05 जनवरी 2012
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
ढाका। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ‘फेसबुक’ पर कथित रूप से निधन की कामना करने वाले विश्वविद्यालय के एक अध्यापक को न्यायालय ने छह महीने की सजा सुनाई है। न्यायालय के नोटिस की अवहेलना करने पर अध्यापक को यह सजा सुनाई गई।
समाचार एजेंसी ‘सिन्हुआ’ के मुताबिक उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने बुधवार को गृह एवं विदेश मंत्रालयों को राहुल अमीन खांडकर को ऑस्ट्रेलिया से वापस लाने का आदेश दिया। राहुल इस समय अध्ययन के लिए छुट्टी पर है। न्यायालय ने उसे लौटते ही गिरफ्तार करने का आदेश दिया है।
ज्ञात हो कि राहुल ढाका के समीप जहांगीरनगर विश्वविद्यालय में अध्यापक है और वह आगे की पढ़ाई के लिए वर्ष 2009 में ऑस्ट्रेलिया चला गया।
न्यायालय ने उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए विश्वविद्यालय को भी आदेश दिया है। न्यायालय हालांकि, निधन के आरोप पर अपना फैसला सुनाने वाला है।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष 13 अगस्त को राहुल ने अपने फेसबुक पेज पर कथित रूप से कहा, "सब लोग मरते हैं, लेकिन हसीना क्यों नहीं?"
इसके पांच दिनों बाद उच्च न्यायालय ने राहुल को अपना पक्ष दो सप्ताह में रखने के लिए एक नोटिस जारी किया। नोटिस में न्यायालय ने राहुल से पूछा कि अपमानजनक टिप्पणी के लिए उस पर मुकदमा क्यों न चलाया जाए।
राहुल की तरफ से कोई जवाब न मिलने पर न्यायालय ने 12 दिसम्बर को उसे दोबारा नोटिस जारी किया। नोटिस में राहुल को दो जनवरी को न्यायालय के समक्ष हाजिर होने के लिए कहा गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
ढाका। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट ‘फेसबुक’ पर कथित रूप से निधन की कामना करने वाले विश्वविद्यालय के एक अध्यापक को न्यायालय ने छह महीने की सजा सुनाई है। न्यायालय के नोटिस की अवहेलना करने पर अध्यापक को यह सजा सुनाई गई।
समाचार एजेंसी ‘सिन्हुआ’ के मुताबिक उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने बुधवार को गृह एवं विदेश मंत्रालयों को राहुल अमीन खांडकर को ऑस्ट्रेलिया से वापस लाने का आदेश दिया। राहुल इस समय अध्ययन के लिए छुट्टी पर है। न्यायालय ने उसे लौटते ही गिरफ्तार करने का आदेश दिया है।
ज्ञात हो कि राहुल ढाका के समीप जहांगीरनगर विश्वविद्यालय में अध्यापक है और वह आगे की पढ़ाई के लिए वर्ष 2009 में ऑस्ट्रेलिया चला गया।
न्यायालय ने उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए विश्वविद्यालय को भी आदेश दिया है। न्यायालय हालांकि, निधन के आरोप पर अपना फैसला सुनाने वाला है।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष 13 अगस्त को राहुल ने अपने फेसबुक पेज पर कथित रूप से कहा, "सब लोग मरते हैं, लेकिन हसीना क्यों नहीं?"
इसके पांच दिनों बाद उच्च न्यायालय ने राहुल को अपना पक्ष दो सप्ताह में रखने के लिए एक नोटिस जारी किया। नोटिस में न्यायालय ने राहुल से पूछा कि अपमानजनक टिप्पणी के लिए उस पर मुकदमा क्यों न चलाया जाए।
राहुल की तरफ से कोई जवाब न मिलने पर न्यायालय ने 12 दिसम्बर को उसे दोबारा नोटिस जारी किया। नोटिस में राहुल को दो जनवरी को न्यायालय के समक्ष हाजिर होने के लिए कहा गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ।
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