23 फरवरी 2012
आईबीएन-7/सीएनएन-आईबीएन
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नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने रामलीला मैदान में बाबा रामदेव के सत्याग्रह के दौरान बीते साल 4 जून को हुए पुलिस लाठीचार्ज पर फैसला आज सुना दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इसके लिए बाबा रामदेव और दिल्ली पुलिस दोनों पक्ष जिम्मेदार हैं। दोनों पक्षों ने संयम से काम नहीं लिया। सर्वोच्च न्यायालय ने बाबा रामदेव समर्थकों पर लाठीचार्ज को गलत बताया।
न्यायालय ने कहा कि बाबा रामदेव ने लापरवाही बरती, लेकिन 5 जून 2011 को हुई पुलिस कार्रवाई की कोई जरूरत नहीं थी।
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में लाठीचार्ज में शामिल पुलिस वाले और पुलिस के ऊपर पत्थर फेंकने वाले लोगों पर आपराधिक मामले दर्ज करने का आदेश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने राजबाला के परिजनों को पांच लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश भी दिया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे उन्हें 50 हजार रुपए और जो हल्के जख्मी हुए थे उन्हें 25 हजार रुपए मुआवजा दिया जाए।
रामलीला मैदान का पुलिसिया लाठीचार्ज सुनियोजित था
सर्वोच्च न्यायालय ने मुआवजे की बात पर कहा कि मुआवजे की राशि रामदेव के ट्रस्ट और दिल्ली पुलिस संयुक्त रूप से देगी। रामदेव के ट्रस्ट को मुआवजे का 25 फीसदी और दिल्ली पुलिस को 75 फीसदी देना होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जब पुलिस ने अनशन पर बैठे लोगों को चले जाने को कहा तो रामदेव को चाहिए था कि वे ऐसे में जिम्मेदारी से काम करते। रामदेव को धरना रोक देना चाहिए था।
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