19 अक्टूबर 2012
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मुंबई। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी को निशाना बनाने वाले अरविंद केजरीवाल के खिलाफ महाराष्ट्र की लगभग पूरी राजनीतिक जमात एकजुट दिखाई दे रही है। गडकरी पर खुलासे के बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार समेत महाराष्ट्र कांग्रेस, शिव सेना और राज ठाकरे, अजित पवार समेत सभी नेता या तो कुछ नहीं बोले और अगर बोले तो बहुत केजरीवाल के विरोध में ही बोले। शिव सेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में तो केजरीवाल पर जबर्दस्त प्रहार किए गए हैं।
गडकरी विरोधी आरोप फुस्स हो गए
सामना लिखता है, अरविंद केजरीवाल और अंजलि दमानिया ने बीते लगभग एक सप्ताह से जोरदार हवा फलाई थी। युद्घ के पहले तुतारी और रणभेरियां भी बजाई गईं। ऐसा वातावरण तैयार किया गया था मानो दमानिया बाई और केजरीवाल ऐसी तोप दागेंगे कि गडकरी का राजनीतिक जीवन ध्वस्त हो जाएगा, लेकिन गडकरी के गढ़ का एक पत्थर भी नहीं हिला। दमानिया के आरोपों की तोप में गोला ही नहीं था, इसलिए रॉबर्ट वाड्रा के मामले में केजरीवाल ने जिस तरह से साख बनाई थी वह गडकरी पर आरोपों लगाने के बाद खराब हो गई। केजरीवाल के गडकरी विरोधी आरोप फुस्स हो गए।
बेदम आरोपों से सिफ गडकरी पर कीचड़ उछाली
शिवसेना के मुखपत्र ने लिखा, केजरीवाल का आरोप है कि जिस विदर्भ में किसानों ने सर्वाधिक आत्महत्या की है उस विदर्भ के किसानों की जमीन और पानी गडकरी ने अपने फायदे के लिए घुमा लिया। इस मंडली का आरोप है कि गडकरी के साथ शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार की भी साठगांठ है। केजरीवाल और दमानिया ने जो आरोप लगाए हैं उनसे कोई भी भांप जाएगा कि इनमें दम नहीं है।
गडकरी ने साबित कर दिया कि जमीन बंजर थी
केजरीवाल के आरोपों पर गडकरी ने प्रमाण के साथ स्पष्ट कर दिया कि वह जमीन बंजर थी। उस जमीन को गडकरी ने खुद न लेकर एक धर्मार्थ संस्था को दिया। वह जमीन गडकरी के नाम पर भी नहीं है। केजरीवाल और उनकी टीम ने तो ऐसा ताव दिखाया था मानो, गडकरी ने गुंडागर्दी करके जमीन हथिया ली है। सामना लिखता है कि घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए खुलासा करने वाले को अपनी जिम्मेदारी का भान भी हो चाहिए। उसकी जवाबदेही भी होनी चाहिए। सरा गैर जिम्मेदार आरोप लगाने से किसी का कुछ नहीं होता। इससे कुछ देर के लिए सनसनी जरूर फलती है, लेकिन यह सनसनी लंबे समय तक टिक नहीं पाती है।
संयम नहीं बरता तो सिरफिरे की तरह घूमेंगे केजरीवाल
संपादकीय ने लिखा कि गडकरी और उन जैसे नेताओं पर आरोप लगाते हुए अगर केजरीवाल व उनकी टीम ने संयम नहीं बरता तो जल्द ही उनके सामने दिल्ली की सड़कों पर सिरफिरे की तरह घूमने की नौबत आ जाएगी। गडकरी ने दिल्ली में अपना सिक्का जमा लिया है। वो कांग्रेस खिलाफ सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ रहे हैं। सामना ने बीजेपी की अंदरूनी राजनीति पर भी कटाक्ष किया है। अखबार लिखता है कि गडकरी को बीजेपी का दूसरी बार अध्यक्ष बनाया गया है। उनकी तरक्की से जलने वाले साठगांठ कर इस तरह से आरोपों के पटाखे फोड़ रहे हैं। गडकरी ने जिस तरह बंजर जमीन ली उसी तरह उन पर बांझ आरोप लगाए जा रहे हैं।
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20 मई 2013
Oct 21, 2012
आम आदमी को एक जुट करना बहुत मुश्किल हे, मगर सारे पॉलीटीशहियाँ चोर पल भर मे एकजुट हो जाते हे. केजरीवाल पहले बड़े घोटालो के पूछे पड़ना चिए ना की छोटे . केजरीवाल तोम आगे बडो हम टुमरे पीछे न्ही हे. यही भारत का आम आदमी हे. और ये बात पॉलीटीशन अभ्ुत आचे से जानते हे. मे तो केजरी वॉल के साथ हू. और रहूँगा. क्यो की मूज़े मेरा देश पायरा हे.
shyam nadiad
Oct 20, 2012
भ्रास्ट्रचार के खिलाफ आम आदमी चाहे एकजुट हो या ना हो सारे चोर ज़रूर एकजुट हो जाते हे,
Pradeep Kumar Mumbai
Oct 20, 2012
भ्रास्ट्रचार के खिलाफ आम आदमी चाहे एकजुट हो या ना हो सारे चोर ज़रूर एकजुट हो जाते हे,
rakesh chandigarh
Oct 19, 2012
सचिन ने नही कहा है की मुझे तुम कोई सम्मान दो
niraj kumar sinha hajipur
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