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(भारतीय साहित्य की नीति कथाओं का विश्व में महत्वपूर्ण स्थान है। पंचतंत्र उनमें प्रमुख है। पंचतंत्र की रचना विष्णु शर्मा नामक व्यक्ति ने की थी। उन्होंने एक राजा के मूर्ख बेटों को शिक्षित करने के लिए इस पुस्तक की रचना की थी। पांच अध्याय में लिखे जाने के कारण इस पुस्तक का नाम पंचतंत्र रखा गया। इस किताब में जानवरों को पात्र बना कर शिक्षाप्रद बातें लिखी गई हैं। इसमें मुख्यत: पिंगलक नामक शेर के सियार मंत्री के दो बेटों दमनक और करटक के बीच के संवादों और कथाओं के जरिए व्यावहारिक ज्ञान की शिक्षा दी गई है। सभी कहानियां प्राय: करटक और दमनक के मुंह से सुनाई गई हैं।)
खुशी का राज
एक दिन शंभु दुकानदार के बेटे मुरली ने अपने पिता से पूछा- पिताजी खुश रहने का राज क्या है? शंभु ने बेटे से कहा- बेटा यहां से कई मील दूर पहाड़ी पर एक महल है उसमें एक व्यक्ति रहता है वही तुम्हें इस बात का सही जवाब दे सकता है।
मुरली अपने सवाल के जवाब के लिए पहाड़ी पर बने महल की तलाश में निकल पड़ा। कई दिनों तक पैदल चलने के बाद मुरली को वह महल दिखाई दिया। जब वह उस महल में पहुंचा तो देखा कि काफी लोग एक आकर्षक और रौबिले व्यक्ति को घेरकर खड़े हैं और अपनी समस्याओं का हल पूछ रहे हैं। लोग उसे राजा कहकर संबोधित कर रहे थे।
मुरली को उस व्यक्ति से मिलने के लिए लगभग 2 घंटे इंतजार करना पड़ा। जब मुरली का नंबर आया तो मुरली ने राजा साहब को अपना प्रश्न सुनाया। राजा साहब ने मुरली के आने का कारण गौर से सुना और बोला कि इसका जवाब देने के लिए अभी मेरे पास समय नहीं है। तुम दो घंटे बाद आना तब तक तुम मेरे महल में घूम सकते हो।
जब मुरली जाने लगा तो राजा साहब ने उसके हाथ में एक चम्मच पकड़ा दी जिसमें दो बूंद तेल था। राजा साहब ने कहा ध्यान रहे चम्मच का तेल गिरने न पाए।
मुरली घूमने के दौरान कई सीढ़ियां चढ़ा-उतरा लेकिन उसने अपनी नजरें चम्मच से नहीं हटाई। दो घंटे के बाद वह राजा सहब के पास लौट आया।
मुरली को देखते ही राजा साहब ने पूछा कि तुमने मेरे कक्ष में लटकी सुंदर तस्वीर देखी? मुरली बहुत शर्मिंदा था। उसने राजा साहब को बताया कि उसका सारा ध्यान तो चम्मच के तेल पर था। इसलिए वह ये सब चीजे नहीं देख पाया।
तब राजा साहब ने कहा कि तो फिर वापस जाओ और मेरे महल की हर सुंदर चीज को ध्यान से देखो। मुरली ने इस बार महल की हर सुंदर चीज को ध्यान से देखा और उसका भरपूर आनंद उठाया। वापस आकर उसने जो देखा उसका विवरण राजा साहब को बताया।
सब कुछ सुनने के बाद राजा साहब ने मुरली से पूछा- वह तेल की बूंद कहां है जो मैंने तुम्हें दी थी? मुरली ने चम्मच की ओर देखा तो उसमें तेल नहीं था।
तब राजा साहब ने कहा कि खुश रहने का राज यही है कि दुनिया की हर सुंदर वस्तु का आनंद लो लेकिन चम्मच के तेल को भी न भूलो।
(साभारः पंचतंत्र की मनोरंजक कहानियाँ, डायमंड प्रकाशन, सर्वाधिकार सुरक्षित।)
