23 अक्टूबर 2012
आईबीएन-7
आज शारदीय नवरात्रि का नवां और आखिरी दिन है और आज मां दुर्गा के नौवें स्वरूप ‘सिद्धीदात्री’ की आराधना की जाती है। नवरात्र पर्व के नौवें दिन सिद्धीदात्री की पूजा-अर्चना करके भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। सिद्धीदात्री की आराधना करने से आपके घर में सुख की वर्षा होती है।
मां दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। नवदुर्गाओं में सबसे श्रेष्ठ और सिद्धि और मोक्ष देने वाली दुर्गा को सिद्धिदात्री कहा जाता है। यह देवी भगवान विष्णु की प्रियतमा लक्ष्मी के समान कमल के आसन पर विराजमान है और हाथों में कमल शंख गदा सुदर्शन चक्र धारण किए हुए हैं।
देव, यक्ष, किन्नर, दानव, ऋषि-मुनि, साधक, विप्र और संसारी जन सिद्धिदात्री की पूजा नवरात्र के नवें दिन करके अपनी जीवन में यश बल और धन की प्राप्ति करते हैं। सिद्धिदात्री देवी उन सभी महाविद्याओं की अष्ट सिद्धियां भी प्रदान करती हैं, जो सच्चे हृदय से उनके लिए आराधना करता है।
नवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा उपासना करने के लिए नवाहन का प्रसाद और नवरस युक्त भोजन तथा नौ प्रकार के फल-फूल आदि का अर्पण करके जो भक्त नवरात्र का समापन करते हैं, उनको इस संसार में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। सिद्धिदात्री देवी सरस्वती का भी स्वरूप है, जो सफेद वस्त्रालंकार से युक्त महा ज्ञान और मधुर स्वर से अपने भक्तों को सम्मोहित करती है।
नवें दिन सभी नवदुर्गाओं के सांसारिक स्वरूप को विसर्जन की परम्परा भी गंगा, नर्मदा, कावेरी या समुद्र जल में विसर्जित करने की परम्परा भी है। नवदुर्गा के स्वरूप में साक्षात पार्वती और भगवती विघ्नविनाशक गणपति को भी सम्मानित किया जाता है।
सिद्धिदात्री की कृपा से मनुष्य सभी प्रकार की सिद्धिया प्राप्त कर मोक्ष पाने मे सफल होता है। मार्कण्डेयपुराण में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्वये आठ सिद्धियां बतलायी गयी हैं। भगवती सिद्धिदात्री उपरोक्त संपूर्ण सिद्धियां अपने उपासको को प्रदान करती है। मां दुर्गा के इस अंतिम स्वरूप की अराधना के साथ ही नवरात्र के अनुष्ठान का समापन हो जाता है।
प्रिय भोग- नवरात्रि की नवमी के दिन तिल का भोग लगाकर ब्राह्मण को दान दें। इससे मृत्यु भय से राहत मिलेगी। साथ ही अनहोनी होने की घटनाओं से बचाव भी होगा।
आयुर्वेदिक औषधीय गुण-दुर्गा का नवम रूप सिद्धिदात्री है। जिसे नारायणी या शतावरी कहते हैं। शतावरी बुद्धि बल एवं वीर्य के लिए उत्तम औषधि है। रक्त विकार एवं वात पित्त शोध नाशक है।
बाधा शान्ति के लिये
"सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥"
अर्थ:-सर्वेश्वरि! तुम इसी प्रकार तीनों लोकों की समस्त बाधाओं को शान्त करो और हमारे शत्रुओं का नाश करती रहो।
मेषः नया व्यवसाय या नौकरी प्राप्त हो सकती है।
क्या करें-मां तुलसी की अराधना करें।
क्या न करें-इन दिनों बाहर का भोजन करने से बचें।
क्या करें- पीपल के पत्ते पर रोली से दूं लिख कर पूजा कर प्रवाहित करें।
क्या न करें-धार्मिक आचरण से पीछे न हटें।
वृषभः आपके कार्य क्षेत्र में नये बदलाव हो सकते हैं।
क्या करें-गायत्री मंत्र का जाप अवश्य करें।
क्या न करें-देवी स्वरुप बालिका को दुखी न रहने दें।
मिथुनः आपकी आर्थिक स्थिति प्रबल होगी।
क्या करें-दुर्गा शप्तशती का पाठ लाभ देगा।
क्या न करें-क्रूर स्वाभाव से बचें।
कर्कः आपको त्वचा संबन्धी रोगों का सामना करना पड़ सकता है।
क्या करें-खोये का मिस्ठान माता को भोग लगाएं।
क्या न करें-किसी महिला पर क्रोध करने से बचें।
सिंहः अत्याधिक परिश्रम और मेहनत से आप सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
क्या करें- माता की कपूर से आरती करें।
क्या न करें-रोगी को किसी प्रकार के सहयोग से मना न करें।
कन्याः आज आपकी लापरवाही आपको लंबे समय का नुक्सान कर सकती हैं।
क्या करें-देवी अथर्वशीर्ष का पाठ चमत्कारी लाभ देगा।
क्या न करें-निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें।
तुलाः नौकरी-व्यवसाय में आपको इच्छा से अधिक प्रगति प्राप्त होगी।
क्या करें-कनकधारा स्तोत्र का पाठ लाभ देगा।
क्या न करें-वृद्ध महिला का अपमान न करें।
वृश्चिकः सरकार से संबंधित कार्य में लाभ प्राप्त हो सकता है।
क्या करें-माता को शहद का भोग अर्पित करें।
क्या न करें-बच्चों का दिल न दुखायें।
धनुः अपने संचित धन को पूंजि निवेश कर लाभ प्राप्त कर सकते है।
क्या करें-सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें।
क्या न करें-देवी की पूजा की अवहेलना न करें।
मकरः अपने खाने-पीने का ध्यान रखें अन्यथा आपका स्वास्थ प्रभावित हो सकता है।
क्या करें-रात्रि सुक्त का पाठ करें।
क्या न करें-मद्यपान से बचना अनिवार्य है।
कुम्भः मानसिक चिन्तायें बढ़ सकती है।
क्या करें-किसी सुहागिन स्त्री को दक्षिणा दें।
क्या न करें-आज किसी का अपमान नहीं करें।
मीनः आज आप आजीविका में बदलाव करने का प्रयास का विचार बना सकते हैं।
क्या करें-दुर्गा यन्त्र की पूजा करें।
क्या ना करें-उत्तेजित न हो।
नवरात्रि: दुर्गा मां का आठवां इच्छापूर्ति रूप ‘महागौरी’
नवरात्र: मां दुर्गा की पूजा में रखें वास्तु नियमों का ध्यान!
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