23 मई 2012
गिलानी पर न्यायालय की अवमानना के आरोप तय हुए

13 फरवरी 2012
सीएनएन-आईबीएन/इंडो-एशियन न्यूज सर्विस

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इस्लामाबाद।
पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी पर न्यायालय की अवमानना के मामले में आरोप तय किए। गिलानी पाकिस्तान के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिनपर ऐसे आरोप तय हुए हैं।

गिलानी ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दोबारा शुरू करने से इंकार कर दिया था।

न्यायालय में सर्वोच्च न्यायालय की सात सदस्यीय पीठ के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति नासिर-उल-मुल्क ने गिलानी की उपस्थिति में आरोप पत्र पढ़ा।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, न्यायमूर्ति नासिर-उल-मुल्क ने प्रधानमंत्री को खड़े होकर अपने खिलाफ आरोप सुनने के लिए कहा।

न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री से पूछा कि क्या उन्होंने आरोप पत्र पढ़ लिए हैं, गिलानी ने जवाब दिया "हां"।

न्यायाधीश ने पूछा, "क्या आपने आरोप पत्र की विषयवस्तु समझ ली है।" प्रधानमंत्री ने जवाब दिया, "जी हां, मैंने इसे समझ लिया है।"

खचाखच भरे न्यायालय कक्ष में आरोप पत्र पढ़े जाने से पहले सातों न्यायाधीशों ने उस पर हस्ताक्षर किए।

न्यायालय ने महान्यायवादी मौलवी अनवारुल हक से कहा कि वह अभियोजक के रूप में काम करें।

जियो न्यूज के अनुसार, गिलानी के वकील एतजाज अहसान ने जवाब दाखिल करने के लिए 24 फरवरी तक की मोहलत मांगी, क्योंकि वह इस दौरान देश से बाहर रहेंगे। उसके बाद मामले की सुनवाई 22 फरवरी तक स्थगित कर दी गई।

गिलानी द्वारा पेश किए जाने वाले सबूत 27 और 28 फरवरी को रिकॉर्ड किए जाएंगे। यदि इस मामले में गिलानी दोषी ठहराए गए, तो उन्हें छह महीने कारावास की सजा हो सकती है, और उन्हें पद छोड़ना पड़ सकता है।

इससे पहले -


पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ कार्रवाई न करने से सम्बंधित न्यायालय की अवमानना मामले में दोषी ठहराया है।

गिलानी के खिलाफ आरोपपत्र पढ़ा गया, तो गिलानी ने उन आरोपों को दुबारा खारिज कर दिया। आरोपपत्र में उन पर न्यायालय की अवमानना का आरोप तय किया गया है।

पाकिस्तान सर्वोच्च न्यायालय के सात न्यायाधीशों की एक खंडपीठ ने इस आरोपपत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस खंडपीठ के अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने कहा था कि यदि सर्वोच्च न्यायालय राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ कार्रवाई न करने से सम्बंधित न्यायालय की अवमानना मामले में उन्हें दोषी ठहराता है, तो वे पद से इस्तीफा दे देंगे। जियो न्यूज द्वारा रविवार को जारी रपट के अनुसार, एक अरबी समाचार चैनल से बातचीत में गिलानी ने यह भी कहा कि जरदारी के खिलाफ मामले राजनीति से प्रेरित हैं और राष्ट्रपति को देश में और देश के बाहर कानून छूट मिली हुई है।

गिलानी ने जरदारी द्वारा कथितरूप से जमा किए गए धन को बरामद करने के लिए स्विस प्रशासन को पत्र लिखने से यह कहते हुए इंकार कर दिया था कि जरदारी को संविधान के तहत छूट मिली हुई है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें पत्र लिखने का निर्देश दिया था।

ज्ञात हो कि भ्रष्टाचार के आरोपी जरदारी को तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ द्वारा 2007 में राष्ट्रीय सुलह अध्यादेश (एनआरओ) के तहत माफी दी गई थी, जिसके चलते जरदारी और उनकी पत्नी व पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की स्वदेश वापसी सुनिश्चित हो पाई थी

राजनेताओं और नौकरशाहों को भ्रष्टाचार के मामलों में छूट देने वाले इस एनआरओ को 2009 में असंवैधानिक करार कर दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि एनआरओ पर उसके फैसले को 10 जनवरी, 2012 तक अमल में नहीं लाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। न्यायालय ने सरकार को आदेश दिया कि वह भ्रष्टाचार के मामलों को फिर से खोलने के लिए स्विस प्रशासन को पत्र लिखे।

न्यायालय ने 16 जनवरी को गिलानी को न्यायालय की अवमानना का नोटिस जारी किया। गिलानी अब 13 फरवरी को सर्वोच्च न्यायालय में पेश होंगे और जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले फिर से न खोलने के लिए उन्हें औपचारिक रूप से आरोपित किया जाएगा।

यदि गिलानी को दोषी करार दिया गया तो उन्हें छह महीने के कारावास की सजा हो सकती है और उनकी संसदीय सदस्यता समाप्त हो सकती है। उन्हें कोई सार्वजनिक पद स्वीकार करने से भी पांच साल के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है।

इससे पहले, पाकिस्तान सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी ने कहा था कि पैगम्बर मुहम्मद ने कभी भी स्वयं को कानून से ऊपर घोषित नहीं किया और उनका व्यवहार केवल निजी आचरण नहीं, बल्कि उनके उपदेशों की विस्तृत व्याख्या है। समाचार चैनल 'जिओ न्यूज' के मुताबिक न्यायालय परिसर में शनिवार को सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने अपने विचार रखे।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि इस्लाम का उद्भव, मानवता के विकास में एक लम्बी छलांग, अज्ञानता को एक गहरा धक्का, ज्ञान का पुंज और आदर्शों का व्यावहारिक अनुभव है।

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