07 अगस्त 2012
hindi.in.com
संजीत कुमार
मुंबई। ‘कौन बनेगा करोड़पति 5’ में 5 करोड़ रुपए जीतकर ‘आम आदमी’ से ‘खास’ बने सुशील कुमार कलर्स टीवी पर प्रसारित हो रहे डांस रियलिटी शो ‘झलक दिखला जा 5’ से बाहर हो गए। शो से बाहर होने के बाद उन्होंने ‘हिन्दी इन डॉट कॉम’ से खास बातचीत में कहा, सबसे पहले तो यह कि ‘झलक दिखला जा’ के बाद मंच से मेरा डर पूरी तरह खत्म हो गया। अब मैं काफी कांफिडेंट हूं। उनका कहना है कि उनको मिली प्रसिद्धि उन्हें बदलेगी नहीं। पेश है ‘हिन्दी इन डॉट कॉम’ से सुशील कुमार की खास बातचीतः
हिन्दी इन डॉट कॉम: पहले केबीसी, अब झलक दिखला जा, सुशीलजी ग्लैमर की दुनिया से रु-ब-रु होना कैसा लगा?
सुशील कुमारः अच्छा लगता है। जब मैंने कौन बनेगा करोड़पति जीता उसके बाद लोग मुझे पसंद करने लगे। लोगों ने मेरा सम्मान करना शुरु कर दिया। 5 करोड़ जीतने के बाद मुझे मानसिक शांति मिली। जो समस्यां थी आर्थिक वो खत्म हो गई। मैं अपने अंदर कभी कोशिश नहीं की कि चेंज हूं। जैसे कल था, वैसे ही आज है। आज कभी-कभी टीवी पर आना हो जाता हैं, बस और कुछ नहीं।
हिन्दी इन डॉट कॉम: साधारण या ग्लैमर की दुनिया में कौन सी अच्छी है? क्या दोनों में आप तालमेल बैठा पा रहे हैं?
सुशील कुमारः गांव की शांति वाली लाइफ अच्छी है। लेकिन उसमें भी कुछ समस्याएं हैं और इसमें भी कुछ फायदे हैं। दोनों अपनी जगह बहुत अच्छी है। गांव की जिंदगी में होता ये है कि बहुत से लोगों के पास कोई काम नहीं होता है, वो हर एक्टिविटी को वाच करते रहते हैं और जिसको आप नहीं भी जानते हैं वो आपके दुश्मन हो जाते हैं, चाहे दोस्त हो जाते हैं। लेकिन वहां एक समस्या है कि बहुत लोगों के पास बहुत फुर्सत रहता है। वे आपकी कमियों को निकालते रहते हैं। अच्छी-बुरी बाते कहते रहते हैं, लेकिन यहां किसी को फुर्सत नहीं है। एक बड़ी बात और कि वहां सुख-दुख में सभी लोग रहते हैं, पर यहां के बारे में मैं ज्यादा नहीं जानता। कुछ अच्छाइयां भी हैं, कुछ बुराइयां भी, फिर भी गांव की जिंदगी अच्छी है।
हिन्दी इन डॉट कॉम: एक आम आदमी से सेलेब्रिटी बनने पर आपको कैसा महसूस होता है? सेलेब्रिटी बनने पर आपकी जिंदगी कैसे बदली, और कितनी बदली?
सुशील कुमारः बहुत अच्छा लगता है। हर कोई का सपना होता है कि आपका नाम हो, ढेर सारे लोग जानें। मुझे अच्छा लगा कि मेरा नाम हुआ, मुझे ज्यादा लोग जानते हैं। ये मेरी बड़ी उपलब्धि है। इससे मैं खुश रहता हूं कि मेरा नाम हो गया। बाकी अपने अंदर मैंने परिवर्तन महसूस नहीं किया। मेरे अंदर कुछ परिवर्तन नहीं हुआ, मेरी सोच आज भी वैसी ही है। हां, बाहर जरूर कुछ परिवर्तन हुआ है। जिस तरह लोग जान गए हैं। रहन-सहन में हाव-भाव थोड़ा बहुत चेंज हो गया है। पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। कपड़े के अंदर वही सुशील कुमार है जो हमेशा रहेगा।
हिन्दी इन डॉट कॉम: सुशीलजी आप बिहार से हैं और बिहार के लोगों का सपना लाल बत्ती वाली गाड़ी पर बैठने का होता है? तो क्या 5 करोड़ जीतने के बाद आपका लक्ष्य बदल तो नहीं गया?
