07 अगस्त 2012
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मुम्बई। किसी को अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अगर राजनीति का सहारा मिल जाए तो एकबारगी लगता है कि हम सफलता के घोड़े पर सवार हो गए हैं। लेकिन जब राजनेताओं की गंदी राजनीति अपनी चाल चल देती है तो वे महत्वकांक्षाएं गले का फंदा बन जाती हैं।
चढ़ते सूरज को सलाम और सफलता के दौर में आंख अंधी जैसी बात मानें तो अपनी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने के और अपना करियर बनाने के चक्कर में कई नवयुवतियां अपने जीवन और इज्जत की बाजी लगा देती हैं।
राजनीतिक वरदहस्त एक वक्त तक तो सहारा लगता है लेकिन एक वक्त के बाद उसकी दिशा बदलने में देर नहीं लगती।
फिजा और गीतिका के मामले तो अब सामने आए हैं लेकिन भारतीय राजनीति में ऐसे कई उदाहरण हैं जब राजनेताओं से करीबी महिलाओं के लिए मौत का कारण बन गई। मधुमिता शुक्ला, शशि, कविता चौधरी, शहला मसूद, शिवानी भटनागर, भंवरी देवी, आदि।
लेकिन सवाल उठता है कि क्या जब इन युवतियों के रिश्ते उन राजनेताओं के साथ परवान चढ़ रहे थे तब उनके परिवार वाले आंखें मूंदे बैठे थे?
सवाल यह उठता है कि करियर की आस में और प्यार के नाम पर जब जवान लड़कियां किसी राजनेता के करीब जाती हैं तो उसका समाज और उसका परिवार उस किस हद तक आगाह करता है?
आगाह करता भी है या अपनी जवान बेटियों की ऐशो-आराम की जिंदगी की चमक में आंखें बंद कर लेता है?
आपसे सवाल है कि राजनेताओं के चक्कर में आकर जान गंवानेवाली नौयुवतियों के माता-पिता और परिवार इस तरह की घटनाओं के लिए कितना जिम्मेदार है? फौरन लिखिए ....
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पाठकों की राय
22 मई 2013
Dec 25, 2012
Sabse pahle humein apne aapko aur apne pariwar ko sanskar dene chahiye ladka-ladki ko eksamaan shiksha dein. Bachchhon ko paalne ka matlab ye nahi ke unko kewal aishoaaraam do. But sanskaar dena sbse jaruri hain quki ye sanskar hi aage chalkar ek achchhe samaaj ka nirmaan karegein aur tabhi maanav jeevan saarthak hoga. Varna bachchhe to jaanwaron ko bhi hote hain.
Anirudh pandit dehradun
Aug 14, 2012
. . . . . . . . . . . . . . . . . . .
sanjay jamshedpur
Aug 14, 2012
मेरी सभी लड़कियों से गुज़ारिश है की इन कॉमेंट्स को ज़रूर पढ़ें ताकि आप लड़कियों को दुनियादारी की समझ हो जाए.
Rahul Sharma New Delhi
Aug 11, 2012
नोटो की चका चोंध ओर फैशन की दुनिया मे लोग ख़ासकर लड़कियाँ भूल जातीं है कि दिन के बाद रात भी आती है ओर अंधेरा भयानक भी हो सकता है| इस तरह की लकड़ियाँ पहले तो एस आराम पाने के चक्कर मे अपना सबकुछ दाँव पर लगा देती है जब एस आराम मिल जाता है तो शरीफ बनने की कोशिश करने लगती है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है | उन्हे घर परिवार से यह शिक्षा नही मिल पाती की यह दल दल कितना भयानक होता है इसमे एकबार घुस जाने के बाद वापिस लौटना बहुत मुस्किल है |बड़े अफ़सोस की बात तो यह है कि इनका परिवार भी उनके इस गुनाह मे बराबर का हिस्सेदार होता है| वह अपनी खुहाइसो को पूरा करने के चककरमे बेटियों को गुनाहों के दल दल मे जाने से नही रोकते है ओर उनके अनैतिक कामों को नज़र अंदाज करते रहते है बाद मे यही अंजाम होता है
MOHAMMAD HASEEN CHHATARPUR
Aug 10, 2012
Aaj ke din har ek insan me rawan baitha hai chae wo ladki ho ya ladka ,har koi apni icha se jina chahta hai , par ye nahi pata anjam kya hoga , or aaj ke is carrier ke hod me guardian ka koi roll nahi hai , wo sirf janm dete hai , dudh ka karz to sevant ko jata hai, to guardian ko kya kahna , , haan sabse badi cheez hai paisa then wo to guardian hi dete hai isliye unki jarurat padti hi hai , ye time hai gandhi ji ke updesh pe chlne ka other wise go to hell. Tin bandar ke jaisa.
