03 फरवरी 2012
वार्ता
नई दिल्ली। महंगाई का असर यह हो रहा है कि देश के अभिभावकों को शहरों में अपने दो बच्चों को प्राइमरी कक्षा में अच्छे स्कूल में पढ़ाने के लिए हर साल जहां दो लाख रुपए खर्च करने पड़ते थे, अब उन्हें सालाना 4 लाख रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।
भारतीय उद्योग जगत की प्रमुख संस्थान एसोचैम ने अपने ताजा सर्वेक्षण में यह जानकारी दी है।
मुंबई के स्कूल में ‘आईपैड’ से पढ़ रहे हैं विद्यार्थी
‘द एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कामर्स एण्ड इंडस्टी’ (एसोचैम) ने दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, देहरादून, पुणे, बेंगलूर, कोलकाता, चेन्नई, तथा चंडीगढ़, में करीब दो हजार उन अभिभावकों का सर्वेक्षण किया है जिनकी सालाना तनख्वाह तीन से 9 लाख रुपए है। इन अभिभावकों का कहना है कि उन्हें अपने बच्चों को प्राइमरी कक्षा में पढ़ाने में काफी मुश्किल हो रही है क्योंकि वर्ष 2009 में उन्हें हर साल दो लाख रुपए खर्च करने पड़ते थे, पर अब चार लाख रुपए सालाना खर्च करने पड़ रहे हैं।
दिल्ली: नर्सरी दाखिले के लिए स्कूल मांग रहे हैं रिश्वत
सर्वेक्षण के अनुसार गत छह वर्षों में अभिभावकों की तनख्वाह तो 40 प्रतिशत बढ़ी पर स्कूलों में पढ़ाई का खर्च 200 प्रतिशत बढ़ा है। अभिभावकों का कहना है कि अगर पति या पत्नी में से एक ही आदमी कार्य करता है तो पढ़ाई का खर्च दो गुना हो गया है। महानगरों में प्रावेट स्कूलों में फीस 50 हजार से तीन लाख रुपए सालाना है। बस किराया 10 हजार से 25 हजार तक है। फीस पर खर्च 4 हजार से 10 हजार रुपए हैं। स्कूल बैग तथा जूते पर खर्च 8 हजार से 12 हजार रुपए तक है। यानी तनख्वाह का 40 प्रतिशत पढ़ाई पर खर्च हो रहा है।
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नई दिल्ली। महंगाई का असर यह हो रहा है कि देश के अभिभावकों को शहरों में अपने दो बच्चों को प्राइमरी कक्षा में अच्छे स्कूल में पढ़ाने के लिए हर साल जहां दो लाख रुपए खर्च करने पड़ते थे, अब उन्हें सालाना 4 लाख रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।
भारतीय उद्योग जगत की प्रमुख संस्थान एसोचैम ने अपने ताजा सर्वेक्षण में यह जानकारी दी है।
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‘द एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कामर्स एण्ड इंडस्टी’ (एसोचैम) ने दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, देहरादून, पुणे, बेंगलूर, कोलकाता, चेन्नई, तथा चंडीगढ़, में करीब दो हजार उन अभिभावकों का सर्वेक्षण किया है जिनकी सालाना तनख्वाह तीन से 9 लाख रुपए है। इन अभिभावकों का कहना है कि उन्हें अपने बच्चों को प्राइमरी कक्षा में पढ़ाने में काफी मुश्किल हो रही है क्योंकि वर्ष 2009 में उन्हें हर साल दो लाख रुपए खर्च करने पड़ते थे, पर अब चार लाख रुपए सालाना खर्च करने पड़ रहे हैं।
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सर्वेक्षण के अनुसार गत छह वर्षों में अभिभावकों की तनख्वाह तो 40 प्रतिशत बढ़ी पर स्कूलों में पढ़ाई का खर्च 200 प्रतिशत बढ़ा है। अभिभावकों का कहना है कि अगर पति या पत्नी में से एक ही आदमी कार्य करता है तो पढ़ाई का खर्च दो गुना हो गया है। महानगरों में प्रावेट स्कूलों में फीस 50 हजार से तीन लाख रुपए सालाना है। बस किराया 10 हजार से 25 हजार तक है। फीस पर खर्च 4 हजार से 10 हजार रुपए हैं। स्कूल बैग तथा जूते पर खर्च 8 हजार से 12 हजार रुपए तक है। यानी तनख्वाह का 40 प्रतिशत पढ़ाई पर खर्च हो रहा है।
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