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पाक में हिंदू ही नहीं शिया मुसलमान भी हैं निशाने पर

20 फरवरी 2013
आईबीएन 7

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नई दिल्ली। पाकिस्तान के क्वेटा में रविवार हुए धमाके में मरने वालों की संख्या बढ़कर सवा सौ के पार पहुंच गई है। धमाके की ज़िम्मेदारी लश्करे झंगवी नाम के आतंकी संगठन ने ली है। बलूचिस्तान के क्वेटा के हजारा में 17 फरवरी को हुए जबरदस्त बम धमाके में सौ से ज्यादा हजारा शिया मारे गए। पाकिस्तान में हजारा शिया जो कि अल्पसंख्यक हैं। उनके खून बहने का सिलसिला लगातार जारी है। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की हुकूमत आतंकियों का निशाना बन रहे इस समुदाय के लोगों को सुरक्षा मुहैया कराने में पूरी तरह से विफल रही है। ये लोग संयुक्त राष्ट्र से भी दखल देने की मांग कर रहे हैं।

हर बार खोखले साबित हुए दावे

क्वेटा में बम धमाके में मारे गए एक शख्स की बहन रिज़वाना का कहना है कि यहां लोग सुरक्षित नहीं, बच्चे और औरतें तक सुरक्षित नहीं। हमारी गलती क्या है? हमने क्या गलत किया है? हमें सिर्फ शांति चाहिए। हमारी दो मांगें हैं, यहां सेना को लाया जाए और आतंकियों के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन चलाया जाए। हजारा शिया समुदाय को निशाना बनाकर इसी साल जनवरी में भी धमाके किए गए थे। जिसमें करीब सौ लोग मारे गए थे। हमलों के बाद शिया सड़कों पर उतर आए और शवों को तब तक दफ़नाने से इनकार कर दिया था, जब तक कि पाकिस्तान सरकार उनकी सुरक्षा का इंतजाम नहीं करती। यही नहीं उनकी मांगों के मद्देनजर पाक सरकार को बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री को भी बर्खास्त करना पड़ा था, लेकिन अल्पसंख्यक शियाओं को किए गए पाक सरकार के तमाम दावे खोखले ही नज़र आ रहे हैं।

लश्‍कर ए झांगवी ने किया ताजा हमला

ताज़ा धमाकों के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने संसद के विशेष सत्र में एक बार फिर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है। पीएम राजा परवेज़ अशरफ के मुताबिक इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि हमारा समाज कई तरह के आतंक की गिरफ्त में है, जिसकी वजह से बेकसूरों का खून बह रहा है। इससे हर प्रांत, हर समुदाय प्रभावित है। इसका असर सेना से लेकर राजनीति तक, कॉलेजों से लेकर मस्जिदों तक में है। दरअसल, पाकिस्तान का बलूचिस्तान सूबा मजहबी गुटों और अलगाववादी विद्रोहियों के संघर्ष से जूझ रहा है। मुल्क के शिया अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। पाक में शियाओं की आबादी सुन्नी मुसलमानों की संख्या का 20 फीसदी है। ज्यादातर शिया मुसलमान हज़ारा समुदाय से हैं। शियाओं पर ज्यादातर हमलों के पीछे लश्कर-ए-झांगवी या LEJ का हाथ रहा है। ताजा हमले की जिम्मेदारी भी लश्कर-ए-झांगवी ने ली है।

ईरान में क्रांति के बाद शुरू हुआ था आंदोलन

लश्कर-ए-झांगवी दरअसल सिपाह-ए-साहबा नाम के संगठन से निकला है। सिपाह-ए-साहबा को पाकिस्तान में सांप्रदायिक हिंसा का जनक माना जाता है। पाकिस्तान में शिया विरोधी आन्दोलन करीब 30 साल पहले ईरान में क्रांति के बाद शुरू हुआ था। मुल्क के इतिहास पर शोध करने वालों का कहना है कि देश में 1980 से 1985 के बीच जनरल जिया उल हक़ की सरकार के दौर में देश का इस्लामीकरण हुआ और सिपाह ए साहबा जैसे संगठनों को फैलने का अवसर मिला सिपाह ए साहबा ने अपने अस्तित्व में आने के बाद से ही शिया संप्रदाय के लोगों पर हमले करना शुरू कर दिया था। हालांकि, लश्कर-ए-झांगवी पर पाकिस्तान सरकार ने 2001 में ही प्रतिबंध लगा रखा है, 2003 में अमेरिका ने भी इसे उग्रवादी गुट करार दिया, लेकिन इनके खिलाफ कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ऊपर से लश्करे झांगवी को पाकिस्तानी तालिबान जैसे संगठन लगातार मदद देते रहे हैं। अब ऐसे संगठनों के खिलाफ बातचीत छोड़ सैन्य कार्रवाई की मांग ज़ोर पकड़ रही है।

 

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