amarjeet kumar noida
Aug 09, 2012
सभी ने अच्छे कोमेमेंट्स दिए हैं...
sulaiman south korea
Aug 09, 2012
राय क्या लिखे भाई सबका मामला ऐसा ही है आज चरित्रवान् लोगों की कमी हो गयी हैये तो फ़िज़ा और गीतिका ने सुसाइड कर लिया तो सबको पता चला वरना इस देश के बहुत से ओफ्फिकों में जाने कितनी फ़िज़ा और गीतिका हैसबको जल्दी पैसा चमने का चस्का लगा है तो उसके साथ के दुश परीणाम भी तो भुगतने होने आज गीतिका का भाई कांदा हो अनपड़ गावर बोल रा है लकिन जब बहन की दिन दोगुनी तरक्की हो रही थी तो वो मज़े ले रहा था बहन की कमाई को उड़ाने मे ! ये जल्दी तररक्की करने का नशा लड़कीों को ही नही सबको हो रहा है चाहे नेता हो या अभिनेता क्लर्क हो या अफ्फ्सर छ्होटा हो या बड़ा सब के सब जल्दी तररक्की करने की फिराक़ मैं है अब कलयुग मैं ये सब होना तो लाजमी है कांदा जैसे दुष्ट लोग हर जगह है और बनते रहेगे जब तक हम अपनी इच्छाओं को सीमित ना रखेगे . मतलब जो इच्छा है उसे सही रास्ते से पूरा करना नही सीखेंगे
manoj singh yadav bangalore
Aug 08, 2012
Is duniya main kuch bhi free nahi milta ye baat jis din ladkiyan samjh jayegi sab sahi ho jayega.Sabse jada doshi parents hain is haalat ke liye kabhi poocha hai ki itna paisa kaha se aa raha hai ,kya karti ho,kis office main jaati ho.Kabhi nahi poocha kyuki maje chal rahe hain koi matlab hi nahi .Than karo ma dosh dene se kya faiyda hai.D
singh mumbai
Aug 08, 2012
Mai-baat ko paise se matlab hai. Beti paisa la rahi hai. Kabhi in beteio ke agar kisi gareeb se talluqat hai toa yeh log bawal matcha dete hai. But nate paise wale hote hai aur mai-baat ko beti se nahi paise se matlab rahta hai. Yaqeen manai yeh sirf paise ka khel hai. Paise mai bhot taqat hoti hai.
raza husain lucknow
Aug 08, 2012
Both parents child are responsible for all these things happened. As a responsible parents they should taking information from thier daughter. As a daughter responsible she should give information without bias. This is possible only parents treating their daughters as a friend and also children consider their parents as friends not like pocking their noses into their business.
Pratima Srivastava New Delhi
Aug 08, 2012
अगर सीता बनाना है तो राम को डूरो रवाँ को नही जब सिर्फ़ जवान लड़की जो ज़्यादा पड़ी नही है अँग्रेज़ी बोलने से एजुकेटेड नही होती ... जब मान बाप को भाई को लखो देती थी तब नही पूंचा की बेटी इतने पैसा कहा से लाती हो तब बेटी कमाई से एस करते रहे अब मंत्री की याद आ रही है कांदा की कोई ग़लती नही है कांदा एक इंसान है ज़रूरतो को पैसा देता है लेकिन लेने आने को अपनी नियत साफ होनी चाहिए अगर हैसियत से ज़्यादा लोगे तो भुगतना आपको पड़ेगा
rampal singh verma new delhi
Aug 08, 2012
मेरा एसा मानना हे की लड़किया more ambitious होती हे इसका फ़ायडा कुछ लोग उठा लेते हे जिनमे ख़ासकर ये हरामी नेता होते हे / किंतु मेरा मानना हे की ये दुनिया पुरुष प्रधान हे यह कितनी ही आधुनिक हो जाए ये पुरुष औरत को कभी भी अपने से उपर नही देखना चाहते हे / महिलाओ की भी इस बात का ख्याल रखना चाहिए, किंतु वे तो जैसे ही घर के बाहर कदम रखती हे खास कर जब नोकरी करने लगती तब तो वह अपने आप को सबसे ज़्यादा समज़दार समजने लगती हो एस मे वह न तो अपने मा / बाप का मान करती हे नही वह अपने छोटे व बड़े लोगो का मान रखती हे यदि उन लोगो ने कुछ कह दिया तो वह आत्महत्या की धमकी देते लगती हे / इसलिए मा / बाप का इसमे कोई दोष नही / आप जब छोटे छोटे कपड़े पहन कर या शरीर की नुमाइश करके कब तक अपने आप को बचा सकती हे / इसलिए भाई मेरा तो एसा मानना हे की लड़किया / महिला ही चाहे तो ये सारे घटना कर्मा रोक सकती वरना भविष्या मे बहुत सी फ़िज़ा / गीतिका ऑडी जैसे कांड होते रहेगे/