सुशील कुमारः हां, मैंने साचा था कि मैं सिविल सर्विसेस की तैयारी करूंगा, पर अब मुझे लगता है अब मुझसे नहीं हो पाएगा। चाह कर भी मैं अब उतना समय नहीं दे पाउंगा। सिविल सर्विसेस की तैयारी समर्पण मांगती है। तन, मन और धन से समर्पण मांगती है। पर आज मैं चाह कर भी उतना समय नहीं दे पाता, चाह कर भी पढ़ाई पर उतना फोकस नहीं कर पाता क्योंकि केबीसी जीतने के बाद ढेर सारी समस्याएं आ गईं। मेरे पास कुछ नहीं रहने के बावजूद भी आज मेरे पास टाइम का अभाव है। मैं ये सोचता हूं कि कहन के नहीं पढ़ेंगे।
हिन्दी इन डॉट कॉम:आप हिन्दी भाषी प्रदेश से आते हैं। आप हिन्दी मीडियम से भी हैं, तो करोड़पति बन सकते हैं, ऐसा केबीसी का विज्ञापन टीवी पर आ रहा है। क्या ग्लैमर वर्ल्ड में अंग्रेजी ना होने से आपको परेशानी हो रही है?
सुशील कुमारः हां, मुंबई में बुरा लगता है। मुझे लगता है जो अंग्रेजी बोलते हैं वो हिन्दी भी बोल सकते हैं, अगर सामने वाला आपसे हिन्दी में बात कर रहा है तो आपको भी हिन्दी में बातें करनी चाहिए। ऐसे नहीं पर दुख होता है। जहां कैसा कल्चर होता, वहां वैसा आचरण करता है।
हिन्दी इन डॉट कॉम: इतनी सारी सेलेब्रिटी से मिले सुशीलजी, कौन अच्छा लगा? ऐसा कौन, जो वाकई लगा कि नहीं वो हमारे जैसे मिट्टी से जुड़े लगते हैं?
सुशील कुमारः पर्सनली जो मुझे अच्छी लगी उसमें भारती, करन वोरा और भोजपुरी अभिनेता रवि किशन। उनसे बातचीत करने पर नहीं लगा कि वो मेरे से अलग हैं।
हिन्दी इन डॉट कॉम: मुंबई बसने का आपका कोई विचार है?
सुशील कुमारः बिल्कुल कोई विचार नहीं है। इसलिए क्योंकि मुंबई बहुत महंगा है। यहां मेरे 5 करोड़ रुपए की कोई औकात नहीं है। इतने में तो यहां एक फ्लैट मिलता है।
हिन्दी इन डॉट कॉम: सुशील कुमार ग्लैमर वर्ल्ड में रहेंगे या राजनीति में जाएंगे?
सुशील कुमारः अगर मुझे कुछ प्रस्ताव आते हैं तो मैं ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़ा रहूंगा, लेकिन राजनीति में कभी नहीं जाऊंगा।
हिन्दी इन डॉट कॉम: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आपको अपने क्षेत्र के विकास के लिए विधायक का टिकट दें, तो क्या आप चुनाव लड़ेंगे?
सुशील कुमारः मैं हाथ जोड़ कर प्रणाम कर लूंगा, लेकिन राजनीति में नहीं आउंगा। मैं अच्छा वक्ता हूं, लेकिन मुझमें नेतृत्व क्षमता नहीं है। तो मैं नेता कैसे बन सकता हूं।
हिन्दी इन डॉट कॉम: लगभग चार महीनों से आप मुंबई हैं। तो क्या आपको घर के खाने की तलब होती है?
