09 फरवरी 2012
वार्ता
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने आज हाईटेक साइबर हैकर गिरोह के पांच सदस्यों को लखनऊ से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार युवक बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बी.टेक.के छात्र हैं।
एसटीएफ प्रवक्ता ने बताया कि एसटीएफ ने दूसरों के खाते से पैसा निकालने वाले हाईटेक साइबर हैकर गिरोह के पांच सदस्यों को लखनऊ के महानगर क्षेत्र से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गये छात्रों में लखनऊ निवासी शनी सिंह, प्रतापगढ़ निवासी आलोक रंजन और झांसी निवासी पंकज कुमार यादव, अरविंद प्रजापति और सतीश विश्वकर्मा हैं। इनके पास से तीन लैपटॉप, पांच मोबाइल फोन, जिसमें तीन इंटरनेट चलाने के लिए जीपीआरएस एक्टिवेटेड हैं।
उन्होंने बताया कि महोबा के कृषि वैज्ञानिक सुभाष चन्द्र सिंह ने कानपुर के नवाबगंज थाने में दिसम्बर 2011 को एक मामला दर्ज कराया कि वे दिल्ली गये थे। दिल्ली से लौटकर आये तो सात दिसम्बर से 13 दिसम्बर के बीच उनके खाते से 43 हजार रुपये निकाल लिए गये, जबकि एटीएम कार्ड उनके पास था।
प्रवक्ता ने बताया कि इसके अलावा कानपुर के बर्रा थाने में इसी तरह के दो अलग-अलग खातों से दो लाख से अधिक रुपया निकाले गये और अन्य लोगों ने इसी तरह के कई मामले दर्ज कराये।
प्रवक्ता ने बताया कि अपराधियों को पकड़ने के लिए एसटीएफ के पुलिस उपमहानिरीक्षक विजय प्रकाश ने गिरोह के सदस्यों को पकड़ने के लिये पुलिस उपाधीक्षक त्रिवेणी सिंह को आवश्क सूचना के लिए निर्देशित किया।
उन्होंने बताया कि डाटाबेसों के विश्लेषण के उपरांत विभिन्न दूरसंचार कंपनियों से डाटा मांगवाकर विश्लेषण किया गया। उसके बाद आईपीए पते से इन साइबर अपराधियों को चिन्हित किया गया।
एसटीएफ को सूचना मिली कि ये लोग लखनऊ के महानगर इलाके में आने वाले हैं तभी उन्हें गिरफ्तार किया गया।
प्रवक्ता ने बताया कि गिरफ्तार छात्र विभिन्न बैंकों के एटीएम कार्ड, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड का स्किमर मशीन के माध्यम से क्लोन तैयार करते थे और एटीएम बूथ पर पैसा निकालते समय एटीएम कार्डधारक के पिनकोड को पहले से स्थापित किसी कैमरे से या उसके पीछे खड़े होकर पढ़ लेते थे। उसके बाद किसी साइबर कैफे में बैठकर या अपने लैपटॉप के माध्यम से विभिन्न ई-कॉमर्स वेबसाइटों द्वारा खरीदारी करते थे।
वक्ता ने बताया कि ये अभियुक्त 500 से दो हजार की धनराशि की छोटी-छोटी खरीदारी करते थे, ताकि इनके द्वारा निकाले गये पैसों के बारे में खातेदार को संदेह न हो। ये लोग थोड़े-थोड़े अन्तराल पर अलग-अलग खातों से पैसा निकालते थे।
गिरफ्तार छात्रों ने यह भी बताया कि एसबीआई के एटीएम कार्ड में 19 अंक अंकित होते हैं, जिसमें 14-15 नम्बर किसी क्षेत्र विशेष के कॉमन रहते हैं तथा शेष छह अंक एटीएम बूथ में खड़े होकर पिनकोड नोट कर लेते थे। इसके बाद अपने लैपटॉप पर डाटाकार्ड लगाकर र्फ्जी यूजर आईडी से खाते विभिन्न इंटरनेट साइटों पर खोल लेते थे और ऑन लाइन खरीददारी करते थे।
ये छात्र करीब 250 लोगों के मोबाइल फोन में टापअप भराने का काम कर चुके हैं। इनमें मुख्य रूप से सहरान सिद्दीकी व जीतू यादव का गिरोह है, जिनके द्वारा झांसी एवं आसपास के क्षेत्रों में करीब 3000 लोगों के खातों से ठगी कर खरीददारी की गयी। इस सिलसिले में विधिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस इनके अन्य साथियों की तलाश कर रही है।
