23 मई 2012
गूगल ने कहा, हमने आपत्तिजनक सामग्री हटा दी
08 फरवरी 2012
वार्ता

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नई दिल्ली।
इंटरनेट के प्रमुख सर्च इंजन गूगल ने आज कहा कि दिल्ली की एक अदालत के निर्देश के अनुसार उसने अपनी भारतीय प्रणाली से आपत्तिजनक सामग्री हटा दी है, जबकि गूगल के खिलाफ अदालत में गये याचिकाकर्ता ने इसे गलत करार दिया है।

गूगल इंडिया के प्रवक्ता गौरव भास्कर ने एक वक्तव्य में कहा कि सर्च इंजन की खोज प्रणाली, यू ट्यूब, ब्लॉगर और ऑर्कुट से आपत्तिजनक सामग्री हटायी गयी है। इस सामग्री को भारत में नहीं देखा जा सकेगा, जबकि यह अन्य देशों में उपलब्ध रहेगी। बयान में कहा गया है कि अन्य कंपनियों और व्यक्तियों द्वारा पोस्ट की गयी सामग्री के बारे में गूगल कोई जिम्मेदारी नहीं ले सकता।

गूगल ने अपने कदम को अदालत के फैसले का सम्मान करने की नीति के अनुरूप बताया।

वेबसाइटें पद्रंह दिनों में आपत्तिजनक सामग्री हटा दें: अदालत


दूसरी ओर गूगल, फेसबुक, याहू सहित 21 कंपनियों के खिलाफ दीवानी अदालत में मामला दायर करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मुफ्ती एजाज अरशद काजमी ने कहा कि गूगल बयानी कर रहा है तथा आपत्तिजनक सामग्री नहीं हटायी गयी है। उन्होंने कहा कि गूगल ने अदालत के निर्देश के अनुरूप अभी तक सामग्री हटाने वाली प्रणाली भी स्थगित नहीं की है।

काजमी ने कहा कि अदालत में अगली सुनवाई के दौरान वे इन कंपनियों के खिलाफ अदालत की अवमानना करने का मामला उठायेंगे।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली की एक अदालत ने कल गूगल, फेसबुक, याहू आदि 21 प्रमुख इंटरनेट साइटों और सर्च इंजन को निर्देश दिया था कि वे 15 दिन के अंदर अपनी प्रणाली से आपत्तिजनक सामग्री हटा दें।

गूगल अश्लील सामग्री से आंखें मूंद रहा है: याचिकाकर्ता



सामाजिक सम्पर्क बेवसाइट फेसबुक की ओर से अदालत के पहले के निर्देश पर आज अपनी अमल रिपोर्ट दाखिल की गयी थी। रोहिणी सिविल अदालत के न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने अदालत के निर्देश का सही उत्तर नहीं देने के लिए सर्च इंजन गूगल पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि वह उचित जवाब दाखिल क्यों नहीं कर रहे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता मुफ्ती एजाज अरशद काजमी ने अदालत में यह मामला दायर किया है।

“सोशल नेटवर्किंग साइटें बंद नहीं होंगी”



वेबसाइटों के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री को लेकर राजधानी के एक पत्रकार विनय राय ने एक आपराधिक मामला भी दायर किया है जिस पर पटियाला हाउस अदालत में सुनवाई चल रही है। इस कार्यवाही को रुकवाने के लिए वेबसाइटों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील की थी, लेकिन उसने कार्यवाही रोकने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था । उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने तल्ख टिप्पणी की थी कि यदि वेबसाइटें आपत्तिजनक सामग्री हटाने की प्रणाली विकसित नहीं करती हैं, तो उन्हें चीन की तरह प्रतिबंधित किया जा सकता है।

न्यायालय ने जिन वेबसाइट से आपत्तिजनक सामग्रियां हटाने के लिए कहा है उनमें फेसबुक इंडिया, फेसबुक, गूगल इंडिया, ऑर्कुट, यूट्यूब, क्लॉकस्पॉट, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, माइक्रोसॉफ्ट,  जोंबी टाईम, एक्सबोई, बोर्डरीडर, आईएमसी इंडिया, माई लाट, शायनी क्लॉक और टॉपिक्स शामिल हैं।

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