10 फरवरी 2012
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
सिडनी। कहते हैं, ‘नाम में क्या रखा है? किसी भी नाम से पुकारो, क्या फर्क पड़ता है?’ लेकिन फर्क पड़ता है। जिंदगी से जुड़े हर पहलू पर इसका गहरा असर होता है, पेशेवर जिंदगी में भी और इसकी पुष्टि अब वैज्ञानिकों ने भी कर दी है।
मेलबर्न तथा न्यूयार्क के विश्वविद्यालयों में हुए अपने तरह के पहले अध्ययन से यह खुलासा हुआ है कि नाम का उच्चारण किस प्रकार सम्बंधित व्यक्ति की छवि बनाने और निर्णय-निर्माण प्रक्रिया को प्रभावित करता है?
कार्यस्थल पर अपमान तकलीफदेह
मेलबर्न विश्वविद्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, ऐसे लोगों के प्रति, जिनके नाम पुकारने में आसान होते हैं, कार्यस्थल पर लोगों का रवैया अपेक्षाकृत अधिक सकारात्मक होता है।
इस अध्ययन को ‘नाम पुकरने का प्रभाव’ नाम दिया गया था और इसके नतीजे ‘जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल सोशल साइकॉलोजी’ में प्रकाशित हुए हैं।
मेलबर्न में अध्ययन के नेतृत्वकर्ता सिमॉन लाहम के अनुसार, "अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि नाम का असर इसकी लम्बाई, विदेशी उच्चारण या इसके असामान्य होने के कारण नहीं, बल्कि इसके आसान उच्चारण को लेकर होता है।"
ऑफिस में थोड़ी चहलकदमी आपको बनाता है फिट
शोध के अनुसार, जिनके नामों का उच्चारण अधिक आसान होता है, उन्हें राजनीतिक कार्यो तथा अन्य नौकरियों में अधिक लाभ मिलता है। अध्ययन के दौरान एक दिखावटी मतदान कराया गया, जिसमें नतीजा उनके पक्ष में आया, जिनके नाम का उच्चारण अपेक्षाकृत आसान था।
शोध नतीजों से इसका खुलासा भी हुआ कि जिन अधिवक्ताओं के नाम पुकारने में अधिक आसान होते हैं, उनके भी आगे बढ़ने की बहुत सम्भावना होती है।
यह अध्ययन करने वाले न्यूयार्क यूनिवर्सिटी के एडम अलटर के मुताबिक, नाम का यह असर सम्भवत: अन्य उद्योगों पर भी होता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
सिडनी। कहते हैं, ‘नाम में क्या रखा है? किसी भी नाम से पुकारो, क्या फर्क पड़ता है?’ लेकिन फर्क पड़ता है। जिंदगी से जुड़े हर पहलू पर इसका गहरा असर होता है, पेशेवर जिंदगी में भी और इसकी पुष्टि अब वैज्ञानिकों ने भी कर दी है।
मेलबर्न तथा न्यूयार्क के विश्वविद्यालयों में हुए अपने तरह के पहले अध्ययन से यह खुलासा हुआ है कि नाम का उच्चारण किस प्रकार सम्बंधित व्यक्ति की छवि बनाने और निर्णय-निर्माण प्रक्रिया को प्रभावित करता है?
कार्यस्थल पर अपमान तकलीफदेह
मेलबर्न विश्वविद्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, ऐसे लोगों के प्रति, जिनके नाम पुकारने में आसान होते हैं, कार्यस्थल पर लोगों का रवैया अपेक्षाकृत अधिक सकारात्मक होता है।
इस अध्ययन को ‘नाम पुकरने का प्रभाव’ नाम दिया गया था और इसके नतीजे ‘जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल सोशल साइकॉलोजी’ में प्रकाशित हुए हैं।
मेलबर्न में अध्ययन के नेतृत्वकर्ता सिमॉन लाहम के अनुसार, "अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि नाम का असर इसकी लम्बाई, विदेशी उच्चारण या इसके असामान्य होने के कारण नहीं, बल्कि इसके आसान उच्चारण को लेकर होता है।"
ऑफिस में थोड़ी चहलकदमी आपको बनाता है फिट
शोध के अनुसार, जिनके नामों का उच्चारण अधिक आसान होता है, उन्हें राजनीतिक कार्यो तथा अन्य नौकरियों में अधिक लाभ मिलता है। अध्ययन के दौरान एक दिखावटी मतदान कराया गया, जिसमें नतीजा उनके पक्ष में आया, जिनके नाम का उच्चारण अपेक्षाकृत आसान था।
शोध नतीजों से इसका खुलासा भी हुआ कि जिन अधिवक्ताओं के नाम पुकारने में अधिक आसान होते हैं, उनके भी आगे बढ़ने की बहुत सम्भावना होती है।
यह अध्ययन करने वाले न्यूयार्क यूनिवर्सिटी के एडम अलटर के मुताबिक, नाम का यह असर सम्भवत: अन्य उद्योगों पर भी होता है।
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