13 जनवरी 2012
वार्ता
बरेली। कुत्ता एक समझदार जानवर है यह बात तो सब मानते हैं मगर कम ही लोग जानते होंगे कि कुत्तों की मदद से अब कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की शिनाख्त तथा उपचार का काम भी किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के निदेशक प्रो.महेश चन्द्र शर्मा ने यहां यूनीवार्ता से विशेष भेंट में कहा कि वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि घरेलू कुत्ते अथवा श्वान के स्वामी को चिंता और बेचैनी अपेक्षाकृत कम होती है।
साथ ही घरेलू कुत्ता अपने मालिक के लिपिड प्रोफाइल को नियमित रखने तथा उसके हृदय के स्वास्थ्य बेहतर बनाने में भी सहायक साबित होता है।
प्रो.शर्मा के अनुसार देश, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में कुछ अर्से से श्वान पालन बढ़ा है। हालांकि आम तौर पर लोग श्वान पालन शौक के लिए करते हैं मगर वैज्ञानिक शोधों और अध्ययनों से यह साबित हो गया है कि श्वान पालन और मानव स्वास्थ्य में विशेष सम्बन्ध है।
अब कुत्तों के दिल की बीमारी का भी इलाज
उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों द्वारा किये गये अध्ययनों से पता चला है कि पशुपालन नहीं करने वालों की अपेक्षा पशुओं का पालन करने वाले तंत्रिका और मस्तिष्क रोगों से कम प्रभावित होते हैं। साथ ही कुत्ता अपने मालिक के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होता है।
प्रो.शर्मा ने बताया कि संस्थान के पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों द्वारा किये गये अध्ययन से पता चला है कि घरेलू श्वान अपने स्वामी की लंबी आयु की कुंजी और उसे स्वस्थ रखने का एक बेहतर साधन है। वैसे अभी मानव स्वास्थ्य पर श्वान के सकारात्मक प्रभाव के कारण की पहचान नहीं हो सकी है।
उन्होंने बताया कि विकसित देशों में वैज्ञानिकों द्वारा किये गये शोध एवं अध्ययनों से पता चला है कि कुत्ता कैंसर से ग्रसित मानवों तथा स्वस्थ्य मानवों की अलग-अलग पहचान करने में सक्षम रहा है। इसके साथ ही श्वान का उपयोग अब कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की शिनाख्त तथा निदान में भी शुरू किया जा चुका है।
अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि श्वान कुछ स्थितियों में सामाजिक जुड़ाव और अपने स्वामी की पड़ोसियों से मित्रता बढ़ाने में भी सहायक रहा है।
आपका पालतू कुत्ता हो सकता है बीमारी की वजह!
सुप्रतिष्ठित साइंस डेली पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने बताया कि कुत्ता स्तन एवं फेफडे के कैंसर से ग्रसित मानवों तथा स्वस्थ्य मानवों की अलग-अलग पहचान करने में भी सक्षम रहा है।
प्रो. शर्मा ने कहा कि जर्नल ऑफ इंटिग्रेटिव कैंसर थेरेपी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार श्वान सूंघकर रोगियों की पहचान कर सकता है।
यह अनुसंधान अमरीका के कैलिफोर्निया में हो चुका है। इतना ही नहीं इस पद्धति में श्वान रोग की प्रारंभिक और अंतिम अवस्था को भी बताता है।
आईवीआरआई के निदेशक ने बताया कि कैलिफोर्निया स्थित पाइन स्ट्रीट फाउंडेशन ने पुष्टि की है कि कुत्ता मेलानोमा नामक त्वचा कैंसर को पहचान सकता है। एक अन्य अध्ययन के अनुसार पुलिस एकेडमी ऑफ साइंसेस के एनिमल जेनेटिक्स विभाग ने 31 फेफड़ा एवं 55 स्तन कैंसर समेत 86 कैंसर के रोगियों में 83 सामान्य एवं स्वस्थ्य लोगों को मिलाकर परीक्षण किया था, जिसमें कुत्ते ने 88 प्रतिशत स्तन कैंसर तथा 97 प्रतिशत फेफड़ा कैंसर रोगियों की सटीक शिनाख्त की।
पालतू ‘कुत्ते’ की जगह ले रहा ‘कम्प्यूटर’
प्रो.शर्मा ने यूरोपियन रेस्पेरिटी जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के हवाले से बताया कि जर्मनी के सिलेरही अस्पताल में किये गये एक अध्ययन में 220 दमा ग्रसित रोगियों जिनमें 100 कैंसर रोगी के रूप में अनुमानित थे, में खोजी श्वान का उपयोग किया गया। श्वान ने 71 मरीजों की पहचान कैंसर रोगी के रूप में की जिसमें 100 प्रतिशत कैंसर रोगी पाये गये।
उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक अध्ययनों से यह भी साबित हो चुका है कि कुत्ता मनुष्य में सकारात्मकता को भी बढ़ाता है। लिहाजा अब कुत्ता पालिए और अपना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर बनाइये।
वार्ता
