एक महीने पहले खाद्य विभाग ने 1000 सेल मशीन इन्सटॉल करी थी। इन मशीन से थंब प्रिंट, अन्न का वजन और बिल भी दिया गया। इसके अलावा मशीन स्पलाई किए जाने वाले सामान की जानकारी एक मैसेज के जरिए सेंट्रल सर्वर को दे देती है। इस साल के अंत में मशीन 20,000 दुकान पर लग जाएगी। अच्छी बात यह है कि लोगों में इस मशीन के प्रति भरोसा है।
खाद्य विभाग के उच्च अधिकारी हरीश गोवड़ा की मानें तो इस मशीन से राशन शॉप और गोडाउन पर खाद्य भंडार के स्टॉक की जानकारी ली जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि थंब प्रिंट की मदद के कारण 15 लाख एलपीजी कनेक्शन और 50 लाख राशन कार्ड को निरस्त कर दिया गया है।
गोवड़ा को लगभग 2 साल पहले यह जानकारी हाथ लगी कि स्टॉक का एक बड़ा हिस्से की काला बाजारी हो रही है। गोवड़ा ने हर उपभोक्ता के डाटा बेस की जानकारी इकट्ठा करना शुरु किया। इसके बाद सभी परिवारों के फिंगर प्रिंट और फोटो लिए गए और एक कार्ड बनाया गया। इस लंबी प्रक्रिया ने लगभग 1.3 करोड़ परिवारों में से 80 प्रतिशत लोगों के कार्ड बन चुके है। इस प्रक्रिया के सफल होने के कारण बाकी राज्य भी इसको लागू करने के लिए आगे आ रहे हैं।
इस प्रक्रिया को शुरु करने का यह उद्देश्य था कि कोई भी गरीब भूखा नहीं सोए। इस तकनीक से लोगों को सब्सिडी पर भी निर्भर नहीं होना पड़ेगा।
29 जनवरी 2013
CNN-IBN
facebook पर hindi.in.com पेज को LIKE किया क्या?
बैंगलोर।पिछले कुछ सालों से भारत में अंधाधूंध अन्न की बर्बादी हुई है। इस समस्या का हल काफी हद तक कर्नाटक के खाद्य विभाग ने निकाल लिया है। विभाग ने एक मोनिटरिंग सिस्टम बना रखा है जिससे प्रणाली पर नजर रखी जा सके।एक महीने पहले खाद्य विभाग ने 1000 सेल मशीन इन्सटॉल करी थी। इन मशीन से थंब प्रिंट, अन्न का वजन और बिल भी दिया गया। इसके अलावा मशीन स्पलाई किए जाने वाले सामान की जानकारी एक मैसेज के जरिए सेंट्रल सर्वर को दे देती है। इस साल के अंत में मशीन 20,000 दुकान पर लग जाएगी। अच्छी बात यह है कि लोगों में इस मशीन के प्रति भरोसा है।
खाद्य विभाग के उच्च अधिकारी हरीश गोवड़ा की मानें तो इस मशीन से राशन शॉप और गोडाउन पर खाद्य भंडार के स्टॉक की जानकारी ली जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि थंब प्रिंट की मदद के कारण 15 लाख एलपीजी कनेक्शन और 50 लाख राशन कार्ड को निरस्त कर दिया गया है।
गोवड़ा को लगभग 2 साल पहले यह जानकारी हाथ लगी कि स्टॉक का एक बड़ा हिस्से की काला बाजारी हो रही है। गोवड़ा ने हर उपभोक्ता के डाटा बेस की जानकारी इकट्ठा करना शुरु किया। इसके बाद सभी परिवारों के फिंगर प्रिंट और फोटो लिए गए और एक कार्ड बनाया गया। इस लंबी प्रक्रिया ने लगभग 1.3 करोड़ परिवारों में से 80 प्रतिशत लोगों के कार्ड बन चुके है। इस प्रक्रिया के सफल होने के कारण बाकी राज्य भी इसको लागू करने के लिए आगे आ रहे हैं।
इस प्रक्रिया को शुरु करने का यह उद्देश्य था कि कोई भी गरीब भूखा नहीं सोए। इस तकनीक से लोगों को सब्सिडी पर भी निर्भर नहीं होना पड़ेगा।
यह खबर आपको कैसी लगी
10 में से 2 वोट मिले
प्रमुख ख़बरें
- LIVE UPDATE: देशभर में बारिश का कहर
- मोदी के सामने अब तक जो आया ‘वो’ गया, नीतीश का क्या होगा?
- बारिश से देश का बुरा हाल, पहाड़ों से मैदानों तक सब पानी-पानी
- मनमोहन ने 5वीं बार ली राज्यसभा सांसद की शपथ
- चुनाव से ठीक पहले कैबिनेट में फेरबदल करेंगे PM
- उत्तराखंड में बादल फटा, 50 लापता
- भाजपा में अटल-आडवाणी युग समाप्त : नीतीश
- केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल सोमवार शाम को संभव
- खादी को बढ़ावा देने का ग्रामोद्योग विभाग का नायाब तरीका
- नीतीश बोले, ‘प्रोटोकॉल था इसलिये की मोदी की तारीफ’
आज के वीडियो
")
ख़बरें
सबसे ज्यादा पाठकों की राय
- cricket quiz 5: इनमें से किस टीम ने चैंपियन्स ट्रॉफी कभी नहीं जीती ?
- एडिट पेज: मोदी हो या आडवाणी, राजनीति में ये वक्त-वक्त की बात है!
- cricket quiz 1: पहला खिलाड़ी जिसे तीसरे अंपायर ने LBW आउट दिया?
- cricket quiz 2: वन डे में इंग्लैंड का सबसे सफल गेंदबाज कौन है?
- एडिट पेज: क्या ज़िया खान जैसी लड़कियां अपनी बेवकूफियों के चलते मरती हैं?
सबसे ज्यादा पढ़ी गई
सबसे ताजी
- देखें, सन्नी लियोन का अलग अवतार
- LIVE UPDATE: देशभर में बारिश का कहर
- RBI से बेपरवाह बाजार, सेंसेक्स 142 अंक ऊपर बंद
- देखें, ‘पुलिसगिरी’में प्राची की दादागिरी
- देखें, क्या है विद्या का हॉट दिखने का सीक्रेट
- चूहों में होते हैं यादाश्त बढ़ाने वाले केमिकल
- लिंग परीक्षण कराकर फंस गये शाहरुख खान?
- ‘मिल्खा सिंह’ फरहान के कोच बने युवराज के पिता
- पीटरसन उबरे चोट से, खेल पाएंगे ऐशेज
- मोदी के सामने अब तक जो आया ‘वो’ गया, नीतीश का क्या होगा?
तस्वीरें
क्रिकेट समाचार











