11 फरवरी 2012
वार्ता
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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के लिए करीब 50 हजार करोड़ की लागत से खरीदे जाने वाले लड़ाकू विमानों के सौदे में किसी तरह फिर से शामिल होने के लिए ब्रिटेन ने घोषणा की है कि यूरो फाइटर टाइफून विमान की नई कीमतों की पेशकश की जाएगी।
इस बीच, भारत ने फ्रांस के रफाल विमान ने इस सौदे के लिए चुने जाने से आहत हुई ब्रिटिशों की भावनाओं को सहलाने की पहल शुरू कर दी है और इसके तहत सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह 13 फरवरी से वहां के दौरे पर जा रहे हैं। भारत के विदेश विभाग ने एक स्वत:स्फूर्त बयान में कहा कि ब्रिटेन के साथ भारत के संबंध मधुर और सद्भावपूर्ण हैं।
भारत एफ-16, एफ-18 से अधिक मजबूत होता: अमेरिका
इस सौदे के लिए रक्षा मंत्रालय फ्रांस के रफाल विमान को सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के तौर पर चुन चुका है, जिससे यूरो फाइटर बनाने वाले चार देशों में तूफान मचा हुआ है। ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन और इटली की कंपनियां इस विमान का निर्माण करने वाली कंपनी में हिस्सेदार हैं।
ब्रिटेन के आंतरिक सुरक्षा और सामरिक मामलों के मंत्री जेराल्ड होवर्थ ने एक इंटरव्यू में कहा कि यूरो फाइटर की ओर से जर्मनी की कंपनी कैसेडियोन संशोधित कीमत देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर कम कीमत के कारण ही रफाल को चुना गया है तो भारत के लिए बेहतर वित्तीय प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है।
यह पूछने पर कि क्या ब्रिटेन ने संशोधित कीमत देने के लिए भारत से अनुमति मांगी है, होवर्थ कहा कि प्रधानमंत्री डेविड कैमरन कह चुके हैं कि वह भारत के सामने यूरो फाइटर का पक्ष रखने का सिलसिला जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि यह भारत के हित में है कि कीमत का पूरा हक वसूल करे।
वायुसेना के लिए 126 लड़ाकू विमानों की खरीदारी के सौदे के लिए रक्षा मंत्रालय ने 31 जनवरी को रफाल को चुने जाने की घोषणा की थी और इस सौदे में परास्त देशों में कोहराम मचा हुआ है। विश्व में इस सदी के सबसे बड़े सौदे से फ्रांसीसी दसॉ कंपनी की तकदीर चमक गई और फ्रांसीसी राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी की गिरती राजनीतिक लोकप्रियता का ग्राफ भी उठने लगा है।
भारत ने किया दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा सौदा!
इस बीच, ब्रिटिश मीडिया ने भारत के खिलाफ एक तरह से अभियान छेड़ा हुआ है और विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा हुआ है। इस सारी स्थिति के बीच कल भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान भी जारी किया और स्पष्ट किया कि ब्रिटेन के साथ हमारा आपसी सहयोग परस्पर लाभ के लिए रहा है और यह सिलसिला जारी रहेगा।
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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के लिए करीब 50 हजार करोड़ की लागत से खरीदे जाने वाले लड़ाकू विमानों के सौदे में किसी तरह फिर से शामिल होने के लिए ब्रिटेन ने घोषणा की है कि यूरो फाइटर टाइफून विमान की नई कीमतों की पेशकश की जाएगी।
इस बीच, भारत ने फ्रांस के रफाल विमान ने इस सौदे के लिए चुने जाने से आहत हुई ब्रिटिशों की भावनाओं को सहलाने की पहल शुरू कर दी है और इसके तहत सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह 13 फरवरी से वहां के दौरे पर जा रहे हैं। भारत के विदेश विभाग ने एक स्वत:स्फूर्त बयान में कहा कि ब्रिटेन के साथ भारत के संबंध मधुर और सद्भावपूर्ण हैं।
भारत एफ-16, एफ-18 से अधिक मजबूत होता: अमेरिका
इस सौदे के लिए रक्षा मंत्रालय फ्रांस के रफाल विमान को सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के तौर पर चुन चुका है, जिससे यूरो फाइटर बनाने वाले चार देशों में तूफान मचा हुआ है। ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन और इटली की कंपनियां इस विमान का निर्माण करने वाली कंपनी में हिस्सेदार हैं।
ब्रिटेन के आंतरिक सुरक्षा और सामरिक मामलों के मंत्री जेराल्ड होवर्थ ने एक इंटरव्यू में कहा कि यूरो फाइटर की ओर से जर्मनी की कंपनी कैसेडियोन संशोधित कीमत देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर कम कीमत के कारण ही रफाल को चुना गया है तो भारत के लिए बेहतर वित्तीय प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है।
यह पूछने पर कि क्या ब्रिटेन ने संशोधित कीमत देने के लिए भारत से अनुमति मांगी है, होवर्थ कहा कि प्रधानमंत्री डेविड कैमरन कह चुके हैं कि वह भारत के सामने यूरो फाइटर का पक्ष रखने का सिलसिला जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि यह भारत के हित में है कि कीमत का पूरा हक वसूल करे।
वायुसेना के लिए 126 लड़ाकू विमानों की खरीदारी के सौदे के लिए रक्षा मंत्रालय ने 31 जनवरी को रफाल को चुने जाने की घोषणा की थी और इस सौदे में परास्त देशों में कोहराम मचा हुआ है। विश्व में इस सदी के सबसे बड़े सौदे से फ्रांसीसी दसॉ कंपनी की तकदीर चमक गई और फ्रांसीसी राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी की गिरती राजनीतिक लोकप्रियता का ग्राफ भी उठने लगा है।
भारत ने किया दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा सौदा!
इस बीच, ब्रिटिश मीडिया ने भारत के खिलाफ एक तरह से अभियान छेड़ा हुआ है और विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा हुआ है। इस सारी स्थिति के बीच कल भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान भी जारी किया और स्पष्ट किया कि ब्रिटेन के साथ हमारा आपसी सहयोग परस्पर लाभ के लिए रहा है और यह सिलसिला जारी रहेगा।
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