इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
अशोक इंदु
असफलता इस बात का संकेत है कि हमने ईमानदारी से अपनी मंजिल पाने की कोशिश नहीं की। अपना लक्ष्य प्राप्त करने की राह में नाकामयाबी सबसे बड़ी बाधा मानी जाती है। कम ही लोग हैं जो नाकामयाबी से नहीं डरते। असफलता हमारे जीवन का एक हिस्सा है जिसके बिना हम जिंदगी का मतलब नहीं समझ सकते। असफलता ही हमें पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
आपने देखा होगा कि सड़कों पर तेज गति से कार चलाते समय स्पीड ब्रेकर आते हैं, जहां कार की गति कम करनी होती है। आपने कभी भी उस स्पीड ब्रेकर को बहुत तेज गति के साथ पार करने की कोशिश नहीं की होगी अन्यथा दुर्घटना की सम्भावना हो सकती है।
असफलताएं हमारी जिंदगी में स्पीड ब्रेकर का काम करती हैं। यह हमें बताती हैं कि हमेशा एक समान गति बनाए रखना सम्भव नहीं। आपको रुकना होगा, अपनी ऊर्जा को संगठित करते हुए आप अपनी इच्छित गति से बढ़ते हैं फिर कोई गतिरोधक आ जाता है और आपको अपनी गति न्यूनतम कर देनी पड़ती है और इस प्रकार आप अपनी यात्रा जारी रखते हैं।
ऐसा मुमकिन हो सकता है कि बिना असफल हुए आप अपनी मंजिल तक पहुंच जाएं लेकिन एक बार मंजिल पर पहुंच जाने पर आपको लगेगा कि आपकी क्षमताओं के आगे मंजिल कमतर है। असफलताएं आपको यह समझाती हैं कि एक बार फिर से अपनी क्षमताओं का आकलन करके पूरी ताकत लगाकर मुकाम हासिल करने में जुट जाएं।
वास्तव में असफल होने से पहले ही हमारे दिमाग में असफलता का भय घर कर जाता है। जब हम असफलता के बारे में सोचते हैं तो हमारे भीतर एड्रेनेलिन हार्मोन का स्राव होने लगता है। जो हमें असफलता को स्वीकार करने की ओर प्रेरित करता है। एक बार अगर आपके दिमाग से असफलता का डर निकल जाता है तो आप फिर पुरानी अवस्था में आ जाते हैं।
एक जंगल में एक शेर रहता था, जोकि वहां का राजा था। उस जंगल में कुछ भेड़ें भी थीं, जो अक्सर शेर के बच्चों को परेशान करती थी। शेरों की संख्या मुश्किल से सौ थी, जबकि भेड़ों की संख्या कई हजार में थी। सभी शेरों ने भेड़ों को सबक सिखाने के लिए उनसे लड़ाई करने की ठानी।
युद्ध की घोषणा हो गई और बंदर को निर्णायक बनाया गया।
बंदर एक नया विचार लेकर आया कि शेरों की सेना का सेनापति एक भेड़ को बनाया जाए और भेड़ों की सेना का सेनापति शेर को बनाया जाए। शेरों ने आपस में बात की और वे इस विचार से सहमत हो गए। एक रेखा के दोनों ओर दोनों सेनाएं खड़ी हो गईं। बंदर ने युद्ध का बिगुल बजाया। भेड़ों की सेना का सेनापति बना शेर जोर से दहाड़ा और उसकी दहाड़ को सुनकर शेरों का सेनापति बना भेड़ डर कर भाग गया। इधर, सैनिक शेरों ने सोचा कि हार के डर से सेनापति भाग रहे हैं तो उन्होंने भी वैसा ही किया और वे भी भाग गये।
आपकी मानसिक अवस्था ही आपको सफलता की ओर ले जाती है। आप विजेता तभी बन सकते हैं, जब आपको भीतर से यह महसूस हो कि कोई आपको हरा नहीं सकता। आपका 'किलर इंस्टिक्ट' ही आपको विजय दिला सकता है। गलती होने पर तुरंत उसका विश्लेषण करते हुए आगे बढ़ जाएं। आपको ऐसा कोई कामयाब इंसान नहीं मिलेगा, जिसने कभी कोई भूल न की हो। भूल ही आपको यह एहसास कराती है कि मंजिल तक पहुंचना उतना आसान भी नहीं है। असफलता का सामना करने के लिए खुद को मानसिक तौर पर तैयार रखें।
