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कहीं दादा,नाना से तो नहीं हो रहा कैंसर

07 दिसंबर 2012
इंडो एशियन न्यूज़ सर्विस 

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कोलकाता।
भारतीय वैज्ञानिकों ने कैंसर जैसी बीमारियों के लिए जिम्मेदार आनुवांशिक गड़बड़ियों का पता लगाने के लिए नई तकनीकी विकसित की है। इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस (आईएसीएस) के वैज्ञानिकों ने कैंसर, कुष्ठ रोग और एड्स सहित कई बीमारियों के लिए जिम्मेदार आनुवांशिक विभिन्नताओं को स्निप्स कहा है।

आईएसीएस के जैव रसायन के सहायक प्रोफेसर रूपा मुखोपाध्याय ने बताया कि जैव विभिन्नता हमें यह बता सकती है कि मानव शरीर वायरस,बैक्टीरिया,कवक,रसायनों,दवाइयों और अन्य एजेंटों के खिलाफ कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त करता है।

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति में आनुवांशिक विभिन्नताओं का पता लग जाने के बाद किसी विशिष्ट बीमारी के होने की संभावना का पता लगाया जा सकता है।इन विभिन्नताओं का पता बायोसेंसर से डीएनए जांच के बाद लगाया जा सकता है।

बायोसेंसर का प्रयोग एंजाइम एवं एंटीबॉडी की रासायनिक संरचना का पता लगाने के लिए किया जाता है। मुखोपाध्याय ने हालांकि स्वीकार किया कि डीएनए आधारित बायोसेंसर के कुछ अपने दोष हैं। उन्होंने कहा कि बायोसेंसर तंत्र में आसानी से प्रयोग में लाए जाने वाले एक आदर्श बायोसेंसर के विषय में सोचा जा रहा है।

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