13 फरवरी 2012
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
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रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस प्रशसन एक घायल पुलिस अधिकारी की पत्नी के इस आरोप पर चुप्पी साधे हुए है कि उसके पति को एक दशक से अधिक समय से नक्सल प्रभावित इलाके में इसलिए पदस्थापित रख गया है, क्योंकि वह अपने वरिष्ठों को रिश्वत नहीं दे सकता। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) बी.एस. मारावी की पत्नी राधा मारावी ने शुक्रवार को उस अस्पताल के बाहर यह आरोप लगाया जहां उनके पति एक नक्सली हमले में घायल होने के बाद भर्ती हैं।
यह पुलिस अधिकारी छह पुलिस अधिकारियों के उस दस्ते में शामिल थे जिस पर गुरुवार को नक्सलियों ने हमला किया था। नवगठित सुकमा जिले के एक जंगली रास्ते में किए गए हमले में दो पुलिसकर्मियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी।
राधा मारावी ने आरोप लगाया है कि उनके पति नक्सलियों के गढ़ में लगातार 10 साल से इसलिए पदस्थापित हैं, क्योंकि वह अपने वरिष्ठों को रिश्वत देने में सक्षम नहीं हैं जो राज्य में नक्सल प्रभावित क्षेत्र से बाहर तैनाती के लिए जरूरी है।
यहां के पुलिस मुख्यालय के सूत्रों ने बताया कि राधा मारावी ने इस तथ्य का खुलासा किया है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनाती से बचने के लिए पुलिसकर्मियों द्वारा वरिष्ठों को रिश्वत दिए जाने की परिपाटी प्रचलित है।
एक पुलिस अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, "हो सकता है उनके (राधा) तथ्य में दम हो।"
अधिकारी ने कहा, "ऐसे दर्जनों मामले हैं जिनमें सहायक उपनिरीक्षक से लेकर एएसपी श्रेणी तक के पुलिस अधिकारी वर्षो से नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सेवा दे रहे हैं। हिंसाग्रस्त क्षेत्र से बाहर तैनाती के उनके आवेदनों को बिना किसी वैध कारण के निरस्त कर दिया जाता है।"
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रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस प्रशसन एक घायल पुलिस अधिकारी की पत्नी के इस आरोप पर चुप्पी साधे हुए है कि उसके पति को एक दशक से अधिक समय से नक्सल प्रभावित इलाके में इसलिए पदस्थापित रख गया है, क्योंकि वह अपने वरिष्ठों को रिश्वत नहीं दे सकता। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) बी.एस. मारावी की पत्नी राधा मारावी ने शुक्रवार को उस अस्पताल के बाहर यह आरोप लगाया जहां उनके पति एक नक्सली हमले में घायल होने के बाद भर्ती हैं।
यह पुलिस अधिकारी छह पुलिस अधिकारियों के उस दस्ते में शामिल थे जिस पर गुरुवार को नक्सलियों ने हमला किया था। नवगठित सुकमा जिले के एक जंगली रास्ते में किए गए हमले में दो पुलिसकर्मियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी।
राधा मारावी ने आरोप लगाया है कि उनके पति नक्सलियों के गढ़ में लगातार 10 साल से इसलिए पदस्थापित हैं, क्योंकि वह अपने वरिष्ठों को रिश्वत देने में सक्षम नहीं हैं जो राज्य में नक्सल प्रभावित क्षेत्र से बाहर तैनाती के लिए जरूरी है।
यहां के पुलिस मुख्यालय के सूत्रों ने बताया कि राधा मारावी ने इस तथ्य का खुलासा किया है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनाती से बचने के लिए पुलिसकर्मियों द्वारा वरिष्ठों को रिश्वत दिए जाने की परिपाटी प्रचलित है।
एक पुलिस अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, "हो सकता है उनके (राधा) तथ्य में दम हो।"
अधिकारी ने कहा, "ऐसे दर्जनों मामले हैं जिनमें सहायक उपनिरीक्षक से लेकर एएसपी श्रेणी तक के पुलिस अधिकारी वर्षो से नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सेवा दे रहे हैं। हिंसाग्रस्त क्षेत्र से बाहर तैनाती के उनके आवेदनों को बिना किसी वैध कारण के निरस्त कर दिया जाता है।"
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