एक बार एक प्रोजेक्ट पर काम करने के दौरान, ऐसा हुआ कि कुछ शिक्षकों ने चेयरमैन से मेरे बारे में शिकायत की। मेरे लिए यह एक झटका था क्योंकि मैंने उससे पहले ट्रेनिंग की पचासों प्रशिक्षण कक्षाएं ली थीं। चेयरमैन ने मुझे बुलाकर कहा कि उन शिक्षकों में बहुतों के पति जिले में उच्च पदों पर हैं और वे यहां सिर्फ समय काटने के लिए आती हैं। वे उच्च शिक्षित हैं लेकिन उनमें पढ़ाने के लिए कोई प्रतिबद्धता नहीं है।
अपने सत्र के दौरान मैंने उन लोगों से कुछ साधारण किस्म के सवाल पूछे, जिसका वे उत्तर नहीं दे सकीं और मैंने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर वे लोग इन चीजों के प्रति सजग नहीं हैं तो वे इस पेशे में रहने के योग्य नहीं हो सकतीं। पहली बार ऐसा हुआ कि किसी ने उन लोगों के बारे में प्रत्यक्ष रूप से ऐसी टिप्पणी की थी। स्कूल के मालिक एक बिजनेसमैन थे और उन्होंने मेरी जो सेवाएं ली थीं। उससे उन्हें खासा फायदा हुआ, जो पहले उन्हें नहीं हो रहा था।
प्रतिस्पर्धा में वहां कई और नए स्कूल खुल गए थे जिनसे इनके एकाधिकार को चुनौती मिल रही थी। जिले के अधिकारियों की पत्नियों को नौकरी पर रखना मजबूरी से ज्यादा जरूरत थी। चूंकि स्कूल इंगलिश मीडियम था इसलिए इंगलिश बोलने वाले शिक्षकों की जरूरत थी,भले ही उन्हें विषय ज्ञान की पकड़ हो या न हो। उन्होंने उसे अपनी ट्रेनिंग के तरीके में बदलाव लाने को कहा।
मैंने अपनी टिप्पणी के लिए उनसे क्षमा मांगते हुए उसमें परिवर्तन की बात बताई। मैं उन्हें यह समझाने में सफल रहा कि भाषा ज्ञान के साथ ही कुछ स्तर तक विषय का ज्ञान भी जरूरी है क्योंकि हजारों छात्रों का भविष्य उनके हाथों में है और ऐसा नहीं हुआ तो उनका भविष्य चौपट हो सकता है। मैंने उन्हें कुछ खास किताबों और इंटरनेट की साइटों से जुड़ने की सलाह दी ताकि अपडेट जानकारी मिलती रहे और वे एक महीने में मेरी उम्मीद के मुताबिक खरे उतरे। यह ट्रेनिंग कार्यक्रम मेरे लिए खास फायदेमंद रहा।
बिना गलती किए हुए आप कभी कुछ हासिल नहीं कर सकते। अपने अनुभवों के बावजूद आप पूर्ण कभी नहीं हो सकते। हमेशा कुछ नया सीखने की सम्भावना रहती है जिससे आप कुछ सीख सकते हैं। गलती महसूस होने पर कभी भी क्षमा मांगने से हिचकिचाना नहीं चाहिए। केवल वही आदमी कभी गलती नहीं कर सकता जो कुछ करता ही न हो अन्यथा जो कुछ करेगा तो गलती जरूर होगी। इसका उम्र और अनुभव से कोई संबंध नहीं है।
गलती करना जिंदगी का एक हिस्सा है और उसे स्वीकारने में भी कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। बस एक बात का ख्याल रखें कि एक ही तरह की गलती का दोहराव न हो। आप जन्मजात विजेता हैं और आप स्वयं में दृढ़ हैं तो असफलता का भय आपको नहीं सताएगा।
(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'खुद बदलें अपनी किस्मत' से साभार)
