13 फरवरी 2012
आईबीएन-7
जनक दवे
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अहमदाबाद। अहमदाबाद। गुजरात दंगा मामले में अहमदाबाद कोर्ट में एसआईटी की रिपोर्ट पर अगली सुनवाई 15 फरवरी को होगी। एसआईटी रिपोर्ट पीड़ितों को सौंपने संबंधी फैसले पर कोर्ट की सुनवाई टाल दी गई है।
गौरतलब है कि दंगा पीड़ितों की ओर से तीस्ता सीतलवाड़ और मुकुल सिन्हा ने रिपोर्ट की कॉपी कोर्ट से मांगी थी, जिस पर कोर्ट ने इसे पढ़ने का वक्त मांगा था। एसआईटी ने याचिकाकर्ताओं को रिपोर्ट की कॉपी दिए जाने का विरोध किया।
एसआईटी के वकील एस. सी. जामुवार ने बताया कि उन्होंने रिपोर्ट को पीड़ितों को दिए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि तमाम लोगों को यह रिपोर्ट न दी जाए सिर्फ जकिया जाफरी को ही दी जाए। इसके बाद यदि वे किसी को रिपोर्ट देना चाहती हैं तो दे सकती हैं।
पीड़ित पक्ष के वकील शमशाद पठान ने बताया कि चूंकि यह एक पब्लिक डॉक्यूमेंट है ऐसे में इसे पीड़ितों को दिया जाना चाहिए। सेक्शन 75 में पब्लिक डॉक्यूमेंट के मानक तय किए गए हैं, जिसके मुताबिक एसआईटी की रिपोर्ट भी एक पब्लिक डॉक्यूमेंट है।
मालूम हो कि एसआईटी ने 8 फरवरी को अहमदाबाद की मेट्रो कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। दंगा पीड़ितों की ओर से मुकुल सिन्हा और तीस्ता सीतलवाड़ ने इसकी कॉपी के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। कोर्ट ने अर्जी तो मंजूर कर ली, लेकिन कहा कि रिपोर्ट सील है और उसे पढ़ा नहीं गया है।
गौरतलब है कि साल 2002 में गोधरा कांड के बाद गुजरात में फैले दंगों में मोदी की भूमिका पर यह जांच हुई थी और एसआईटी ने इस पर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी। कोर्ट में कांग्रेस के पूर्व सांसद अहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी ने यह याचिका दायर की थी।
2002 में अहमदाबाद की गुलबर्ग सासाइटी में दंगों के दौरान अहसान जाफरी समेत 69 लोग मारे गए थे, जबकि गोधरा कांड के बाद फैले दंगों में गुजरात में करीब 1200 लोग मारे गए थे।
इससे पहले -
एसआईटी ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट की कॉपी सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और वकील मुकुल सिन्हा को दिए जाने पर ऐतराज जताया है और कहा है कि इनके अलावा अहसान जाफरी की विधवा जकिया जाफरी को भी यह रिपोर्ट नहीं दी जा सकती, क्योंकि ये तीनों ही शिकायतकर्ता नहीं हैं।
अब इस मामले पर सुनवाई बुधवार 15 फरवरी को होगी, जिस दिन न्यायालय फैसला करेगा कि क्लोजर रिपोर्ट की कॉपी इन तीनों को सौंपी जाए या नहीं।
इससे पहले –
गुजरात के गुलबर्ग सोसायटी दंगा मामले में यहां के मेट्रो कोर्ट में एसआईटी की रिपोर्ट पर सुनवाई जारी है।
गौरतलब है कि दंगा पीड़ितों की ओर से तीस्ता सीतलवाड़ और मुकुल सिन्हा ने रिपोर्ट की कॉपी कोर्ट से मांगी थी, जिस पर कोर्ट ने इसे पढ़ने का वक्त मांगा था। कोर्ट रिपोर्ट पढ़ने के बाद आज रिपोर्ट पर सुनवाई कर रहा है।
उधर, एसआईटी ने याचिकाकर्ताओं को रिपोर्ट की कॉपी दिए जाने का विरोध किया है। वहीं, तीस्ता के वकील एस.एम. वोहरा ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अंतिम फैसला करने से पहले इस मामले में याचिकाकर्ता को रिपोर्ट की कॉपी मुहैया कराना जरूरी है।
इससे पहले-
गुजरात दंगा मामले में आज अहमदाबाद की मेट्रो कोर्ट में एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट की कॉपी खुल सकती है। दरअसल दंगा पीड़ितों ने रिपोर्ट की कॉपी कोर्ट से मांगी थी, जिस पर कोर्ट ने इसे पढ़ने का वक्त मांगा था। इससे पहले गुजरात में राजनीति भी गर्मा गई है। आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नरेंद्र मोदी को रिपोर्ट में क्लीन चिट मिलेगी?