सुशील कुमारः मैं तो यहां होटलों में खा खाकर पक गया हूं। दाल, भात, भुजिया खाने का बहुत मन होता है, लेकिन होटल वाले से पूछा कि भुजिया है, तो वेटर बोलता है कि वो क्या होता है। होटल के खाने में मसाला बहुत है। मेरा होटल के खर्च का बिल एक लाख 80 हजार रुपए आए। इतने रुपए में तो हम अपने गांव में 5 साल तक भर पेट खाते।
हिन्दी इन डॉट कॉम: बिहार में शिक्षा को बढ़ाने के लिए आप क्या करेंगे?
सुशील कुमारः मैं एनजीओ की सहायता से गरीब बच्चों को पढ़ाउंगा।
हिन्दी इन डॉट कॉम: केबीसी ने आपको इतना नाम दिया, तो क्या आप केबीसी के अगले संस्करण से जुड़े हैं?
सुशील कुमारः जुड़ा तो नहीं हूं, लेकिन मैं कह दिया है कि अगर मेरे लायक कुछ हो तो मुझे बताइएगा।
हिन्दी इन डॉट कॉम: केबीसी विजेता बनने के बाद आपको रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ से ऑफर आया था। आप बिग बॉस में क्यों नहीं गए?
सुशील कुमारः अरे भाई, अभी मैं 5 करोड़ रुपए जीता था और इसके बाद तुरंत बाद मुझे एक घर में जाकर बंद हो जाना अच्छा नहीं लगा। अभी मैं इसी खुशी जीना चाहता था, महसूस करना चाहता था। इसलिए बिग बॉस का प्रस्ताव ठुकरा दिया।
हिन्दी इन डॉट कॉम: सुशील कुमार 5 साल बाद अपने आपको कहां पाएगा?
सुशील कुमारः आंखों पर चश्मा चढ़ाए पढ़ाता हुआ भी नजर आ सकता हूं। कंफ्यूज हूं, ग्लैमर में भी आ सकता हूं।
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संजीत कुमार
मुंबई। ‘कौन बनेगा करोड़पति 5’ में 5 करोड़ रुपए जीतकर ‘आम आदमी’ से ‘खास’ बने सुशील कुमार कलर्स टीवी पर प्रसारित हो रहे डांस रियलिटी शो ‘झलक दिखला जा 5’ से बाहर हो गए। शो से बाहर होने के बाद उन्होंने ‘हिन्दी इन डॉट कॉम’ से खास बातचीत में कहा, सबसे पहले तो यह कि ‘झलक दिखला जा’ के बाद मंच से मेरा डर पूरी तरह खत्म हो गया। अब मैं काफी कांफिडेंट हूं। उनका कहना है कि उनको मिली प्रसिद्धि उन्हें बदलेगी नहीं। पेश है ‘हिन्दी इन डॉट कॉम’ से सुशील कुमार की खास बातचीतः
हिन्दी इन डॉट कॉम: पहले केबीसी, अब झलक दिखला जा, सुशीलजी ग्लैमर की दुनिया से रु-ब-रु होना कैसा लगा?
सुशील कुमारः अच्छा लगता है। जब मैंने कौन बनेगा करोड़पति जीता उसके बाद लोग मुझे पसंद करने लगे। लोगों ने मेरा सम्मान करना शुरु कर दिया। 5 करोड़ जीतने के बाद मुझे मानसिक शांति मिली। जो समस्यां थी आर्थिक वो खत्म हो गई। मैं अपने अंदर कभी कोशिश नहीं की कि चेंज हूं। जैसे कल था, वैसे ही आज है। आज कभी-कभी टीवी पर आना हो जाता हैं, बस और कुछ नहीं।
हिन्दी इन डॉट कॉम: साधारण या ग्लैमर की दुनिया में कौन सी अच्छी है? क्या दोनों में आप तालमेल बैठा पा रहे हैं?
