04 अगस्त 2012
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मुम्बई। आज 4 अगस्त को बॉलीवुड के महान गायक आभास कुमार गांगुली उर्फ किशोर कुमार उर्फ किशोर दा का जन्मदिन है। किशोर दा के बारे में कई तरह की बातें सुनी जाती रही हैं। बताया जाता है कि किशोर दा अपने आप में एक अनबुझ पहेली-से थे।
- किशोर कुमार का असली नाम दरअसल आभास कुमार गांगुली था। लेकिन जब किशोर कुमार बॉलीवुड में आए तो उन्हें एक फिल्मी नाम देने की बात की गई। और आभास कुमार गांगुली का नाम बदलकर ‘किशोर कुमार’ हो गया।
- किशोर कुमार बंगाली थे, और उस वक्त ऋषिकेश मुखर्जी, बासु भट्टाचार्य जैसे कई बंगाली नाम बॉलीवुड में ऋषि दा, बासु दा के रूप में चर्चित थे और ऐसे में किशोर कुमार जल्दी ही लोगों के लिए ‘किशोर दा’ हो गए।
- किशोर कुमार भले ही बंगाली थे, लेकिन मध्य प्रदेश के खंडवा में पले-बढ़े थे। और खंडवा को लेकर किशोर कुमार का प्यार मरते दम तक रहा। बताया जाता है कि वो अपने हर कंसर्ट की शुरुआत के समय कहते थे – भाइयो- बहनो सबको खंडवा वाले किशोर कुमार का नमस्कार! अपनी जमीन को लेकर इतना प्यार और किसी बॉलीवुड सितारे में देखने को नहीं मिला। कहते हैं एक बार मुंबई के पांच सितारा होटल ओबेरॉय शेरटन में एक शानदार पार्टी दी गई। मेजबान मिस्टर ओबेरॉय ने उस रूफ-टॉप पार्टी में जब किशोर दा से पूछा- दादा, मजा आया ना? तो वाकपटु किशोर दा ने तुंरत जवाब दिया- मजा तो आया, पर उतना नहीं जितना हमारे खंडवा में मालीकुंआ चौक पर दोने में जलेबी खाने में आता था।
- बताया जाता है कि किशोर दा पैसे को लेकर बड़े अजीब किस्म के हो जाते थे। पैसों को लेकर उनके किस्से पूरे बॉलीवुड में आज तक सुनाए जाते हैं। लोग कहते है कि किशोर दा ही थे जिन्होंने गायकों, गीतकारों से काम लेने के बाद टालमटोल करने वाले प्रोड्यूसर्स की अकल ठिकाने लगाई थी।
- बताया जाता है कि एक फिल्म के गाने की रिकार्डिंग थी। किशोर दा स्टूडियो पहुंचे और गाना शुरू किया। लेकिन ये क्या! किशोर दा का ना सुर मिल रहा था, ना ताल। प्रोड्यूसर परेशान। डॉयरेक्टर परेशान। म्यूजिक डॉयरेक्टर परेशान। करें तो क्या करें। तभी वहां बैठे एक बूढ़े साजिंदे ने प्रोड्यूसर से पूछा- क्या आपको किशोर दा को कुछ रुपये देने बाकी हैं? जो आपने अभी तक नहीं दिए? क्या कुछ बकाया है? प्रोड्यूसर बोला- हां, कुछ हजार हैं, मैं दे दूंगा। साजिंदे ने सलाह दी- साहब, इसी वक्त दे दो, वरना किशोर दा का गला और आपकी रिकार्डिंग दोनों ही खराब हो जाएंगे। घबराए प्रोड्यूसर ने तुरंत किशोर कुमार के सेक्रेटरी को बकाया चुकता किया। सेक्रेटरी ने किशोर दा के कान में कहा और फिर किशोर दा ने जो गाना गाया कि सभी को मजा आ गया।
- ये भी बताया जाता है कि किशोर दा ने अपने एक फ्लैट के बाहर बोर्ड लगा रखा था- बी अवेअर ऑफ किशोर। मतलब किशोर से बचकर रहना।
