04 फरवरी 2012
आईबीएन-7
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नई दिल्ली। दूरसंचार घोटाला मामले में केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम को सहआरोपी बनाने की याचिका खारिज कर दी गई है। पटियाला हाउस कोर्ट के न्यायमूर्ति ओ. पी. सैनी ने यह फैसला सुनाया। सरकार के लिए यह एक बड़ी राहत की बात है। कोर्ट ने 2जी मामले में स्वामी के तर्कों को चिदंबरम को सहआरोपी बनाने के लिए पर्याप्त नहीं माना।
कोर्ट के फैसले के बाद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि मैं इस फैसले से हैरान हूं। इस फैसले के खिलाफ मैं हाईकोर्ट में अपील करूंगा। उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए कोई नई बात नहीं है, जब तक उन्हें इंसाफ नहीं मिल जाता है मैं यह जंग जारी रखूंगा। अभी मैंने कोर्ट का ऑर्डर नहीं पढ़ा है कि क्यों मेरी याचिका खारिज हुई।
पटियाला हाउस कोर्ट में न्यायमूर्ति ओ. पी. सैनी ने अपना फैसला सुनाने से पहले याचिकाकर्ता सुब्रह्मण्यम स्वामी को अकेले अपने चैंबर में बुलाया। कोर्ट रूम से पत्रकारों को बाहर किया गया।
मालूम हो कि चिदंबरम को 2 जी मामले में सहआरोपी बनाने की मांग को लेकर जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी ने याचिका दर्ज की थी और अदालत को सबूत सौंपे थे। इसके बाद 4 फरवरी यानी आज के लिए अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
पिछली कई सुनवाइयों के दौरान निचली अदालत में स्वामी ने दावा किया था कि टेलीकॉम घोटाले में पूर्व टेलीकॉम मंत्री ए. राजा और मौजूदा गृहमंत्री पी. चिदंबरम बराबर के दोषी हैं। इसके लिए उनके पास पर्याप्त सबूत हैं। ये दस्तावेज चिदंबरम पर आपराधिक और भ्रष्टाचार के मुकदमे का आधार बनाने के लिए काफी हैं।
जो अहम दस्तावेज स्वामी ने अदालत में सौंपे उसमें 25 मार्च 2011 को वित्त मंत्रालय का पीएमओ को दिया गया नोट है। इसमें कहा गया है कि चिदंबरम स्पेक्ट्रम घोटालो को नीलामी की प्रक्रिया के जरिए रोक सकते थे। 24 फरवरी 2011 को संसद में दिए प्रधानमंत्री के बयान को भी स्वामी ने आधार बनाया है। इस बयान में मनमोहन ने कहा था कि ए राजा और तत्कालीन वित्तमंत्री चिदंबरम स्पेक्ट्रम की कीमतें तय करने के लिए जिम्मेदार थे। चिदंबरम और स्वामी के बीच स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर हुए पत्राचार को भी सबूत बनाया गया। इसके अलावा और भी कई अहम दस्तावेज स्वामी ने अदालत को सौंपे थे।
अदालत में सौंपे गए दस्तावेज में स्वामी ने ये भी साबित करने की कोशिश की है कि स्वान टेलीकॉम और यूनिटेक वॉयरलेस ने जिस तरीके से अपने शेयर एतीसलात और टेलीनोर को बेचे वे गैरवाजिब थे। स्वामी के मुताबिक इसकी पूरी जानकारी चिदंबरम को थी। इतना ही नहीं 2001 की दरों पर 2008 में स्पेक्ट्रम का आवंटन किया गया था। तमाम अदालती प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सबकी नजरें पटियाला हाउस कोर्ट पर हैं क्योंकि अदालत का आदेश चिदंबरम का भविष्य तय करेगा।
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23 मई 2012
Feb 04, 2012
कोर्ट के फेसले के बाद स्वामी, बी जे पी को माफी माँगनी चाहिए. पूरे विपक्ष को माफी माँगनी चाहिए जिसने कई दिन तक संसद नहीं चलने दी और होम मिनिस्टर का बयकट किया. अन्ना टीम को माफी माँगनी चाहिए जिसका कहना है की अगर लोकपाल होता तो चिदंबेरम जैल में होते.
gurcharan singh bedi meerut
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