सुशील कुमारः गांव की शांति वाली लाइफ अच्छी है। लेकिन उसमें भी कुछ समस्याएं हैं और इसमें भी कुछ फायदे हैं। दोनों अपनी जगह बहुत अच्छी है। गांव की जिंदगी में होता ये है कि बहुत से लोगों के पास कोई काम नहीं होता है, वो हर एक्टिविटी को वाच करते रहते हैं और जिसको आप नहीं भी जानते हैं वो आपके दुश्मन हो जाते हैं, चाहे दोस्त हो जाते हैं। लेकिन वहां एक समस्या है कि बहुत लोगों के पास बहुत फुर्सत रहता है। वे आपकी कमियों को निकालते रहते हैं। अच्छी-बुरी बाते कहते रहते हैं, लेकिन यहां किसी को फुर्सत नहीं है। एक बड़ी बात और कि वहां सुख-दुख में सभी लोग रहते हैं, पर यहां के बारे में मैं ज्यादा नहीं जानता। कुछ अच्छाइयां भी हैं, कुछ बुराइयां भी, फिर भी गांव की जिंदगी अच्छी है।
हिन्दी इन डॉट कॉम: एक आम आदमी से सेलेब्रिटी बनने पर आपको कैसा महसूस होता है? सेलेब्रिटी बनने पर आपकी जिंदगी कैसे बदली, और कितनी बदली?
सुशील कुमारः बहुत अच्छा लगता है। हर कोई का सपना होता है कि आपका नाम हो, ढेर सारे लोग जानें। मुझे अच्छा लगा कि मेरा नाम हुआ, मुझे ज्यादा लोग जानते हैं। ये मेरी बड़ी उपलब्धि है। इससे मैं खुश रहता हूं कि मेरा नाम हो गया। बाकी अपने अंदर मैंने परिवर्तन महसूस नहीं किया। मेरे अंदर कुछ परिवर्तन नहीं हुआ, मेरी सोच आज भी वैसी ही है। हां, बाहर जरूर कुछ परिवर्तन हुआ है। जिस तरह लोग जान गए हैं। रहन-सहन में हाव-भाव थोड़ा बहुत चेंज हो गया है। पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। कपड़े के अंदर वही सुशील कुमार है जो हमेशा रहेगा।
हिन्दी इन डॉट कॉम: सुशीलजी आप बिहार से हैं और बिहार के लोगों का सपना लाल बत्ती वाली गाड़ी पर बैठने का होता है? तो क्या 5 करोड़ जीतने के बाद आपका लक्ष्य बदल तो नहीं गया?
सुशील कुमारः हां, मैंने साचा था कि मैं सिविल सर्विसेस की तैयारी करूंगा, पर अब मुझे लगता है अब मुझसे नहीं हो पाएगा। चाह कर भी मैं अब उतना समय नहीं दे पाउंगा। सिविल सर्विसेस की तैयारी समर्पण मांगती है। तन, मन और धन से समर्पण मांगती है। पर आज मैं चाह कर भी उतना समय नहीं दे पाता, चाह कर भी पढ़ाई पर उतना फोकस नहीं कर पाता क्योंकि केबीसी जीतने के बाद ढेर सारी समस्याएं आ गईं। मेरे पास कुछ नहीं रहने के बावजूद भी आज मेरे पास टाइम का अभाव है। मैं ये सोचता हूं कि कहन के नहीं पढ़ेंगे।
हिन्दी इन डॉट कॉम:आप हिन्दी भाषी प्रदेश से आते हैं। आप हिन्दी मीडियम से भी हैं, तो करोड़पति बन सकते हैं, ऐसा केबीसी का विज्ञापन टीवी पर आ रहा है। क्या ग्लैमर वर्ल्ड में अंग्रेजी ना होने से आपको परेशानी हो रही है?
