18 जनवरी 2012
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
नई दिल्ली। भारत और चीन ने अपने द्विपक्षीय सम्बंधों को मजबूत करते हुए मंगलवार को अपनी सीमा पर शांति कायम करने के लिए एक तंत्र गठित करने का निर्णय किया। दोनों देशों ने यह निर्णय अपनी सीमा वार्ता के 15वें दौर की समाप्ति पर किया। सीमा प्रबंधन पर एक कार्यकारी तंत्र का अंतिम रूप भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और चीन के स्टेट काउंसलर दाई बिंगगुओ के बीच दो दिनों तक हुई वार्ता के बाद दिया गया। सीमा मसले पर मेनन और बिंगगुओ अपने-अपने देश के विशेष प्रतिनिधि हैं।
दाई और मेनन की उपस्थिति में चीन में भारत के राजदूत एस. जयशंकर और चीन के सहायक विदेश मंत्री लिउ झेनमिन ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
भारत, चीन आज से करेंगे सीमा विवाद पर वार्ता
समझौते के मुताबिक कार्यकारी तंत्र दोनों देशों को सीमा पर शांति एवं सौहार्द कायम करने से जुड़े महत्वपूर्ण सीमा मामलों का समाधान निकालने में मदद करेगा। इसके अलावा यह तंत्र एक-दूसरे की सीमा और अचिह्न्ति वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से होने वाली घुसपैठ पर उठने वाले गलतफहमियों को रोकने में सहायता करेगा।
इस तंत्र की अगुवाई भारत की ओर से एक संयुक्त सचिव और एक महानिदेशक जबकि चीन की तरफ से विदेश मंत्रालय करेगा। तंत्र में राजनयिक और सैन्य अधिकारी भी शामिल होंगे।
यह तंत्र सीमा सवाल के प्रस्ताव पर चर्चा नहीं करेगा और न ही विशेष प्रतिनिधियों के बीच वार्ता को प्रभावित करेगा।
अपनी दो दिनों की वार्ता में मेनन और दाई ने सीमा विवाद पर प्रस्ताव के लिए एक रूपरेखा पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों देश अब तक कि वार्ता में हुई प्रगति से अपने देशों को अवगत कराने के लिए एक रिकॉर्ड तैयार करने पर सहमत हुए। दोनों देशों की वार्ता के दूसरे स्तर की यह रूपरेखा नक्शे पर वास्तविक सीमांकन का आधार तैयार करेगी।
ज्ञात हो कि नक्शे पर सीमांकन की रूपरेखा तैयार करने के लिए यह वार्ता पिछले साल नवंबर में होनी थी लेकिन तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा पर चीन की आपत्ति पर प्रस्तावित वार्ता स्थगित कर दी गई।
‘भारत-चीन में विवाद हुआ, तो दुनिया जानेगी’
चीन ने नई दिल्ली में आयोजित वैश्विक बौद्ध सम्मेलन में दलाई लामा के हिस्सा लेने पर आपत्ति जताई थी लेकिन भारत सरकार ने चीन की आपत्ति के आगे झुकने से इंकार कर दिया।
मंत्रालय के मुताबिक मेनन और दाई ने द्विपक्षीय सम्बंधों में रुकावट डालने वाले मुद्दों का हल निकालने के साथ ही वैश्विक मसलों पर अपना सहयोग तेज करने का भी निर्णय लिया।
मंत्रालय के अनुसार, "वार्ता व्यापक क्षेत्र वाली, रचनात्मक एवं दूरगामी रही। कई मुद्दों पर दोनों देशों के विचार एक थे। दोनों पक्षों ने माना कि क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर व्यापक सहयोग की सम्भावना है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
नई दिल्ली। भारत और चीन ने अपने द्विपक्षीय सम्बंधों को मजबूत करते हुए मंगलवार को अपनी सीमा पर शांति कायम करने के लिए एक तंत्र गठित करने का निर्णय किया। दोनों देशों ने यह निर्णय अपनी सीमा वार्ता के 15वें दौर की समाप्ति पर किया। सीमा प्रबंधन पर एक कार्यकारी तंत्र का अंतिम रूप भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और चीन के स्टेट काउंसलर दाई बिंगगुओ के बीच दो दिनों तक हुई वार्ता के बाद दिया गया। सीमा मसले पर मेनन और बिंगगुओ अपने-अपने देश के विशेष प्रतिनिधि हैं।
दाई और मेनन की उपस्थिति में चीन में भारत के राजदूत एस. जयशंकर और चीन के सहायक विदेश मंत्री लिउ झेनमिन ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
भारत, चीन आज से करेंगे सीमा विवाद पर वार्ता
समझौते के मुताबिक कार्यकारी तंत्र दोनों देशों को सीमा पर शांति एवं सौहार्द कायम करने से जुड़े महत्वपूर्ण सीमा मामलों का समाधान निकालने में मदद करेगा। इसके अलावा यह तंत्र एक-दूसरे की सीमा और अचिह्न्ति वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से होने वाली घुसपैठ पर उठने वाले गलतफहमियों को रोकने में सहायता करेगा।
इस तंत्र की अगुवाई भारत की ओर से एक संयुक्त सचिव और एक महानिदेशक जबकि चीन की तरफ से विदेश मंत्रालय करेगा। तंत्र में राजनयिक और सैन्य अधिकारी भी शामिल होंगे।
यह तंत्र सीमा सवाल के प्रस्ताव पर चर्चा नहीं करेगा और न ही विशेष प्रतिनिधियों के बीच वार्ता को प्रभावित करेगा।
अपनी दो दिनों की वार्ता में मेनन और दाई ने सीमा विवाद पर प्रस्ताव के लिए एक रूपरेखा पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों देश अब तक कि वार्ता में हुई प्रगति से अपने देशों को अवगत कराने के लिए एक रिकॉर्ड तैयार करने पर सहमत हुए। दोनों देशों की वार्ता के दूसरे स्तर की यह रूपरेखा नक्शे पर वास्तविक सीमांकन का आधार तैयार करेगी।
ज्ञात हो कि नक्शे पर सीमांकन की रूपरेखा तैयार करने के लिए यह वार्ता पिछले साल नवंबर में होनी थी लेकिन तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा पर चीन की आपत्ति पर प्रस्तावित वार्ता स्थगित कर दी गई।
‘भारत-चीन में विवाद हुआ, तो दुनिया जानेगी’
चीन ने नई दिल्ली में आयोजित वैश्विक बौद्ध सम्मेलन में दलाई लामा के हिस्सा लेने पर आपत्ति जताई थी लेकिन भारत सरकार ने चीन की आपत्ति के आगे झुकने से इंकार कर दिया।
मंत्रालय के मुताबिक मेनन और दाई ने द्विपक्षीय सम्बंधों में रुकावट डालने वाले मुद्दों का हल निकालने के साथ ही वैश्विक मसलों पर अपना सहयोग तेज करने का भी निर्णय लिया।
मंत्रालय के अनुसार, "वार्ता व्यापक क्षेत्र वाली, रचनात्मक एवं दूरगामी रही। कई मुद्दों पर दोनों देशों के विचार एक थे। दोनों पक्षों ने माना कि क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर व्यापक सहयोग की सम्भावना है।"
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