22 मई 2012
कुत्तों की मदद से बचाएं जाएंगे काजीरंगा में ‘गैंडे’!

23 जनवरी 2012
इंडो एशियन न्‍यूज सर्विस
अनूप शर्मा

गुवाहाटी।
असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में प्रसिद्ध एक सींग वाले गैंडे को बचाने के लिए खोजी कुत्तों का सहारा लिया जाएगा। उद्यान के अधिकारियों ने शिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखने एवं उन्हें पकड़ने के लिए खोजी कुत्तों की सेवाएं लेने का निर्णय लिया है।

पार्क के निदेशक सुरजीत दत्ता ने आईएएनएस को बताया, "हाल ही में एक खोजी कुत्ता यहां लाया गया है। मूलभूत उद्देश्य शिकारियों की गतिविधियों का पता लगाना एवं उन्हें पकड़ना है।"

दक्षिण अफ्रीका में गैंडे के सींग सोने से भी महंगे

उन्होंने कहा, "हम पहली बार खोजी कुत्ते का प्रयोग परीक्षण के आधार पर कर रहे हैं। यदि हम सफल रहे तो हम और खोजी कुत्तों का इस्तेमाल उद्यान के विभिन्न हिस्सों में करेंगे।"

2009 की गणना के अनुसार काजीरंगा में 2048 गैंडे हैं। लेकिन गैंडों का शिकार बदस्तूर जारी है। पिछले वर्ष पांच गैंडे मारे गए थे। जबकि इस वर्ष अब तक दो गैंडे मारे जा चुके हैं।

शिकारियों के पास अत्याधुनिक हथियार होने के कारण इन्हें रोकने में पार्क प्रशासन को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गैंडे का शिकार सींगों की वजह से किया जाता है जिनकी चीन एवं दक्षिणपूर्व के देशों में बेहद मांग है।

अंधेरे में चमकता है एक कुत्ता!

दत्ता ने कहा, "हमने पार्क के पूर्वी क्षेत्र में खोजी कुत्ते का इस्तेमाल किया जहां पर शिकारियों के गतिविधियों की सूचना मिली थी। अभियान सफल रहा क्योंकि शिकारियों के होने के कुछ संकेत मिले हैं।"

उन्होंने कहा, "खोजी कुत्तों के इस्तेमाल में कुछ समस्याएं हैं। पार्क में बाघ हैं और कुछ निश्चित स्थानों पर खोजी कुत्तों का इस्तेमाल सम्भव नहीं होगा।"

दत्ता ने कहा, "हम निश्चित तौर पर बाहरी इलाकों में कुत्तों का इस्तेमाल शिकारियों का पता लगाने के लिए करेंगे।"

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22 मई 2012

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