- किशोर दा को एक प्रोड्यूसर ने अदालत में खींचा। आरोप था किशोर दा डॉयरेक्टर की नहीं सुनते। अदालत ने किशोर दा को आदेश दिया। फिर क्या किशोर दा ने हर काम के लिए डॉयरेक्टर के आदेश की राह देखनी शुरू कर दी। कार में बैठे हैं तो बैठे ही हैं। हर काम में डॉयरेक्टर का आदेश चाहिए अब तो। कुर्सी से उठना है तो परमिशन दो। छींकना है तो परमिशन दो। ये करना है तो परमिशन दो, वो करना है तो परमिशन दो। आखिर परेशान होकर प्रोड्यूसर-डॉयरेक्टर ने किशोर दा से माफी मांगी।
- किशोर दा के बारे में कहा जाता था कि वो किसी से मिलना-जुलना पंसद नहीं करते थे। दरअसल किशोर दा कॉलेज के जमाने बहुत मस्त और दोस्ताना किस्म के व्यक्ति थे। इंदौर के क्रिस्चियन कॉलेज में, जहां किशोर दा पढ़ा करते थे, पिछली बैंच पर बैठकर खूब गाने गाया करते थे। किशोर दा इतना बढ़िया गाते थे कि होस्टल में उनके कमरों में हमेशा महफिलें जमतीं और किशोर दा की गायकी का सब आनंद लेते। यहां तक की प्रोफेसर भी किशोर दा को माफ कर देते थे। आज भी इंदौर का क्रिश्चियन कॉलेज अपने प्रोस्पेक्टस में ये बात लिखता है कि महान बॉलीवुड हस्ती किशोर कुमार हमारे स्टूडेंट रहे हैं।
- किशोर दा जब बॉलीवुड में आए तब तक उनके बड़े भाई अशोक कुमार बॉलीवुड स्टार हो चुके थे। बताया जाता है कि महान संगीतकार एस. डी. बर्मन एक बार अशोक कुमार से मिलने आए। वहां उन्होंने किशोर कुमार को बिंदास आवाज में के. एल. सहगल की नकल में गाते सुना तो किशोर दा पर फिदा हो गए। और घर में ‘बिंदास गला फाड़ने वाले’ आभास कुमार गांगुली आगे चलकर किशोर दा हो गए।
- बताया ये भी जाता है कि किशोर दा के बड़े भाई अशोक कुमार उन्हें अपनी ही तरह अभिनेता बनाना चाहते थे। लेकिन किशोर दा का मन तो संगीत में लगा था। पर बड़े भाई की बात भी माननी थी, सो किशोर दा ने अपना तरीका निकाला। फिल्म सेट पर देर से आना, कभी स्टूडियो के दरवाजे से भाग खड़ा होना जैसे वाकये आम हो गए और आखिरकार किशोर दा को ज़बरदस्ती अभिनेता बनाने की जोर-ज़बरदस्ती खत्म हो गई।
- एक बार एक प्रोड्यूसर ने किशोर दा को पैसे नहीं दिए। बस किशोर दा एक सुबह उसके बंगले के बाहर पहुंचे और फिल्म ‘चलती का नाम गाडी़’ के सुपरहिट गाने ‘दे दो मेरा पांच हजार...’ गाना शुरू कर दिया। ये सिलसिला हर सुबह होता। किशोर दा रोज उसके बंगले के बाहर पहुंचते और उसी तर्ज में गाना शुरू कर देते। ये तब तक चला जब तक वो कंजूस प्रोड्यूसर ने किशोर दा का बकाया चुकता नहीं किया।
- एक बार एक और प्रोड्यूसर किशोर दा के बकाया नहीं दे रहा था। किशोर दा भी कम नहीं थे। जब किशोर दा अपनी वाली स्टाईल पर आए, तो प्रोड्यूसर की सारी होशियारी हवा हो गई। और वो किशोर दा के घर बकाया देने आया। किशोर दा ने बकाया पैसे लिए, गिने और रखे। जब उस प्रोड्यूसर ने किशोर दा के साइन मांगे, तो किशोर दा ने उसके हाथ में काट लिया और कहा- ये रहा मेरा साइन। हा हा हा।
- एक बार एक सीन में किशोर दा को कार चलाते हुए जाना था। किशोर दा उस डॉयरेक्टर से नाराज चल रहे थे। बताया ये जाता है कि किशोर दा को उनका बकाया पैसा बार-बार ताकीद के बाद भी नहीं दिया जा रहा था। हर बार वही टालमटोल। दादा, कल आपका बकाया क्लियर करते है ना। बस, जैसे ही सीन शुरू हुआ किशोर दा ने गाड़ी चलाई और चलाते गए। डॉयरेक्टर शायद कट बोलना भूल गया, तो किशोर दा भी कार चलाते हुए मुंबई के बाहर तक चले गए।