अशोक इंदु
असफलता इस बात का संकेत है कि हमने ईमानदारी से अपनी मंजिल पाने की कोशिश नहीं की। अपना लक्ष्य प्राप्त करने की राह में नाकामयाबी सबसे बड़ी बाधा मानी जाती है। कम ही लोग हैं जो नाकामयाबी से नहीं डरते। असफलता हमारे जीवन का एक हिस्सा है जिसके बिना हम जिंदगी का मतलब नहीं समझ सकते। असफलता ही हमें पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
आपने देखा होगा कि सड़कों पर तेज गति से कार चलाते समय स्पीड ब्रेकर आते हैं, जहां कार की गति कम करनी होती है। आपने कभी भी उस स्पीड ब्रेकर को बहुत तेज गति के साथ पार करने की कोशिश नहीं की होगी अन्यथा दुर्घटना की सम्भावना हो सकती है।
असफलताएं हमारी जिंदगी में स्पीड ब्रेकर का काम करती हैं। यह हमें बताती हैं कि हमेशा एक समान गति बनाए रखना सम्भव नहीं। आपको रुकना होगा, अपनी ऊर्जा को संगठित करते हुए आप अपनी इच्छित गति से बढ़ते हैं फिर कोई गतिरोधक आ जाता है और आपको अपनी गति न्यूनतम कर देनी पड़ती है और इस प्रकार आप अपनी यात्रा जारी रखते हैं।
ऐसा मुमकिन हो सकता है कि बिना असफल हुए आप अपनी मंजिल तक पहुंच जाएं लेकिन एक बार मंजिल पर पहुंच जाने पर आपको लगेगा कि आपकी क्षमताओं के आगे मंजिल कमतर है। असफलताएं आपको यह समझाती हैं कि एक बार फिर से अपनी क्षमताओं का आकलन करके पूरी ताकत लगाकर मुकाम हासिल करने में जुट जाएं।
वास्तव में असफल होने से पहले ही हमारे दिमाग में असफलता का भय घर कर जाता है। जब हम असफलता के बारे में सोचते हैं तो हमारे भीतर एड्रेनेलिन हार्मोन का स्राव होने लगता है। जो हमें असफलता को स्वीकार करने की ओर प्रेरित करता है। एक बार अगर आपके दिमाग से असफलता का डर निकल जाता है तो आप फिर पुरानी अवस्था में आ जाते हैं।
एक जंगल में एक शेर रहता था, जोकि वहां का राजा था। उस जंगल में कुछ भेड़ें भी थीं, जो अक्सर शेर के बच्चों को परेशान करती थी। शेरों की संख्या मुश्किल से सौ थी, जबकि भेड़ों की संख्या कई हजार में थी। सभी शेरों ने भेड़ों को सबक सिखाने के लिए उनसे लड़ाई करने की ठानी।
युद्ध की घोषणा हो गई और बंदर को निर्णायक बनाया गया।
बंदर एक नया विचार लेकर आया कि शेरों की सेना का सेनापति एक भेड़ को बनाया जाए और भेड़ों की सेना का सेनापति शेर को बनाया जाए। शेरों ने आपस में बात की और वे इस विचार से सहमत हो गए। एक रेखा के दोनों ओर दोनों सेनाएं खड़ी हो गईं। बंदर ने युद्ध का बिगुल बजाया। भेड़ों की सेना का सेनापति बना शेर जोर से दहाड़ा और उसकी दहाड़ को सुनकर शेरों का सेनापति बना भेड़ डर कर भाग गया। इधर, सैनिक शेरों ने सोचा कि हार के डर से सेनापति भाग रहे हैं तो उन्होंने भी वैसा ही किया और वे भी भाग गये।
आपकी मानसिक अवस्था ही आपको सफलता की ओर ले जाती है। आप विजेता तभी बन सकते हैं, जब आपको भीतर से यह महसूस हो कि कोई आपको हरा नहीं सकता। आपका 'किलर इंस्टिक्ट' ही आपको विजय दिला सकता है। गलती होने पर तुरंत उसका विश्लेषण करते हुए आगे बढ़ जाएं। आपको ऐसा कोई कामयाब इंसान नहीं मिलेगा, जिसने कभी कोई भूल न की हो। भूल ही आपको यह एहसास कराती है कि मंजिल तक पहुंचना उतना आसान भी नहीं है। असफलता का सामना करने के लिए खुद को मानसिक तौर पर तैयार रखें।
