुरू हुआ था जो अब 462 टेस्टों तक पहुंच चुका है। भारत ने इनमें से 112 मैच जीते हैं, 147 हारे हैं, एक टाई खेला है और 202 ड्रॉ रखे हैं।

विजय हजारे की कप्तानी में भारत ने अपनी पहली टेस्ट जीत हासिल की थी। इस मैच में ऑलराउंडर वीनू मांकड, पंकज राय तथा पाली उमरीगर ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। मांकड ने जहां पहली में 55 रन पर आठ विकेट और दूसरी पारी में 53 रन पर चार विकेट सहित कुल 12 विकेट झटके थे जबकि सलामी बल्लेबाज पंकज राय ने 111 और उमरीगर ने नाबाद 130 रन बनाए थे।

एडिलेड में भारत को है ऑस्ट्रेलिया पर पहली जीत का इंतजार

इंग्लैंड की टीम दोनों पारियों में 266 और 183 रन पर सिमट गयी थी। भारत ने नौ विकेट पर 457 रन बनाकर अपनी पहली पारी घोषित की थी।

भारत ने अपने टेस्ट सफर के दौरान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 82 टेस्टों में से 20 जीते, बांग्लादेश के खिलाफ सात में से छह जीते, इंग्लैंड के खिलाफ 103 में 19 जीते, न्यूजीलैंड के खिलाफ 50 में 16 जीते, पाकिस्तान के खिलाफ 59 में नौ जीते, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 27 में सात जीते, श्रीलंका के खिलाफ 35 में 14 जीते, वेस्टइंडीज के खिलाफ 88 में 14 जीते और जिम्बाब्वे के खिलाफ 11 में सात मैच जीते हैं।

भारत के टेस्ट इतिहास में अब तक 31 खिलाड़ियों ने कप्तानी की है जिनमें सबसे सफल कप्तान सौरभ गांगुली रहे हैं। उन्होंने 49 टेस्टों में कप्तानी कर भारत को 21 में जीत दिलायी। अन्य प्रमुख कप्तानों में मोहम्मद अजहरूद्दीन ने 47 में 14, सुनील गावस्कर ने 47 में नौ और नवाब पटौदी ने 40 में नौ टेस्ट जीते हैं।

मौजूदा कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी 37 में 17 टेस्ट जीत चुके हैं, लेकिन विदेशी जमीन पर अपनी कप्तानी में सात टेस्ट लगातार हारने के कारण उनका शानदार रिकॉर्ड कुछ खराब हुआ है। हालांकि धोनी ने अपनी ही कप्तानी में भारत को विश्व की नंबर एक टेस्ट टीम बनाया था।

भारत के लिए कप्तानी करने वाले अन्य प्रमुख खिलाड़ियों में कपिल देव ने 34 टेस्ट, सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ ने 25-25 टेस्ट, बिशन सिंह बेदी ने 22 टेस्ट, अजित वाडेकर ने 16 टेस्ट, लाला अमरनाथ ने 15 टेस्ट, हजारे ने 14 टेस्ट, अनिल कुंबले ने 14 टेस्ट, नारी कंट्रेक्टर ने 12 टेस्ट और दिलीप वेंगसरकर ने दस टेस्टों में कप्तानी संभाली।

इस दौरान हेमू अधिकारी, पंकज राय, चंदू बोर्डे और रवि शास्त्री सिर्फ एक-एक टेस्ट में भारत की कप्तानी करने का गौरव हासिल कर पाए। गुंडप्पा विश्वनाथ जैसे महान बल्लेबाज सिर्फ दो ही टेस्टों में भारत की कप्तानी कर पाए।

मौजूदा चयनकर्ता प्रमुख कृष्णामाचारी श्रीकांत को 1989 के पाकिस्तान दौरे में चार टेस्टों में कप्तानी करने का मौका मिला, लेकिन इसके बाद उन्हें कप्तानी छोड़नी पड़ी थी। भारत के पहले कप्तान कर्नल सी.के नायडू ने चार टेस्टों में देश की कप्तानी की थी।

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