गुजरात दंगों की जांच कर रही एसआईटी ने 8 फरवरी को अहमदाबाद के मेट्रो कोर्ट के कोर्ट नंबर 11 में क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी। दंगा पीड़ितों ने इसकी कॉपी के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। कोर्ट ने अर्जी तो मंजूर कर ली, लेकिन कहा कि रिपोर्ट सील है और उसे पढ़ा नहीं गया है। रिपोर्ट को पढ़ने के बाद कोर्ट जरूरी फैसला लेगा। कोर्ट ने इस मामले में 13 फरवरी को सुनवाई की तारीख तय की थी। कोर्ट ने एसआईटी को भी अदालत में हाजिर रहने को कहा था।
गुलबर्ग सोसायटी: एसआईटी क्लोजर रिपोर्ट न्यायालय में पेश
कानून के जानकारों की मानें, तो आज हो सकता है कि कोर्ट पीड़ितों को क्लोजर रिपोर्ट की कॉपी दे और साथ में यह कहे कि आपको जिन मुद्दों पर आपत्ति है वे लिखित में दें। उसकी सुनवाई के बाद अदालत एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर मोदी और दूसरे पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आरोप दायर करने पर फैसला ले।
लेकिन दूसरी ओर इससे पहले कि जांच रिपोर्ट सामने आए इस पर सियासत तेज हो गई है।
अपने सद्भावना मिशन के आखिरी दिन मोदी ने एक बार फिर कहा कि उनके विरोधी इस मामले में उन पर एक बार फिर हमला करेंगे, लेकिन वे भी हार मानने वाले नहीं है। मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरे शब्द लिख लीजिए। चौबीस घंटे के भीतर दस सालों से मेरी बुराई कर रही जमात एक बार फिर बाजार में उतरेगी।
वहीं, उनके विरोधी केशूभाई पटेल भी इशारों-इशारों में मोदी पर बरसे। उन्होंने कहा कि पूरे गुजरात के लोग भयभीत हैं। साल 2002 में गोधरा के बाद गुजरात में फैले दंगों में मोदी की भूमिका पर यह जांच हुई है।
कोर्ट में कांग्रेस के पूर्व सांसद अहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी ने यह याचिका दायर की थी। 2002 में अहमदाबाद की गुलबर्ग सासाइटी में दंगों के दौरान अहसान जाफरी समेत 69 लोग मारे गए थे। जबकि गोधरा कांड के बाद फैले दंगों में गुजरात में करीब 1200 लोग मारे गए थे।
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23 मई 2012
Feb 13, 2012
कोंग्रसियौ को अपने चुनाव मेनीफेस्टो मे सबसे पहले यह लिखना चाहिए की हम २४ घंटे, ३६५ दिन मोदी साहेब के बुराई करेगे और देश के शांत माहो ल की एसी तैसी करेगे/ मेरा तो मुसलमान भाइयो से यही निवेदन हे की इन हरामियो (कॉंग्रेस) को पहचाने वरना अगले १०० साल आपकी यही हालत रहेगी, क्योकि मुस्लिम डाबला कुचला रहेगा तो कॉंग्रेस देस पर राज करेगी/ मोदी जी महान हे, मोदी जी को देश का प्रधानमंत्री बनाना चाहिए ताकि देस तरक्की कर सके/
sanjay singh bhopal
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