03 फरवरी 2012
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
सिडनी। शारीरिक रूप से सक्रिय बच्चों को मधुमेह एवं हृदय रोग होने की सम्भावना बहुत कम होती है। यह तथ्य एक अध्ययन में सामने आया है। विक्टोरिया एवं मेलबर्न विश्वविद्यालय के ग्लेन मैकनेल एवं मेरी व्लोदेक के नेतृत्व में हुए अध्ययन में यह तथ्य सामने आया कि व्यायाम करने से मधुमेह एवं हृदय रोगों के प्रति संवदेनशील चूहों की क्षमता में वृद्धि होती है।
अमेरिका की वैज्ञानिक पत्रिका ‘फिजियोलॉजी-एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबोलिज्म’ के अनुसार मैकनेल ने कहा, "जन्म के समय छोटे चूहों में अविकसित हृदय एवं अग्नाशय के कारण आगे बड़ी बीमारियां होने की सम्भावना अधिक होती है। लेकिन हमारा मानना है कि जीवन के शुरुआती समय में व्यायाम के द्वारा इस परिस्थिति से उबरा जा सकता है।"
तनाव-मुक्त शिशुओं में कम होती ‘एलर्जी’
विश्वविद्यालय के बयान के अनुसार छोटे जन्मे चूहों पर यह परीक्षण किया। इस दौरान जिन चूहों को पांच से छह हफ्तों तक व्यायाम कराया गया था महीने के अंत तक उनके अंगों में मामूली रूप से सुधार देखने को मिला। लेकिन छह महीने बाद उनके अंग स्वस्थ समूह जैसे हो गए।
एक दूसरे समूह को जिन्हें व्यायाम का अवसर नहीं मिला था उनमें कोई सुधार देखने को नहीं मिला।
कड़े अनुशासन में ज्यादा झूठ बोलते हैं बच्चे
मैकनेल ने कहा नौ हफ्ते वाले चूहे को पांच वर्ष के बच्चे के समान माना गया और छह महीने की उम्र के चूहे को स्वस्थ मनुष्य माना गया।
उन्होंने कहा, "हमारा मानना है कि बच्चों की सक्रियता एवं स्कूल में शारीरिक शिक्षा से उन्हें बीमारियों से बचाया जा सकता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
सिडनी। शारीरिक रूप से सक्रिय बच्चों को मधुमेह एवं हृदय रोग होने की सम्भावना बहुत कम होती है। यह तथ्य एक अध्ययन में सामने आया है। विक्टोरिया एवं मेलबर्न विश्वविद्यालय के ग्लेन मैकनेल एवं मेरी व्लोदेक के नेतृत्व में हुए अध्ययन में यह तथ्य सामने आया कि व्यायाम करने से मधुमेह एवं हृदय रोगों के प्रति संवदेनशील चूहों की क्षमता में वृद्धि होती है।
अमेरिका की वैज्ञानिक पत्रिका ‘फिजियोलॉजी-एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबोलिज्म’ के अनुसार मैकनेल ने कहा, "जन्म के समय छोटे चूहों में अविकसित हृदय एवं अग्नाशय के कारण आगे बड़ी बीमारियां होने की सम्भावना अधिक होती है। लेकिन हमारा मानना है कि जीवन के शुरुआती समय में व्यायाम के द्वारा इस परिस्थिति से उबरा जा सकता है।"
तनाव-मुक्त शिशुओं में कम होती ‘एलर्जी’
विश्वविद्यालय के बयान के अनुसार छोटे जन्मे चूहों पर यह परीक्षण किया। इस दौरान जिन चूहों को पांच से छह हफ्तों तक व्यायाम कराया गया था महीने के अंत तक उनके अंगों में मामूली रूप से सुधार देखने को मिला। लेकिन छह महीने बाद उनके अंग स्वस्थ समूह जैसे हो गए।
एक दूसरे समूह को जिन्हें व्यायाम का अवसर नहीं मिला था उनमें कोई सुधार देखने को नहीं मिला।
कड़े अनुशासन में ज्यादा झूठ बोलते हैं बच्चे
मैकनेल ने कहा नौ हफ्ते वाले चूहे को पांच वर्ष के बच्चे के समान माना गया और छह महीने की उम्र के चूहे को स्वस्थ मनुष्य माना गया।
उन्होंने कहा, "हमारा मानना है कि बच्चों की सक्रियता एवं स्कूल में शारीरिक शिक्षा से उन्हें बीमारियों से बचाया जा सकता है।"
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