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने आज हाईटेक साइबर हैकर गिरोह के पांच सदस्यों को लखनऊ से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार युवक बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बी.टेक.के छात्र हैं।
एसटीएफ प्रवक्ता ने बताया कि एसटीएफ ने दूसरों के खाते से पैसा निकालने वाले हाईटेक साइबर हैकर गिरोह के पांच सदस्यों को लखनऊ के महानगर क्षेत्र से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गये छात्रों में लखनऊ निवासी शनी सिंह, प्रतापगढ़ निवासी आलोक रंजन और झांसी निवासी पंकज कुमार यादव, अरविंद प्रजापति और सतीश विश्वकर्मा हैं। इनके पास से तीन लैपटॉप, पांच मोबाइल फोन, जिसमें तीन इंटरनेट चलाने के लिए जीपीआरएस एक्टिवेटेड हैं।
उन्होंने बताया कि महोबा के कृषि वैज्ञानिक सुभाष चन्द्र सिंह ने कानपुर के नवाबगंज थाने में दिसम्बर 2011 को एक मामला दर्ज कराया कि वे दिल्ली गये थे। दिल्ली से लौटकर आये तो सात दिसम्बर से 13 दिसम्बर के बीच उनके खाते से 43 हजार रुपये निकाल लिए गये, जबकि एटीएम कार्ड उनके पास था।
प्रवक्ता ने बताया कि इसके अलावा कानपुर के बर्रा थाने में इसी तरह के दो अलग-अलग खातों से दो लाख से अधिक रुपया निकाले गये और अन्य लोगों ने इसी तरह के कई मामले दर्ज कराये।
प्रवक्ता ने बताया कि अपराधियों को पकड़ने के लिए एसटीएफ के पुलिस उपमहानिरीक्षक विजय प्रकाश ने गिरोह के सदस्यों को पकड़ने के लिये पुलिस उपाधीक्षक त्रिवेणी सिंह को आवश्क सूचना के लिए निर्देशित किया।
उन्होंने बताया कि डाटाबेसों के विश्लेषण के उपरांत विभिन्न दूरसंचार कंपनियों से डाटा मांगवाकर विश्लेषण किया गया। उसके बाद आईपीए पते से इन साइबर अपराधियों को चिन्हित किया गया।
एसटीएफ को सूचना मिली कि ये लोग लखनऊ के महानगर इलाके में आने वाले हैं तभी उन्हें गिरफ्तार किया गया।
प्रवक्ता ने बताया कि गिरफ्तार छात्र विभिन्न बैंकों के एटीएम कार्ड, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड का स्किमर मशीन के माध्यम से क्लोन तैयार करते थे और एटीएम बूथ पर पैसा निकालते समय एटीएम कार्डधारक के पिनकोड को पहले से स्थापित किसी कैमरे से या उसके पीछे खड़े होकर पढ़ लेते थे। उसके बाद किसी साइबर कैफे में बैठकर या अपने लैपटॉप के माध्यम से विभिन्न ई-कॉमर्स वेबसाइटों द्वारा खरीदारी करते थे।
वक्ता ने बताया कि ये अभियुक्त 500 से दो हजार की धनराशि की छोटी-छोटी खरीदारी करते थे, ताकि इनके द्वारा निकाले गये पैसों के बारे में खातेदार को संदेह न हो। ये लोग थोड़े-थोड़े अन्तराल पर अलग-अलग खातों से पैसा निकालते थे।
गिरफ्तार छात्रों ने यह भी बताया कि एसबीआई के एटीएम कार्ड में 19 अंक अंकित होते हैं, जिसमें 14-15 नम्बर किसी क्षेत्र विशेष के कॉमन रहते हैं तथा शेष छह अंक एटीएम बूथ में खड़े होकर पिनकोड नोट कर लेते थे। इसके बाद अपने लैपटॉप पर डाटाकार्ड लगाकर र्फ्जी यूजर आईडी से खाते विभिन्न इंटरनेट साइटों पर खोल लेते थे और ऑन लाइन खरीददारी करते थे।
ये छात्र करीब 250 लोगों के मोबाइल फोन में टापअप भराने का काम कर चुके हैं। इनमें मुख्य रूप से सहरान सिद्दीकी व जीतू यादव का गिरोह है, जिनके द्वारा झांसी एवं आसपास के क्षेत्रों में करीब 3000 लोगों के खातों से ठगी कर खरीददारी की गयी। इस सिलसिले में विधिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस इनके अन्य साथियों की तलाश कर रही है।
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