- किशोर दा के बारे में एक रिपोर्टर ने लिखा कि किशोर दा अकेले रहना पसंद करते हैं। उनका कोई दोस्त नहीं है, वगैराह वगैराह। किशोर दा ने उस रिपोर्टर से निपटने की ठानी। उसे अपने घर बुलाया। कहा अपने अजीज दोस्तों से मिलाता हूं। उसके किशोर दा के घर पहुंचने पर किशोर दा उसे अपने गार्डन में ले गए और वहां पेड़ों से मिलाया। हर एक पेड़ का नाम था। कहा- कौन साला कहता है कि मेरे दोस्त नहीं हैं। ये मेरे दोस्त हैं। इसका नाम है ...., दूसरे का नाम है ......, तीसरे का....। इतना ही नहीं किशोर दा अब उस रिपोर्टर के पीछे पड़ गए कि तुमने ही लिखा था ना कि मेरे दोस्त नहीं है, मैंने तुम्हें अपने दोस्तों से मिला दिया। अब इनका इंटरव्यूह छापो। सोच सकते है उस रिपोर्टर की क्या हालत हुई होगी?
- किशोर कुमार और इनकम टैक्स वालों को लेकर बॉलीवुड में कई किस्से मशहूर हैं। एक बार किशोर कुमार के घर इनकम टैक्स का छापा पड़ा। आयकर अधिकारियों ने पूरा घर छान मारा। अचानक किशोर कुमार उठे, और बाथरूम में घुस गए। निकले ही नहीं। आयकर अधिकारियों को शक हुआ, कहीं किशोर दा ने बाथरूम में तो किशोर दा ने पैसा छुपा नहीं रखा है। सो किशोर दा को बड़ी मुश्किल से निकाला गया और ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठा दिया गया। अब आयकर अधिकारी किशोर दा के बाथरूम को खोदने में। घंटों की मेहनत के बाद भी इनकम टैक्स अधिकारियों को कुछ नहीं मिला और किशोर दा सोफे पर बैठे हंसते रहे।
-किशोर दा के सोफे को लेकर भी एक किस्सा मशहूर है। इनकम टैक्स छापे के दौरान पूरे समय किशोर दा जब सोफे से हिले नहीं तो इनकम टैक्स अधिकारियों को शक हुआ। उन्होंने किशोर दा को सोफे से उठने के लिए कहा। लेकिन किशोर दा फिर अपनी स्टाईल पर आ गए। सोफे को पकड़ कर बैठ गए। अब तो इनकम टैक्स अधिकारियों का शक और पक्का हो गया। कई अधिकारियों को किशोर दा को उस सोफे से उठाने में पसीना बहाना पड़ा। आधे-एक घंटे की हाड़तोड़ मेहनत के बाद थके-हारे इनकम टैक्स अधिकारियों ने जब उस सोफे को चीरा-फाड़ा, तो उसमें से कुछ नहीं निकला। और किशोर दा इनकम टैक्स अधिकारियों पर हंसते रहे।
-एक बार तो गजब ही हो गया। हैरान-परेशान इनकम टैक्स अधिकारी जब पूरा दिन किशोर दा के बंगले पर खराब कर जाने लगे। तो जाते-जाते किशोर दा ने उन्हें रोका। और कहा कि मैं आपको बताता हूं कि जो पैसा आप खोज रहे हैं वो कहां है? थके-हारे, किशोर दा की ट्रिक्स से हैरान परेशान इनकम टैक्स अधिकारियों ने जब पूछा, तो किशोर दा उन सबको अपने गार्डन में ले गए। नारियल के एक ऊंचे पेड़ की ओर इशारा किया। बोले- वो जो टॉप पर एक घोंसला-सा देख रहे हो ना, उसमें ही पैसों की पोटली रखी है। ऊपर चढ़ जाओ, और पैसे निकाल लो। इनकम टैक्स अधिकारी किशोर दा की ट्रिक्स से पहले ही घंटों परेशान हो गए थे, तो किशोर दा के हाथ जोड़ वहां से चले गए। बताते हैं कि वाकई में किशोर दा ने वो पैसा वहीं छुपा रखा था। हा हा हा!!!!
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