10 फरवरी 2012
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
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इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायालय की अवमानना मामले में पेशी से छूट के लिए दायर प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी की अर्जी खारिज कर दी। गिलानी के वकील ऐतजाज अहसान ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी की अध्यक्षता वाली आठ सदस्यीय पीठ ने अपील खारिज कर दी।
गिलानी अब 13 फरवरी को अदालत में पेश होंगे। उन पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दोबारा शुरू करने के आदेश का पालन नहीं करने का आरोप है।
समाचार एजेंसी 'सिन्हुआ' के अनुसार अहसान ने कहा, "हमारी अपील खारिज कर दी गई है।"
गिलानी पर चलेगा मुकदमा, 19 को होंगे पेश
यदि प्रधानमंत्री इस मामले में दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें छह माह की कैद हो सकती है और वे संसदीय सीट भी खो सकते हैं। उन्हें पांच वर्ष तक किसी सार्वजनिक पद पर होने से वंचित भी किया जा सकता है।
समाचारपत्र 'डॉन' के अनुसार, गिलानी ने यह कहते हुए भ्रष्टाचार के मामले में जरदारी के खिलाफ स्विट्जरलैंड को पत्र लिखने से इंकार कर दिया था कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति को आपराधिक मुकदमों से छूट प्राप्त है।
वर्ष 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के साथ हुए एक समझौते के तहत उनके पति जरदारी तथा उनकी स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय सुलह अध्यादेश के तहत आम माफी दे दी थी। लेकिन 2009 में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे निरस्त कर दिया था।
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इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायालय की अवमानना मामले में पेशी से छूट के लिए दायर प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी की अर्जी खारिज कर दी। गिलानी के वकील ऐतजाज अहसान ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी की अध्यक्षता वाली आठ सदस्यीय पीठ ने अपील खारिज कर दी।
गिलानी अब 13 फरवरी को अदालत में पेश होंगे। उन पर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दोबारा शुरू करने के आदेश का पालन नहीं करने का आरोप है।
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गिलानी पर चलेगा मुकदमा, 19 को होंगे पेश
यदि प्रधानमंत्री इस मामले में दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें छह माह की कैद हो सकती है और वे संसदीय सीट भी खो सकते हैं। उन्हें पांच वर्ष तक किसी सार्वजनिक पद पर होने से वंचित भी किया जा सकता है।
समाचारपत्र 'डॉन' के अनुसार, गिलानी ने यह कहते हुए भ्रष्टाचार के मामले में जरदारी के खिलाफ स्विट्जरलैंड को पत्र लिखने से इंकार कर दिया था कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति को आपराधिक मुकदमों से छूट प्राप्त है।
वर्ष 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के साथ हुए एक समझौते के तहत उनके पति जरदारी तथा उनकी स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय सुलह अध्यादेश के तहत आम माफी दे दी थी। लेकिन 2009 में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे निरस्त कर दिया था।
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