Sanjay Singh kanpur
Aug 08, 2012
किसी के जीवन मे दखल अंदाजी ठीक नही / जो हो रहा है होने दो / यदि इस युग मे जीना है तो आँखे बंद मत करो खुला रखो और देखो , कान से सूनो और अपने जुवान बंद रखो तभी जी पाओगे / यह दुनिया का तक़ाज़ा है,जिंदगी कब कौन सी कारबट लेगा पता नही/ जब परिवार वालों को पता था और पारिवारिक रिस्ताबना हुआ था फोटो भी गवाह है, तब कोई बात ज़रूर होगी जिसने आत्म हत्या के मजबूर किया होगा / जिसके हाथ से सत्ता है उसका क्या बिगाड़ लेगें / किसी कबि ने कहा है सामरथ के नही दोष गुसाई / यानी सामर्थवान का कोई दोष नही होता है / ज़्यादा उपर जाने के लिए अपनी ज़मीन तलासो को कोई तकलीफ़ नही और यदि किसी की पुंछ पकड़ कर आगे जाना है तो इस तरह की परिस्थीटिओन का सामना करना ही पड़ता है
AKBhadani Panchkula
Aug 08, 2012
एक हवा चल पड़ी है अपने को समाज से . उपर उठ कर दिखाने की . आज कल भाग दौर की जिंदगी मे महिलाएँ भी पड़ी लिखी है है और नौकरी की तलाश मे जब भाग दौर शुरू होती है तो पैरबी का भी चक्कर शुरू होता है की उसकी नेता से पहचान है नौकरी जल्द लग जाईगी . उसी चक्कर मे परिवार मेल जोल शुरू होता है और कमसिन लड़कियाँ नेताओं के चंगुल मे आ जाती है और जब वे अपना संबंध बनाना चालू करते है और जब पैसा भी खूब आने लगता है तब परिवार वाले यह कहते नही थकते देखो कितना अक्चा कर रही है लेकिन जान एक से दिल भर जाता है और नेतागण दूसरी को तलाशने लगते है तब इसकी नींद खुलती है और बीरोध करने आपेर नतीजा आपके सामने आ जाता है .यह परिवार के कारण ही होता है/ इस्केलिए पहला दोषी परिवार है है जिसने बcचो पर नज़र नही रखा / आज के युग मे पैसा है सबकुछ है जो नेताओं के पास है / हर कॉर्पोटते ऑफीस मे अब यह आम बात हो गयी है /
AKBhadani Panchkula
Aug 07, 2012
जब फ़िज़ा जानती थी की चंदर मोहन पहले से ही शादी सुदा हे तो उसने उसके साथ संबंध क्यों बनाए. फ़िज़ा ने एक औरत से उसका पति शीना था. उसे चंदर मोहन की पहली बीवे के बारे मे भी सोचना चहीए था.
Baldev kamboj in,0,0+Sirsa (haryana)
Aug 07, 2012
The rules framed in the constitution of india for human serurities, development for men & women and also for children for our country are very week. Our country is growing only in the field of corruption and exploitation by the leaders and by the top of the officers. Punishments are made only for poorers to poorers and helpless, not for riches persons and not for higher officers.It means that there is no humanity in our socieies.Therefore, hard rules should be framed in the constitution of india for safe and development for womens and children ..
Arvind Kumar Ranchi
Aug 07, 2012
100/% मा बाप ही ज़िम्मेदार होते हे#######
rahul guwahati
Aug 07, 2012
मे यह मानता हू की घोड़े पर सवार होकर सवारी करना अच्छी बात हे लेकिन उस घोड़े की लगाम खुद लड़की के हाथ मे होनी चाहिए ताकि किसी अनहोनी की आहट से वह समय रहते सावधान हो जाए ओ वो खड्डे मे न गिरे जैसा की भूतकाल मे देखा गया हे. बेहतर होगा अपने अरमानो को सीमित मात्रा मे रखा जाए. किसी 23 साल के लड़के को देखे जो की अच्छे भविश्य के लिए dtc की बसो मे जिंदगी लगा देता हे जबकि एसी कन्याए जिसे भगवान ने थोड़ा सा साफ सुथरा शरीर ओर मीडियम घर मे पैदा किया हो वो mercedes/bmw/audi मे घूमने का ख्याब देखती हे तो निचय ही एसी घटनाए समाज मे होती ही रहेगि. इसके लिए कोई भी राजनेता या व्यक्ति ज़िम्मेदार नही हे.
Ashok Kumar Jain Gandhidham ( Kutch)
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