03 फरवरी 2012
वार्ता
नई दिल्ली। ‘कार्बन स्मार्ट ग्रोथ’ को क्रियान्वित करने से हिमाचल प्रदेश 2020 तक ‘कार्बन न्यूट्रल राज्य’ बन जाएगा।
यह जानकारी मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने यहां ‘द एनर्जी एण्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट’ द्वारा दिल्ली सतत विकास में ‘प्रोटेक्टिंग द ग्लोबल कामन्सः 20 ईयर्स पोस्ट रियो’ विषय पर आयोजित 12वें सम्मेलन में दी।
उन्होंने कहा कि 2020 तक कार्बन न्यूट्रल (कार्बन मुक्त) बनने वाला हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य होगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कार्बन फुटप्रिंट प्रति व्यक्ति 1.4 टन आंका गया है, जबकि राष्ट्र स्तर पर यह औसत 1.57 टन प्रति व्यक्ति है।
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राज्य सरकार ने कार्बन क्रेडिट के दोहन के लिए विश्व बैंक के साथ एक ईआरपीए समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया है ताकि ‘बायो कार्बन प्रोजेक्ट’ के अंतर्गत 20 वर्षों के लिए राज्य के 100 जिलों की 177 ग्राम पंचायतों में 4000 हेक्टेयर भूमि पर 20 करोड़ रुपए का कार्बन राजस्व प्राप्त किया जा सके। उन्होंने हिमालयीन क्षेत्र की बहुमूल्य वन संपदा के रखरखाव, संरक्षण एवं विस्तार के लिए बाजार आधारित ‘पेमेंट फॉर इको-सिस्टम सर्विस’ की वकालत की।
उन्होंने पुरानी तकनीकों को बदलने, पर्यावरण बदलाव एवं अधोसंरचना विकास में नवीनतम तकनीकों के लिए शोध गतिविधियों हेतु विकसित राष्ट्रों से उदार आर्थिक सहायता एवं सहयोग का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में क्षेत्रीय मार्गदर्शिका के लिए पर्यावरण मास्टर प्लान तैयार किया है। राज्य सरकार शीघ्र ही शिमला में मौसम बदलाव पर राज्य केन्द्र (स्टेट सेंटर आन क्लाइमेट चेंज) आरंभ करेगी जो मौसम बदलाव पर शोध समन्वय के लिए श्रेष्ठ केंद्र होगा। राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के लिए पर्यावरण कोष सृजित किया है।
प्रो.धूमल ने कहा कि राज्य सरकार ने स्टेट फार साइंस, लर्निंग एंड क्रिएटीविटी आरंभ किया है। जिसे आगामी 10 फरवरी को, टीईआरआई के महानिदेशक डॉ. आर के पचौरी की उपस्थिति में राज्य को समर्पित किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि राज्य में सभी सरकारी विभागों को अपने ऊर्जा एवं पर्यावरण आडिट और ऊर्जा उत्सर्जन को कम करने तथा उपाय सुनिश्चित बनाने के लिए कार्रवाई एवं नीतियों के अवलोकन के निर्देश दिए गए हैं।
प्रो. धूमल ने कहा कि राज्य सरकार ने पंचायत स्तर पर पर्यावरण सुरक्षा एवं कार्बन न्यूट्रैलिटी के लिए समुदाय आधारित निर्धारण, जागरूकता एवं कार्य योजना कार्यक्रम (सीएलएपी) मिशन आरम्भ किया है जिसके अन्तर्गत राज्य में आरम्भिक तौर पर एक हजार पंचायतें शामिल की जायेगी। अभी तक इसके अंतर्गत लगभग 250 पंचायतों को शामिल किया गया है जिनमें प्रदेश का जनजातीय क्षेत्र लाहौल स्पीति भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राज्य में मौसम बदलाव की गतिविधियों की देखरेख एवं समन्वय के लिए राज्य स्तरीय गवर्निंग काउंसिल एवं मौसम बदलाव पर कार्यकारी परिषद गठित की है।
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