एक बार एक प्रोजेक्ट पर काम करने के दौरान, ऐसा हुआ कि कुछ शिक्षकों ने चेयरमैन से मेरे बारे में शिकायत की। मेरे लिए यह एक झटका था क्योंकि मैंने उससे पहले ट्रेनिंग की पचासों प्रशिक्षण कक्षाएं ली थीं। चेयरमैन ने मुझे बुलाकर कहा कि उन शिक्षकों में बहुतों के पति जिले में उच्च पदों पर हैं और वे यहां सिर्फ समय काटने के लिए आती हैं। वे उच्च शिक्षित हैं लेकिन उनमें पढ़ाने के लिए कोई प्रतिबद्धता नहीं है।
अपने सत्र के दौरान मैंने उन लोगों से कुछ साधारण किस्म के सवाल पूछे, जिसका वे उत्तर नहीं दे सकीं और मैंने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर वे लोग इन चीजों के प्रति सजग नहीं हैं तो वे इस पेशे में रहने के योग्य नहीं हो सकतीं। पहली बार ऐसा हुआ कि किसी ने उन लोगों के बारे में प्रत्यक्ष रूप से ऐसी टिप्पणी की थी। स्कूल के मालिक एक बिजनेसमैन थे और उन्होंने मेरी जो सेवाएं ली थीं। उससे उन्हें खासा फायदा हुआ, जो पहले उन्हें नहीं हो रहा था।
प्रतिस्पर्धा में वहां कई और नए स्कूल खुल गए थे जिनसे इनके एकाधिकार को चुनौती मिल रही थी। जिले के अधिकारियों की पत्नियों को नौकरी पर रखना मजबूरी से ज्यादा जरूरत थी। चूंकि स्कूल इंगलिश मीडियम था इसलिए इंगलिश बोलने वाले शिक्षकों की जरूरत थी,भले ही उन्हें विषय ज्ञान की पकड़ हो या न हो। उन्होंने उसे अपनी ट्रेनिंग के तरीके में बदलाव लाने को कहा।
मैंने अपनी टिप्पणी के लिए उनसे क्षमा मांगते हुए उसमें परिवर्तन की बात बताई। मैं उन्हें यह समझाने में सफल रहा कि भाषा ज्ञान के साथ ही कुछ स्तर तक विषय का ज्ञान भी जरूरी है क्योंकि हजारों छात्रों का भविष्य उनके हाथों में है और ऐसा नहीं हुआ तो उनका भविष्य चौपट हो सकता है। मैंने उन्हें कुछ खास किताबों और इंटरनेट की साइटों से जुड़ने की सलाह दी ताकि अपडेट जानकारी मिलती रहे और वे एक महीने में मेरी उम्मीद के मुताबिक खरे उतरे। यह ट्रेनिंग कार्यक्रम मेरे लिए खास फायदेमंद रहा।
बिना गलती किए हुए आप कभी कुछ हासिल नहीं कर सकते। अपने अनुभवों के बावजूद आप पूर्ण कभी नहीं हो सकते। हमेशा कुछ नया सीखने की सम्भावना रहती है जिससे आप कुछ सीख सकते हैं। गलती महसूस होने पर कभी भी क्षमा मांगने से हिचकिचाना नहीं चाहिए। केवल वही आदमी कभी गलती नहीं कर सकता जो कुछ करता ही न हो अन्यथा जो कुछ करेगा तो गलती जरूर होगी। इसका उम्र और अनुभव से कोई संबंध नहीं है।
गलती करना जिंदगी का एक हिस्सा है और उसे स्वीकारने में भी कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। बस एक बात का ख्याल रखें कि एक ही तरह की गलती का दोहराव न हो। आप जन्मजात विजेता हैं और आप स्वयं में दृढ़ हैं तो असफलता का भय आपको नहीं सताएगा।
(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'खुद बदलें अपनी किस्मत' से साभार)
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