08 दिसम्बर 2012
आईबीएन- 7
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नई दिल्ली। दुनियाभर में भारतीय उद्योग को पहचान दिलाने वाले रतन टाटा सरकार से खासे नाराज हैं। टाटा के मुताबिक सरकार से सहयोग की कमी के चलते भारतीय उद्योग चीन से मुकाबला नहीं कर पा रहा। उन्होंने रिश्वत से प्रभावित कारोबारी माहौल पर भी चिंता जताई। 28 दिसंबर को टाटा समूह के चेयरमैन पद से रिटायर हो रहे रतन टाटा ने ये बातें लंदन के फाइनेंशियल टाइम्स अखबार को दिए एक इंटरव्यू में कही हैं।
इसी महीने टाटा संस के चेयरमैन की कुर्सी छोड़ रहे रतन टाटा सरकार से खासे नाराज हैं। अपने रिटायरमेंट से पहले फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने सरकार पर एकजुट होकर काम न करने की तोहमत जड़ डाली। टाटा के मुताबिक उनके समूह ने विस्तार के लिए दूसरे उभरते बाजारों में संभावनाएं तलाशने की इसलिए योजना बनाई क्योंकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नौकरशाही को लेकर शिकायतों को दूर करने में नाकाम रहे।
दरअसल, रतन टाटा को सरकार की फैसले लेने में नाकामी खल रही है, जिसकी वजह से पूंजी निवेश देश से दूर जा रहा है और भारतीय कंपनियां विदेश जाने को मजबूर हैं। टाटा की मानें तो सरकार की ओर से सहयोग की कमी के चलते भारतीय उद्योग चीन से मुकाबला नहीं कर पा रहा है। रतन टाटा रिश्वत से प्रभावित कारोबारी माहौल से भी चिंतिंत हैं। रतन टाटा ने कहा कि टाटा समूह के नैतिक मूल्यों ने कारोबार में कीमत चुकाई है।
यही नहीं, उन्होंने सरकारी एजेंसियों के काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाए। रतन टाटा ने कहा कि अलग-अलग सरकारी एजेंसी किसी कानून का अलग-अलग मतलब निकालती है। ऐसी सूरत में उनके समूह जैसी कंपनियां या कारोबारी समूह देश से दूर जाकर दुनिया भर में विकास के मौके तलाशने पर मजबूर हो जाते हैं।
गौरतलब है कि मनमोहन सरकार इस समय कई आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा रही है जिसमें मल्टी-ब्रैंड रिटेल, बीमा और एविएशन को विदेशी निवेश के लिए खोलना शामिल है। लेकिन रतन टाटा ने निवेशकों को सरकार से मिलने वाले सहयोग पर सवाल उठा दिए हैं। उनके मुताबिक सरकार के सहयोग में भारी अंतर है। अगर हमारे उद्योग को उसी तरह का प्रोत्साहन दिया जाता जैसा कि चीन में दिया जाता है तो मुझे लगता है कि भारत निश्चित तौर पर चीन से मुकाबला कर पाता।
इसके अलावा टाटा के इन-हाउस प्रकाशन में एक अलग इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उनके उत्तराधिकारी साइरस मिस्त्री को समूह के नैतिक मूल्यों के साथ समझौता नहीं करने के लिए एक बड़े संघर्ष से जूझना पड़ेगा।
गौरतलब है कि रतन टाटा तीन हफ्ते बाद 28 दिसंबर को 75 साल के होने पर कंपनी की कमान छोड़ देंगे।
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