22 मई 2012
78 वर्ष बाद मिथिलांचल और सीमांचल की सिमटी दूरी

08 फरवरी 2012
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
मनोज पाठक

सुपौल।
बिहार के सुपौल जिले में बुधवार को कोसी महासेतु के उद्घाटन के साथ ही क्षेत्र के लोगों का वर्षों पुराना सपना साकार हो गया। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 57 पर बने इस पुल से मिथिलांचल और सीमांचल की दूरी सिमट गई है। यह महासेतु सामरिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सुपौल के लोगों के अनुसार, अंग्रेजों के जमाने में कोसी के इन क्षेत्रों में रेलगाड़ियां दौड़ा करती थीं, लेकिन वर्ष 1934 में आए भूकम्प ने सामरिक महत्व के समझे जाने वाले इस क्षेत्र को भी नष्ट कर दिया। कोसी ने अपनी धारा बदल दी और मिथिलांचल को भौगोलिक दृष्टि से दो भागों में बांट दिया। एक तरफ दरभंगा और मधुबनी हो गए तो दूसरी ओर सहरसा, मधेपुरा व सुपौल जैसे क्षेत्र रह गए।

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मिथिलांचल के इस पुल के निर्माण का सपना दिखाकर स्वतंत्रता के बाद कई नेताओं ने सत्ता तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन क्षेत्र के लोगों के सपने पूरे नहीं हुए। वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस महत्वकांक्षी परियोजना की नींव रखी। ‘बिहार का शोक' कही जाने वाली कोसी नदी पर पुल बनाना भी एक टेढ़ी खीर रही। शुरुआती दौर में जब भी पुल का खम्भा बनाया जाता था तो वह कोसी की तेज धारा में बह जाता था।

सुपौल में निर्मली के राजाराम प्रसाद कहते हैं कि आज का दिन सुपौल के लिए ही नहीं, सभी मिथिलांचल वासियों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं। पिछले78 वर्ष की पीड़ा अब समाप्त हो गई है। बिहार के नौ जिले के लोगों को कोसी पार करने के लिए या तो नाव से सफर करना पड़ता था या दूसरे रास्ते होकर सड़क मार्ग से करीब 50 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी।

त्रिवेणीगंज के गल्ला व्यवसायी हरिश्चंद्र अग्रवाल के अनुसार, इस महासेतु से कम खर्च पर अनाजों की खेप सिलीगुड़ी से आने लगेगी। अब यहां खाद्यान्न सामग्री मंगाना सस्ता हो जाएगा। साथ ही मुजफ्फरपुर, लखनऊ, कोलकाता और बनारस की बाजारों का सामान भी सुपौल में उतरने लगेगा।

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इस महासेतु के निर्माण से नदी के आर-पार मायका और ससुराल की दूरी से परेशान महिलाओं की मुश्किलें भी काफी हद तक तक कम हो गई हैं। नर्मली में रहने वाली संगीता ने महासेतु के निर्माण पर खुशी जताते हुए कहा कि नाव व रास्ते में बालू से भरा घंटों का सफर तय करने के कारण वह पिछले चार वर्ष से मायके नहीं गईं, लेकिन वह दो घंटे में अपने मायके पहुंच सकेंगी।

इस महासेतु की लम्बाई 1.87 किलोमीटर है। इसके बन जाने से मिथिलांचल के नौ जिलों के लोगों को बड़ी राहत मिली है। इसका उद्घाटन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री सी़ पी़ जोशी ने किया। इस मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद थे। इसके निर्माण पर 418 करोड़ रुपये की लागत आई है।

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22 मई 2012

Feb 09, 2012

Aakhirkar Nitish Kumar ne dikha hi diya... ke kursi milne ke bad neta public
ko yaad rakhe wo neta aaj bhi jinda hai...
Nitish Kumar ne dikha diya ke jangal me VIKAS kese kiya jata hai...

Naveen Singh Delhi

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