04 अगस्त 2012
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
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पटना। बिहार में निरक्षर और नवसाक्षर महिलाओं को पढ़ाने के लिए बिहार सरकार राज्य के विद्यालयों में 'नाइट लर्निंग केंद्र' खोलने की तैयारी कर रही है। इन केंद्रों में महिलाएं गाने-बजाने के साथ मनोरंजन करने के अलावा पढ़ना-लिखना भी सिखेंगी। इसके लिए शिक्षा विभाग महिलाओं की संख्या के आकलन में जुटा है।
राज्य में साक्षरता बढ़ाने के साथ-साथ विद्यालय को समाज से जोड़ने के लिए यह कारगर पहल मानी जा रही है। सरकार का विचार है कि गांवों में निरक्षर और नवसाक्षर महिलाएं घर में खाना बनाकर अपने परिजनों को खिलाने के बाद रात को विद्यालय में जुटेंगी। यही नहीं, गांव के छोटे बच्चे भी इन केंद्रों पर जमा होकर अपना गृहकार्य पूरा करेंगे। केंद्र पर बच्चों के लिए नि:शुल्क ट्यूशन की व्यवस्था की जाएगी।
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शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव अमरजीत सिन्हा मानते हैं, "नाइट लर्निग के बहाने विद्यालय को एक ऐसे केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है जहां जुटकर महिलाएं समाज के विकास की चर्चा कर सकें। महिलाओं को केंद्र तक आकर्षित करने के लिए हर महीने सामाजिक उत्सव का भी आयोजन किया जाएगा।"
उनका कहना है कि इस योजना को फिलहाल राज्य के कुछ प्राथमिक विद्यालयों में लागू कर इसके परिणामों का आकलन किया जाएगा। यदि परिणाम सकारात्मक रहा तो इसे राज्यभर में लागू किया जाएगा।
शिक्षा विभाग के ही एक अन्य अधिकारी मानते हैं कि इसके लिए विद्यालयों में न केवल बिजली की सुचारु व्यवस्था की जाएगी, बल्कि बैठने और पेयजल की भी समुचित व्यवस्था होगी। बच्चों और महिलाओं को केंद्र तक लाने की जिम्मेदारी महादलित टोलों के टोला सेवकों, स्वयंसेवकों और साक्षरताकर्मियों को दी जाएगी।
शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली स्वयंसेवी संस्था 'आर्ट एंड आर्टिस्ट सोसाइटी' की सचिव संध्या सिंह का मानना है कि निरक्षर और नवसाक्षर महिलाओं के लिए यह योजना भले ही ऊपरी तौर पर अच्छी नजर आ रही है, लेकिन देर रात तक पढ़ाई होने से विद्यालय परिसर का दुरुपयोग होने की आशंका बनी रहेगी। इसके अलावा विद्यालय में दिन की पढ़ाई कम और सामाजिक गतिविधियों का अड्डा बनने का डर रहेगा।
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वह हालांकि यह भी कहती हैं कि यह योजना ऐसी महिलाओं के लिए वरदान साबित हो सकती है जो दिन में समयाभाव के कारण शिक्षा नहीं प्राप्त कर पा रही हैं।
उल्लेखनीय है कि राज्य में महिलाओं की साक्षरता में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। भारत की जनगणना 2011 के औपबंधिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले 10 वर्षो में साक्षरता दर 47 प्रतिशत से बढ़कर 63.82 प्रतिशत हो गई है।
वर्ष 2001 में राज्य में महिला साक्षरता दर जहां 33.10 प्रतिशत थी वहीं 2011 में यह बढ़कर 53.33 प्रतिशत हो गई, जबकि पुरुषों की साक्षरता दर जहां 2001 में 59.70 प्रतिशत थी 2011 में यह बढ़कर 73.05 प्रतिशत हो गई।
शिक्षा विभाग के एक अधिकारी के अनुसार विद्यालय से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई। विद्यालय से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या वर्ष 2005 में 25 लाख थी जो अब घटकर 3.5 प्रतिशत रह गई है।
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