23 मई 2012
भारत ने किया दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा सौदा!
01 फरवरी 2012
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

hindi.in.com अब फेसबुक के ऐप्स पर भी देखें

नई दिल्ली।
भारत और दुनिया के सम्भवत: अब तक के सबसे बड़े रक्षा ठेके में फ्रांसीसी विमानन कम्पनी दसॉ ने चार साल से अधिक समय तक चली प्रतिस्पर्धा में जीत हासिल कर ली। दसॉ ने भारतीय वायुसेना को 52 हजार करोड़ रुपये (10.4 अरब डॉलर) में 126 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति करने का ठेका हासिल किया। इस ठेके के लिए बोली की अंतिम प्रक्रिया में दसॉ के मुकाबले यूरोपीय कम्पनी ईएडीएस कासेडियन यूरोफाइटर रह गई थी, लेकिन कम राशि की बोली के बल पर दसॉ के रफाल लड़ाकू विमान ने यूरोफाइटर के टाइफून को पछाड़ दिया।

रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने दसॉ द्वारा लगाई गई सबसे कम बोली का हवाला देते हुए आईएएनएस से कहा, "दसॉ को बता दिया गया है कि वह 126 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की आपूर्ति का ठेका जीत चुका है।"

अधिकारी ने हालांकि कहा कि इस सौदे पर अगले कारोबारी साल में ही हस्ताक्षर हो सकेगा।

वायुसेना का अरबों का सौदा ‘रफाल’ के हक में


वहीं, दसॉ ने पेरिस से भेजे गए अपने ई-मेल संदेश में कहा कि कम्पनी भारतीय वायुसेना (आईएएफ) की संचालन जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और आधी शताब्दी से अधिक समय तक भारत के रक्षा क्षेत्र में योगदान देने के लिए गौरवान्वित है।

फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि इस करार से भारत को महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण होगा। सरकोजी ने प्रतिबद्धता जताई कि उनकी सरकार करार पर अंतिम बातचीत के समय दसॉ का समर्थन करेगी।

सरकोजी ने कहा, "फ्रांस के अधिकारियों के पूरे समर्थन के साथ करार की वार्ता बहुत जल्द शुरू होगी। इसमें फ्रांस द्वारा महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण का भरोसा शामिल होगा।"

दो इंजनों वाले रफाल विमान में डेल्टा आकार के डैने हैं। इसका निर्माण वर्ष 2000 में हुआ था। इसके बाद से इसका उत्पादन फ्रांस की वायुसेना और नौसेना के लिए होता रहा है। कम्पनी हालांकि इस विमान का निर्यात करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अभी तक कोई विदेशी ठेका नहीं मिला।

ठेके के प्रावधान के मुताबिक इसे हासिल करने वाली कम्पनी को कुल राशि का आधा वापस भारतीय रक्षा उद्योग में निवेश करना है।

ठेके की शर्तों के मुताबिक 18 विमानों को तैयार अवस्था में उड़ाकर देश लाया जाएगा, जबकि 108 विमानों का निर्माण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते के तहत हिंदुस्तान एरॉनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा किया जाएगा।

पहले 18 विमानों की आपूर्ति 36 महीनों में की जाएगी। ठेके की शर्तों के तहत विमानों की संख्या को बढ़ाकर 200 तक किया जा सकता है और इसके लिए कीमत बढ़ाई नहीं जाएंगी।

अब अगले 10 से 15 दिनों में कम्पनी के साथ कीमत पर फैसला किया जाएगा।

जानकार सूत्रों के मुताबिक महंगाई के असर के कारण कीमत बढ़कर 15 अबर डॉलर तक पहुंच सकती है। इसमें प्रशिक्षण तथा रख-रखाव का खर्च भी शामिल है।

ठेके के लिए प्रतियोगिता कर रही चार अन्य कम्पनियों के विमानों में अमेरिकी कम्पनी लॉकहीड मार्टीन का एफ-16, बोइंग का एफ/ए-18, रूसी यूनाईटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन का मिग-35 और स्वीडन की कम्पनी साब का ग्रिपेन शामिल हैं।

इसके अलावा दसॉ ने वायुसेना के फ्रांस में निर्मित मिराज-2000 लड़ाकू विमान के बेड़े के आधुनिकीकरण का ठेका भी जीत लिया है। यह ठेका 1.4 अरब डॉलर का है।

यह खबर आपको कैसी लगी

10 में से 8 वोट मिले

पाठकों की राय

23 मई 2012

प्रमुख ख़बरें
आज के वीडियो
जरूर देखें: आज सुर्खियों में रहने वाली अहम खबरें
जरूर देखें: आज सुर्खियों में रहने वाली अहम खबरें
इटली में भूकम्प के झटके जारी, हजारों विस्थापित
इटली में भूकम्प के झटके जारी, हजारों विस्थापित
यूपीः कांस्टेबल ने लुटेरों को पकड़ा, तो थानेदार ने पीट दिया
यूपीः कांस्टेबल ने लुटेरों को पकड़ा, तो थानेदार ने पीट दिया

ख़बरें

© 2011, Web18 Software Services Ltd. All Rights Reserved.