23 मई 2012
एग्जिट पोल दिखाकर बुरे फंसे टीवी चैनल
09 फरवरी 2012
वार्ता

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इलाहाबाद।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले टीवी चैनलों द्वारा एग्जिट पोल एवं ओपिनियन दिखाये जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आज इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दो खबरिया चैनलों को नोटिस जारी किया।

नोटिस जारी करके उच्च न्यायालय ने टीवी चैनलों से कहा है कि वे 29 फरवरी तक अदालत को बतायें कि चुनाव आयोग की अधिसूचना 12 जनवरी का उल्लंघन करने के लिए क्यों न उनके खिलाफ कार्यवाही की जाये।

साथ ही उच्च न्यायालय ने सभी खबरिया चैनलों और प्रिंट मीडिया को भी निर्देश दिया है कि वे एग्जिट पोल एवं ओपनियन पोल पर प्रतिबंध लगाने संबंधी चुनाव आयोग की अधिसूचना का कड़ाई से पालन करें।

यह आदेश न्यायमूर्ति अमर सरन व न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के अधिवक्ता सैयद मोहम्मद फजल की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका पर अदालत 29 फरवरी को सुनवाई करेगी।

याचिका में कहा गया था कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 क के अर्न्तगत एग्जिट पोल एवं ओपिनियन पोल को टीवी चैनलों द्वारा दिखाये जाने पर प्रतिबंधित किया गया है।

याचिका में कहा गया कि इस कानून के अनुपालन में चुनाव आयोग ने भी बारह जनवरी को अधिसूचना जारी कर किसी भी प्रकार के एग्जिट पोल एवं ओपिनियन पोल के प्रसारण पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद कुछ टीवी चैनल एग्जिट पोल एवं ओपिनियन पोल का प्रसारण कर रहे हैं। याचिका में टीवी चैनलों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की गयी है तथा कहा गया है कि वोटरों को गुमराह करने के लिए इस प्रकार का प्रसारण किया जा रहा है।

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