विचित्र किंतु सत्य
(जीवन में जहां कहां दृष्टि जाती है विचित्रिताएं दिखाई देती हैं। इनमें से कितनी ही हमारी निगाह में आ जाती हैं और वे समाचार के रूप में प्रकाशित भी हो जाती हैं। ऐसी ही विचित्र किंतु सत्य घटनाओं और समचारों का संकलन यहां आपके लिए प्रस्तुत है।)
अपने लाल सुर्ख रंग से सब्जी मंडी की रौनक बढ़ाने वाला और खाने की मेज पर हर किसी को ललचाने वाला टमाटर सब्जियों में फल माना जाता है और फलों में सब्जी।
टमाटर कितना प्राचीन है, ये ठीक से कोई नहीं बता पाता। लेकिन हाल के एक प्रयोग से इतना साबित हो गया कि कम से कम दो हजार वर्ष पहले टमाटर दुनिया में मौजूद था।
चीन के एक समाचार पत्र के अनुसार, मध्य चीन के चेंगडू में, जो सिचुआन राज्य में है, अंवेषण के दौरान पुरात्तत्ववेत्ताओं को अनेक ऐसी वस्तुएं मिलीं, जो कोयले का रूप ले चुकी थी। एक कब्र के ऊपर उन्हें ऐसे बीज मिले, जो फलों के प्रतीत हो रहे थे। पुरात्तत्ववेत्ताओं ने उस स्थान को गीले-गरम कम्बल से ढक दिया और दूसरे स्थान पर अपने काम में लग गए।
करीब एक माह बाद वे लौटे और कंबल उठाया तो पाया कि वहं लगभग 40 अंकुर निकल आए हैं। अंकुर बढ़ते रहे और पौधे बन गए और फिर उनमें फल भी लगने लगे। पहले तो ये फल खजूर जैसे लगे परंतु जब बाद में और बढ़े तो अंडे जितने हो गए।
विशेषज्ञों ने इन फलों का तरह-तरह से परीक्षण किया और अंत में घोषित कर दिया कि से टमाटर ही हैं। अब इन फलों को लेकर चीन में गरमागरम बहस छिड़ी है और दावा किया जा रहा है कि टमाटर दुनिया को चीन की देन है।
(जीवन में जहां कहां दृष्टि जाती है विचित्रिताएं दिखाई देती हैं। इनमें से कितनी ही हमारी निगाह में आ जाती हैं और वे समाचार के रूप में प्रकाशित भी हो जाती हैं। ऐसी ही विचित्र किंतु सत्य घटनाओं और समचारों का संकलन यहां आपके लिए प्रस्तुत है।)
अपने लाल सुर्ख रंग से सब्जी मंडी की रौनक बढ़ाने वाला और खाने की मेज पर हर किसी को ललचाने वाला टमाटर सब्जियों में फल माना जाता है और फलों में सब्जी।
टमाटर कितना प्राचीन है, ये ठीक से कोई नहीं बता पाता। लेकिन हाल के एक प्रयोग से इतना साबित हो गया कि कम से कम दो हजार वर्ष पहले टमाटर दुनिया में मौजूद था।
चीन के एक समाचार पत्र के अनुसार, मध्य चीन के चेंगडू में, जो सिचुआन राज्य में है, अंवेषण के दौरान पुरात्तत्ववेत्ताओं को अनेक ऐसी वस्तुएं मिलीं, जो कोयले का रूप ले चुकी थी। एक कब्र के ऊपर उन्हें ऐसे बीज मिले, जो फलों के प्रतीत हो रहे थे। पुरात्तत्ववेत्ताओं ने उस स्थान को गीले-गरम कम्बल से ढक दिया और दूसरे स्थान पर अपने काम में लग गए।
करीब एक माह बाद वे लौटे और कंबल उठाया तो पाया कि वहं लगभग 40 अंकुर निकल आए हैं। अंकुर बढ़ते रहे और पौधे बन गए और फिर उनमें फल भी लगने लगे। पहले तो ये फल खजूर जैसे लगे परंतु जब बाद में और बढ़े तो अंडे जितने हो गए।
विशेषज्ञों ने इन फलों का तरह-तरह से परीक्षण किया और अंत में घोषित कर दिया कि से टमाटर ही हैं। अब इन फलों को लेकर चीन में गरमागरम बहस छिड़ी है और दावा किया जा रहा है कि टमाटर दुनिया को चीन की देन है।
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