सुशील कुमारः हां, मुंबई में बुरा लगता है। मुझे लगता है जो अंग्रेजी बोलते हैं वो हिन्दी भी बोल सकते हैं, अगर सामने वाला आपसे हिन्दी में बात कर रहा है तो आपको भी हिन्दी में बातें करनी चाहिए। ऐसे नहीं पर दुख होता है। जहां कैसा कल्चर होता, वहां वैसा आचरण करता है।
हिन्दी इन डॉट कॉम: इतनी सारी सेलेब्रिटी से मिले सुशीलजी, कौन अच्छा लगा? ऐसा कौन, जो वाकई लगा कि नहीं वो हमारे जैसे मिट्टी से जुड़े लगते हैं?
सुशील कुमारः पर्सनली जो मुझे अच्छी लगी उसमें भारती, करन वोरा और भोजपुरी अभिनेता रवि किशन। उनसे बातचीत करने पर नहीं लगा कि वो मेरे से अलग हैं।
हिन्दी इन डॉट कॉम: मुंबई बसने का आपका कोई विचार है?
सुशील कुमारः बिल्कुल कोई विचार नहीं है। इसलिए क्योंकि मुंबई बहुत महंगा है। यहां मेरे 5 करोड़ रुपए की कोई औकात नहीं है। इतने में तो यहां एक फ्लैट मिलता है।
हिन्दी इन डॉट कॉम: सुशील कुमार ग्लैमर वर्ल्ड में रहेंगे या राजनीति में जाएंगे?
सुशील कुमारः अगर मुझे कुछ प्रस्ताव आते हैं तो मैं ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़ा रहूंगा, लेकिन राजनीति में कभी नहीं जाऊंगा।
हिन्दी इन डॉट कॉम: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आपको अपने क्षेत्र के विकास के लिए विधायक का टिकट दें, तो क्या आप चुनाव लड़ेंगे?
सुशील कुमारः मैं हाथ जोड़ कर प्रणाम कर लूंगा, लेकिन राजनीति में नहीं आउंगा। मैं अच्छा वक्ता हूं, लेकिन मुझमें नेतृत्व क्षमता नहीं है। तो मैं नेता कैसे बन सकता हूं।
हिन्दी इन डॉट कॉम: लगभग चार महीनों से आप मुंबई हैं। तो क्या आपको घर के खाने की तलब होती है?
सुशील कुमारः मैं तो यहां होटलों में खा खाकर पक गया हूं। दाल, भात, भुजिया खाने का बहुत मन होता है, लेकिन होटल वाले से पूछा कि भुजिया है, तो वेटर बोलता है कि वो क्या होता है। होटल के खाने में मसाला बहुत है। मेरा होटल के खर्च का बिल एक लाख 80 हजार रुपए आए। इतने रुपए में तो हम अपने गांव में 5 साल तक भर पेट खाते।
हिन्दी इन डॉट कॉम: बिहार में शिक्षा को बढ़ाने के लिए आप क्या करेंगे?
सुशील कुमारः मैं एनजीओ की सहायता से गरीब बच्चों को पढ़ाउंगा।
हिन्दी इन डॉट कॉम: केबीसी ने आपको इतना नाम दिया, तो क्या आप केबीसी के अगले संस्करण से जुड़े हैं?
सुशील कुमारः जुड़ा तो नहीं हूं, लेकिन मैं कह दिया है कि अगर मेरे लायक कुछ हो तो मुझे बताइएगा।
हिन्दी इन डॉट कॉम: केबीसी विजेता बनने के बाद आपको रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ से ऑफर आया था। आप बिग बॉस में क्यों नहीं गए?
सुशील कुमारः अरे भाई, अभी मैं 5 करोड़ रुपए जीता था और इसके बाद तुरंत बाद मुझे एक घर में जाकर बंद हो जाना अच्छा नहीं लगा। अभी मैं इसी खुशी जीना चाहता था, महसूस करना चाहता था। इसलिए बिग बॉस का प्रस्ताव ठुकरा दिया।
हिन्दी इन डॉट कॉम: सुशील कुमार 5 साल बाद अपने आपको कहां पाएगा?
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