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नई दिल्ली। निवेशकों का पैसा लौटाने में आनाकानी सहारा ग्रुप को भारी पड़ गई है। सेबी ने सहारा ग्रुप की दो कंपनियों के 100 से ज्यादा अकाउंट जब्त कर लिए हैं। इसके अलावा कई ग्रुप की कई चल-अचल संपत्तियों की कुर्की के आदेश भी दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सेबी से सहारा के खिलाफ कार्रवाई में देरी पर सवाल किए थे। इसके बाद सेबी ने ये कार्रवाई की है। हालांकि इस पर अब तक सहारा ग्रुप की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
24 हजार करोड़ का सवाल
तीन करोड़ लोगों का निवेश, 24 हजार करोड़ रुपये का सवाल, सुप्रीम कोर्ट का आदेश, और आखिरकार गिर ही गई सहारा ग्रुप पर गाज। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद आखिरकार सहारा पर सेबी ने कड़ी कार्रवाई की। सहारा ग्रुप को बड़ा झटका देते हुए सेबी ने ग्रुप की दो कंपनियों के 100 खातों को सील कर दिया। ये कंपनियां हैं सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड और सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड। दरअसल इन कंपनियों पर करीब 3 करोड़ लोगों को नियमों के खिलाफ जाकर लोन देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ये कार्रवाई की है। सेबी ने सहारा के मुखिया सुब्रत रॉय सहारा के बैंक अकाउंट को भी सीज कर दिया है। यही नहीं, उनकी चल और अचल संपत्ति जब्त करने का भी आदेश सेबी ने दिया है।
सहाहा ने जमा नहीं कराए पैसे
गौरतलब है कि दिसंबर 2012 में अदालत ने सहारा ग्रुप को ये पैसा तीन किस्तों में देने की छूट दी थी। जिसमें फौरन 5120 करोड़ रुपये देना था। इसके बाद 10 हजार करोड़ जनवरी के पहले हफ्ते में और बाकी पैसे फरवरी के पहले हफ्ते में देने की शर्त थी। लेकिन जब ये पैसे सहारा ने जमा नहीं किए तो सेबी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक कार्रवाई की, बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को भी कार्रवाई में देरी करने पर फटकार लगाई थी।
सेबी का आदेश पर प्रॉपर्टी जब्त
सेबी के आदेश के मुताबिक सहारा की काफी प्रॉपर्टी जब्त हो सकती है। सहारा की पुणे के करीब ऐंबी वैली की जमीनें, दिल्ली, गुड़गांव, मुंबई और देश के दूसरी जगहों पर सहारा की जमीनें। बैंकों में सहारा के म्यूचुअल फंड, डिमैट अकाउंट, इनवेस्टमेंट सब सीज होंगे। बताया जाता है कि सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन ने 13 मार्च 2008 को 19 हजार चार सौ करोड़ रुपये और सहारा हाउसिंग इंडिया कॉरपोरेशन ने 6 हजार 380 करोड़ रुपये इकट्ठा किए थे। लेकिन समय से पहले वापस ले लिए गए निवेश के बाद इन कंपनियों पर 31 अगस्त को निवेशकों का कुल 24 हजार 029 करोड़ रुपये बकाया था।
गौरतलब है कि सहारा ग्रुप की दो कंपनियों सहारा हाउसिंग और सहारा रियल इस्टेट के निवेशकों ने नियामक संस्था सेबी के समक्ष शिकायत की थी कि उनके द्वारा निवेश किया गया पैसा समय पर उन्हें नहीं मिल रहा। यह केस सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को एक समय-सीमा के भीतर तीन करोड़ निवेशकों के 24 हजार करोड़ रुपये 15 फीसदी ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया। सहारा इस मामले में टालमटोल करता रहा, आखिरकार 5 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को आदेश दिया कि वो सहारा ग्रुप के अकाउंट फ्रीज करने के लिए स्वतंत्र है जिसपर अमल करते हुए सेबी ने ये कड़ा कदम उठाया है।
सेबी की इस कार्रवाई से सहारा ग्रुप को जोरदार झटका लगा है। हम आपको बताते हैं कि सहारा ग्रुप की कौन कौन सी चल-अचल संपत्ति जब्त की गई है-
1. मुंबई के एंबी वैली में 313 एकड़ जमीन का डवलपमेंट राइट
2. मुंबई के वर्सोवा में 106 एकड़ जमीन
3. देश के 10 शहरों में 764 एकड़ जमीन
4. लखनऊ में 191 एकड़ जमीन
5. लखनऊ के जियामऊ में 170 एकड़ जमीन
6. एंबी वैली लिमिटेड के 1 करोड़ 51 लाख शेयर
7. सहारा इंफ्रास्ट्रक्चर और हाउसिंग के 204 करोड़ रुपए के शेयर
8. सहारा हाउसिंग का हर बैंक-हर ब्रांच में अकाउंट
9. सहारा हाउसिंग के नाम दर्ज चल-अचल संपत्ति
10. सुब्रत राय सहारा के सारे बैंक अकाउंट
11. सुब्रत राय सहारा के नाम सारी चल-अचल संपत्ति।
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20 मई 2013
Feb 19, 2013
सहारा कंपनीएक अची संस्ता हेअभी इसका समये अछा नही चल रहा हे इस वजासे लोग इसकी ग़लत अफवा उड़ा रहे हे दिन बदलते समे नही लगता इसका भी समये आएगा ओर सेबी को इसका हर्जाना भरना पड़ेगा पिछले कुछ साल पहले भी ये घटना हुई थी लेकिन क्या हुवा जीत तो सहारा की हुईसहारा प्रणाम जे हिंद
adtya kiradoo bikana citi
Feb 18, 2013
सहारा मे कर्मचारी का मानसिक वा शारीरिक सोसन किया जाता परा बॅंकिंग मे सेबी बहुत अच्छा कर रही है ये तो बहुत पहले होना चाहिए था सेबी से गुज़ारिस है की सहारा को उसकी हद मे कम करने के लिए प्रेरित करे
ram kunar kanpur
Feb 18, 2013
सहारा चोर कंपनी है यहा पर टॅक्स की भी चोरी की जाती है कोरंचारियो पर लोन दिखा कर जबकि लोन केवल पेपर पर ही होता है और कर्मचारी खुच भी नही प्राप्त होता है हर साल एसा होता है यहा 10 से 9 बजे रत तक कम कराया जाता है ओवर टाइम भी नही दिया जाता है कुछ बोलने पर नोकारी से निकालने की धहमकी दी जाती है सरकारी अवकास मे भी ऑफीस खुला रहता है यहा परा बॅंकिंग का हर का हर कर्मचारी बहुत ही परेसन है अगर आप जाच कराए तो मालूम हो जाएगा प्लीज़ हमारी मदात करे
kamal kanpur
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