बरेली। कुत्ता एक समझदार जानवर है यह बात तो सब मानते हैं मगर कम ही लोग जानते होंगे कि कुत्तों की मदद से अब कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की शिनाख्त तथा उपचार का काम भी किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के निदेशक प्रो.महेश चन्द्र शर्मा ने यहां यूनीवार्ता से विशेष भेंट में कहा कि वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि घरेलू कुत्ते अथवा श्वान के स्वामी को चिंता और बेचैनी अपेक्षाकृत कम होती है।
साथ ही घरेलू कुत्ता अपने मालिक के लिपिड प्रोफाइल को नियमित रखने तथा उसके हृदय के स्वास्थ्य बेहतर बनाने में भी सहायक साबित होता है।
प्रो.शर्मा के अनुसार देश, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में कुछ अर्से से श्वान पालन बढ़ा है। हालांकि आम तौर पर लोग श्वान पालन शौक के लिए करते हैं मगर वैज्ञानिक शोधों और अध्ययनों से यह साबित हो गया है कि श्वान पालन और मानव स्वास्थ्य में विशेष सम्बन्ध है।
अब कुत्तों के दिल की बीमारी का भी इलाज
उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों द्वारा किये गये अध्ययनों से पता चला है कि पशुपालन नहीं करने वालों की अपेक्षा पशुओं का पालन करने वाले तंत्रिका और मस्तिष्क रोगों से कम प्रभावित होते हैं। साथ ही कुत्ता अपने मालिक के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होता है।
प्रो.शर्मा ने बताया कि संस्थान के पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों द्वारा किये गये अध्ययन से पता चला है कि घरेलू श्वान अपने स्वामी की लंबी आयु की कुंजी और उसे स्वस्थ रखने का एक बेहतर साधन है। वैसे अभी मानव स्वास्थ्य पर श्वान के सकारात्मक प्रभाव के कारण की पहचान नहीं हो सकी है।
उन्होंने बताया कि विकसित देशों में वैज्ञानिकों द्वारा किये गये शोध एवं अध्ययनों से पता चला है कि कुत्ता कैंसर से ग्रसित मानवों तथा स्वस्थ्य मानवों की अलग-अलग पहचान करने में सक्षम रहा है। इसके साथ ही श्वान का उपयोग अब कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की शिनाख्त तथा निदान में भी शुरू किया जा चुका है।
अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि श्वान कुछ स्थितियों में सामाजिक जुड़ाव और अपने स्वामी की पड़ोसियों से मित्रता बढ़ाने में भी सहायक रहा है।
आपका पालतू कुत्ता हो सकता है बीमारी की वजह!
सुप्रतिष्ठित साइंस डेली पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने बताया कि कुत्ता स्तन एवं फेफडे के कैंसर से ग्रसित मानवों तथा स्वस्थ्य मानवों की अलग-अलग पहचान करने में भी सक्षम रहा है।
प्रो. शर्मा ने कहा कि जर्नल ऑफ इंटिग्रेटिव कैंसर थेरेपी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार श्वान सूंघकर रोगियों की पहचान कर सकता है।
यह अनुसंधान अमरीका के कैलिफोर्निया में हो चुका है। इतना ही नहीं इस पद्धति में श्वान रोग की प्रारंभिक और अंतिम अवस्था को भी बताता है।
आईवीआरआई के निदेशक ने बताया कि कैलिफोर्निया स्थित पाइन स्ट्रीट फाउंडेशन ने पुष्टि की है कि कुत्ता मेलानोमा नामक त्वचा कैंसर को पहचान सकता है। एक अन्य अध्ययन के अनुसार पुलिस एकेडमी ऑफ साइंसेस के एनिमल जेनेटिक्स विभाग ने 31 फेफड़ा एवं 55 स्तन कैंसर समेत 86 कैंसर के रोगियों में 83 सामान्य एवं स्वस्थ्य लोगों को मिलाकर परीक्षण किया था, जिसमें कुत्ते ने 88 प्रतिशत स्तन कैंसर तथा 97 प्रतिशत फेफड़ा कैंसर रोगियों की सटीक शिनाख्त की।
पालतू ‘कुत्ते’ की जगह ले रहा ‘कम्प्यूटर’
प्रो.शर्मा ने यूरोपियन रेस्पेरिटी जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के हवाले से बताया कि जर्मनी के सिलेरही अस्पताल में किये गये एक अध्ययन में 220 दमा ग्रसित रोगियों जिनमें 100 कैंसर रोगी के रूप में अनुमानित थे, में खोजी श्वान का उपयोग किया गया। श्वान ने 71 मरीजों की पहचान कैंसर रोगी के रूप में की जिसमें 100 प्रतिशत कैंसर रोगी पाये गये।
उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक अध्ययनों से यह भी साबित हो चुका है कि कुत्ता मनुष्य में सकारात्मकता को भी बढ़ाता है। लिहाजा अब कुत्ता पालिए और अपना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर बनाइये।
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