(भारतीय साहित्य की नीति कथाओं का विश्व में महत्वपूर्ण स्थान है। पंचतंत्र उनमें प्रमुख है। पंचतंत्र की रचना विष्णु शर्मा नामक व्यक्ति ने की थी। उन्होंने एक राजा के मूर्ख बेटों को शिक्षित करने के लिए इस पुस्तक की रचना की थी। पांच अध्याय में लिखे जाने के कारण इस पुस्तक का नाम पंचतंत्र रखा गया। इस किताब में जानवरों को पात्र बना कर शिक्षाप्रद बातें लिखी गई हैं। इसमें मुख्यत: पिंगलक नामक शेर के सियार मंत्री के दो बेटों दमनक और करटक के बीच के संवादों और कथाओं के जरिए व्यावहारिक ज्ञान की शिक्षा दी गई है। सभी कहानियां प्राय: करटक और दमनक के मुंह से सुनाई गई हैं।)
खुशी का राज
एक दिन शंभु दुकानदार के बेटे मुरली ने अपने पिता से पूछा- पिताजी खुश रहने का राज क्या है? शंभु ने बेटे से कहा- बेटा यहां से कई मील दूर पहाड़ी पर एक महल है उसमें एक व्यक्ति रहता है वही तुम्हें इस बात का सही जवाब दे सकता है।
मुरली अपने सवाल के जवाब के लिए पहाड़ी पर बने महल की तलाश में निकल पड़ा। कई दिनों तक पैदल चलने के बाद मुरली को वह महल दिखाई दिया। जब वह उस महल में पहुंचा तो देखा कि काफी लोग एक आकर्षक और रौबिले व्यक्ति को घेरकर खड़े हैं और अपनी समस्याओं का हल पूछ रहे हैं। लोग उसे राजा कहकर संबोधित कर रहे थे।
मुरली को उस व्यक्ति से मिलने के लिए लगभग 2 घंटे इंतजार करना पड़ा। जब मुरली का नंबर आया तो मुरली ने राजा साहब को अपना प्रश्न सुनाया। राजा साहब ने मुरली के आने का कारण गौर से सुना और बोला कि इसका जवाब देने के लिए अभी मेरे पास समय नहीं है। तुम दो घंटे बाद आना तब तक तुम मेरे महल में घूम सकते हो।
जब मुरली जाने लगा तो राजा साहब ने उसके हाथ में एक चम्मच पकड़ा दी जिसमें दो बूंद तेल था। राजा साहब ने कहा ध्यान रहे चम्मच का तेल गिरने न पाए।
मुरली घूमने के दौरान कई सीढ़ियां चढ़ा-उतरा लेकिन उसने अपनी नजरें चम्मच से नहीं हटाई। दो घंटे के बाद वह राजा सहब के पास लौट आया।
मुरली को देखते ही राजा साहब ने पूछा कि तुमने मेरे कक्ष में लटकी सुंदर तस्वीर देखी? मुरली बहुत शर्मिंदा था। उसने राजा साहब को बताया कि उसका सारा ध्यान तो चम्मच के तेल पर था। इसलिए वह ये सब चीजे नहीं देख पाया।
तब राजा साहब ने कहा कि तो फिर वापस जाओ और मेरे महल की हर सुंदर चीज को ध्यान से देखो। मुरली ने इस बार महल की हर सुंदर चीज को ध्यान से देखा और उसका भरपूर आनंद उठाया। वापस आकर उसने जो देखा उसका विवरण राजा साहब को बताया।
सब कुछ सुनने के बाद राजा साहब ने मुरली से पूछा- वह तेल की बूंद कहां है जो मैंने तुम्हें दी थी? मुरली ने चम्मच की ओर देखा तो उसमें तेल नहीं था।
तब राजा साहब ने कहा कि खुश रहने का राज यही है कि दुनिया की हर सुंदर वस्तु का आनंद लो लेकिन चम्मच के तेल को भी न भूलो।
(साभारः पंचतंत्र की मनोरंजक कहानियाँ, डायमंड प्रकाशन, सर्वाधिकार सुरक्षित।)
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