08 फरवरी 2012
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
वॉशिंगटन। बच्चों के बड़े होने के दौरान उन्हें सकारात्मक परवरिश देने से उनमें मोटापा रोकने में मदद मिल सकती है। वर्तमान में पांच अमेरिकी बच्चों में से एक मोटापाग्रस्त होता है। इन बच्चों के साथी बच्चों के मुकाबले किशोरावस्था तक मोटापाग्रस्त होने का खतरा पांच गुना अधिक होता है। इससे उन्हें अपनी चिकित्सकीय, सामाजिक व शैक्षिक जिंदगी में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बच्चों को सजा बना सकती हैं आक्रामक
न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय की अध्ययनकर्ता लॉरी मिलर ब्रोटमैन ने अध्ययन किया कि जिस तरह व्यवहारगत परेशानियों वाले बच्चों में उनके जीवन की शुरुआत में पारिवारिक दखल से मदद मिलती है, उसी तरह मोटापे के साथ भी ऐसा ही है। अभिभावकों के सकारात्मक रवैए से मोटापे की दर कम होती है।
‘पीडियाट्रिक्स’ जर्नल के मुताबिक यह अध्ययन अधिक जोखिम वाले बच्चों पर हुए दो लम्बे अध्ययनों पर आधारित हैं।
मां के प्यार से विकसित होता है बच्चे का दिमाग
अध्ययन में अल्पसंख्यक व गरीब परिवारों के 186 ऐसे बच्चों को शामिल किया गया, जिनमें मोटापे का खतरा ज्यादा था। इन बच्चों के करीब चार साल के होने पर उन्हें पारिवारिक दखल या एक नियंत्रण समूह उपलब्ध कराया गया।
जिन बच्चों को बचपन में परिवार का सकारात्मक रवैया मिला उनमें नियंत्रण समूह के साथ रहने वाले बच्चों की तुलना में मोटापे की दर में महत्वपूर्ण कमी देखी गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
वॉशिंगटन। बच्चों के बड़े होने के दौरान उन्हें सकारात्मक परवरिश देने से उनमें मोटापा रोकने में मदद मिल सकती है। वर्तमान में पांच अमेरिकी बच्चों में से एक मोटापाग्रस्त होता है। इन बच्चों के साथी बच्चों के मुकाबले किशोरावस्था तक मोटापाग्रस्त होने का खतरा पांच गुना अधिक होता है। इससे उन्हें अपनी चिकित्सकीय, सामाजिक व शैक्षिक जिंदगी में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बच्चों को सजा बना सकती हैं आक्रामक
न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय की अध्ययनकर्ता लॉरी मिलर ब्रोटमैन ने अध्ययन किया कि जिस तरह व्यवहारगत परेशानियों वाले बच्चों में उनके जीवन की शुरुआत में पारिवारिक दखल से मदद मिलती है, उसी तरह मोटापे के साथ भी ऐसा ही है। अभिभावकों के सकारात्मक रवैए से मोटापे की दर कम होती है।
‘पीडियाट्रिक्स’ जर्नल के मुताबिक यह अध्ययन अधिक जोखिम वाले बच्चों पर हुए दो लम्बे अध्ययनों पर आधारित हैं।
मां के प्यार से विकसित होता है बच्चे का दिमाग
अध्ययन में अल्पसंख्यक व गरीब परिवारों के 186 ऐसे बच्चों को शामिल किया गया, जिनमें मोटापे का खतरा ज्यादा था। इन बच्चों के करीब चार साल के होने पर उन्हें पारिवारिक दखल या एक नियंत्रण समूह उपलब्ध कराया गया।
जिन बच्चों को बचपन में परिवार का सकारात्मक रवैया मिला उनमें नियंत्रण समूह के साथ रहने वाले बच्चों की तुलना में मोटापे की दर में महत्वपूर्ण कमी देखी गई।
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