19 फरवरी 2013
वार्ता
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इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने होर्मुज की खाड़ी से होकर जाने वाले जहाजों के रास्ते में पड़ने वाले ग्वादर बंदरगाह का प्रबंधन चीन को सौंप दिया है। जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान का यह कदम भारत के हित में नहीं है। भारत के रक्षा मंत्री एके एंटनी ने भी छह फरवरी को कहा था कि पड़ोसी देश के बंदरगाह पर चीन का नियंत्रण चिंताजनक है। बंदरगाह का काम पूरा होने के बाद चीन की नौसेना इसका इस्तेमाल कर सकेगी जो भारत की सामरिक सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। ये बंदरगाह है तो पाकिस्तान में, लेकिन ये एक प्रकार से भारत की जड़ में चीनी बेस की तरह से काम करेगा।
24 करोड़ 80 लाख डॉलर में बना बंदरगाह
सूत्रों ने बताया कि अरब सागर में स्थित ग्वादर बंदरगाह के विकास पर आने वाले 24 करोड़ 80 लाख डालर के खर्च का 80 फीसदी हिस्सा चीन देगा। इस क्षेत्र में पाकिस्तान से पश्चिमी चीन तक ऊर्जा एवं खाड़ी देशों से व्यापार के लिए कारिडोर खोलने की योजना है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इस सिलसिले में जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के बाद उम्मीद जताई कि यह स्थान जल्द ही क्षेत्र में व्यापार और वाणिज्य का गढ़ बनेगा। गौरतलब है कि चीन ने भारत के पड़ोसी देशों श्रीलंका के हंबनटोटा और बांग्लादेश के चटगांव में भी बंदरगाहों के निर्माण में वित्तीय मदद दी है।
भारत को चारों ओर से घेर रहा चीन
चीन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी के साथ अपनी धमक बढ़ा रहा है और इसके लिए वह एशियाई देशों को आधार बना रहा है। खासतौर पर उन देशों में वह भारी निवेश कर रहा है, जो भारत के पड़ोसी हैं। चीन न केवल पाकिस्तान बल्कि नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका बल्कि मालदीव और म्यांमार की सरकारों पर भी जबरर्दस्त नियंत्रण स्थापित कर चुका है। दूसरी ओर घरेलू मुद्दों में उलझे भारत के पास अपनी विदेश नीति पर ध्यान देने का समय नहीं है। रक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से भारत सरकार को चेता रहे हैं, लेकिन वह इस मोर्चे पर कोई ठोस नीति अपनाने विफल ही रही है।
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पाठकों की राय
22 मई 2013
Feb 19, 2013
Narendra modi hindu muslim ka divide kare ke poltics kar reha hai es matter per ka ninnd me so reha hai.
lovelife Delhi
Feb 19, 2013
आतंकियों और देशद्रोहियों से निपटने में पसीना छ्चोड़ने वाली सरकार चीन और पाकिस्तान की भारत को तोड़ने और कमजोर करने की चाल का काट खोज पाएगी ऐसा लगता तो कतई नहीं. देश को या तो भगवान बचा सकते हैं या जनता मे पैदा होने वाला देशप्रेम का ज्वार.
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