diamondpublications.com
(भारतीय साहित्य की नीति कथाओं का विश्व में महत्वपूर्ण स्थान है। पंचतंत्र उनमें प्रमुख है। पंचतंत्र की रचना विष्णु शर्मा नामक व्यक्ति ने की थी। उन्होंने एक राजा के मूर्ख बेटों को शिक्षित करने के लिए इस पुस्तक की रचना की थी। पांच अध्याय में लिखे जाने के कारण इस पुस्तक का नाम पंचतंत्र रखा गया। इस किताब में जानवरों को पात्र बना कर शिक्षाप्रद बातें लिखी गई हैं। इसमें मुख्यत: पिंगलक नामक शेर के सियार मंत्री के दो बेटों दमनक और करटक के बीच के संवादों और कथाओं के जरिए व्यावहारिक ज्ञान की शिक्षा दी गई है। सभी कहानियां प्राय: करटक और दमनक के मुंह से सुनाई गई हैं।)
एक बहादुर बकरी थी वह रोज सुबह जंगल में चरने जाया करती और सूर्यास्त होने तक लौट आती। कुछ समय बाद उसके चार बच्चे हुए। उसने अपने बच्चों का नाम आले, बाले, छुन्नु और मुन्नु रख दिया। एक सियार उन बच्चों को खाने लिए वहीं चक्कर लगाया करता रहता। बकरी का चरने के लिए जंगल जाना जरूरी था।
इसलिए बकरी ने बच्चों को बचाने के लिए एक टटिया (बांस की टाटी से बना घर) बनाई और बच्चों से कहा- जब तक मैं आकर आवाज़ न दूं तब तक ये टटिया मत खोलना।
अब बकरी निश्चिंत होकर जंगल जाती और शाम को आकर आवाज देती- आले टटिया खोल, बाले टटिया खोल, छुन्नु टटिया खोल और मुन्नु टटिया खोल। यह सुनकर ही बच्चे दरवाजा खोलते थे।
एक दिन सियार ने ये सब कुछ सुन लिया। अगले दिन जब बकरी जंगल चली गई तो सियार बकरी के घर पहुंच गया। उसने बकरी की आवाज में कहा- “आले टटिया खोल, बाले टटिया खोल, छुन्नु टटिया खोल और मुन्नु टटिया खोल।”
बच्चों ने सोचा आज मां जल्दी लौट आईं। उन्होंने टटिया का दरवाज खोल दिया। लेकिन सियार को देखकर वे घबरा गए। मौका पाकर सियार बच्चों को खा गया। शाम को जब बकरी घर पहुंची तो टटिया का दरवाजा का खुला देखकर डर गई। वह अंदर गई तो वहां कोई नहीं था। लेकिन जब उसने वहां सियार के पैरों के निशान देखे तो वह समझ गई कि सियार उसके बच्चों को खा गया है।
वह तुरंत बढ़ई के पास गई और अपने सींग पैने करवा लाई। तेली के पास जाकर अपने सींगों को चिकना भी करवा लिया। अब बकरी सियार को ढूंढने लगी। उसे सियार के पेड़ के पास सोता हुआ मिला।
बकरी ने सियार से कहा- ‘मेरे बच्चे लौटा दो’, सियार बोला ‘तेरे बच्चे तो मैंने खा लिए और अब मैं तुझे भी खाउंगा”। बकरी गुस्से में आगे बढ़ी और सियार के पेट में अपने सींग घौंप दिए।
जैसे ही सियार का पेट फटा बकरी के चारों बच्चे बाहर निकल आए। सियार मर चुका था और बकरी बच्चों को लेकर घर चली गई। इसके बाद बकरी ने बच्चों को कान में बताकर जाने लगी कि आज वो कितनी बार गाना गाएगी।
(साभारः पंचतंत्र की मनोरंजक कहानियाँ, डायमंड प्रकाशन, सर्वाधिकार सुरक्षित।)
(भारतीय साहित्य की नीति कथाओं का विश्व में महत्वपूर्ण स्थान है। पंचतंत्र उनमें प्रमुख है। पंचतंत्र की रचना विष्णु शर्मा नामक व्यक्ति ने की थी। उन्होंने एक राजा के मूर्ख बेटों को शिक्षित करने के लिए इस पुस्तक की रचना की थी। पांच अध्याय में लिखे जाने के कारण इस पुस्तक का नाम पंचतंत्र रखा गया। इस किताब में जानवरों को पात्र बना कर शिक्षाप्रद बातें लिखी गई हैं। इसमें मुख्यत: पिंगलक नामक शेर के सियार मंत्री के दो बेटों दमनक और करटक के बीच के संवादों और कथाओं के जरिए व्यावहारिक ज्ञान की शिक्षा दी गई है। सभी कहानियां प्राय: करटक और दमनक के मुंह से सुनाई गई हैं।)
एक बहादुर बकरी थी वह रोज सुबह जंगल में चरने जाया करती और सूर्यास्त होने तक लौट आती। कुछ समय बाद उसके चार बच्चे हुए। उसने अपने बच्चों का नाम आले, बाले, छुन्नु और मुन्नु रख दिया। एक सियार उन बच्चों को खाने लिए वहीं चक्कर लगाया करता रहता। बकरी का चरने के लिए जंगल जाना जरूरी था।
इसलिए बकरी ने बच्चों को बचाने के लिए एक टटिया (बांस की टाटी से बना घर) बनाई और बच्चों से कहा- जब तक मैं आकर आवाज़ न दूं तब तक ये टटिया मत खोलना।
अब बकरी निश्चिंत होकर जंगल जाती और शाम को आकर आवाज देती- आले टटिया खोल, बाले टटिया खोल, छुन्नु टटिया खोल और मुन्नु टटिया खोल। यह सुनकर ही बच्चे दरवाजा खोलते थे।
एक दिन सियार ने ये सब कुछ सुन लिया। अगले दिन जब बकरी जंगल चली गई तो सियार बकरी के घर पहुंच गया। उसने बकरी की आवाज में कहा- “आले टटिया खोल, बाले टटिया खोल, छुन्नु टटिया खोल और मुन्नु टटिया खोल।”
बच्चों ने सोचा आज मां जल्दी लौट आईं। उन्होंने टटिया का दरवाज खोल दिया। लेकिन सियार को देखकर वे घबरा गए। मौका पाकर सियार बच्चों को खा गया। शाम को जब बकरी घर पहुंची तो टटिया का दरवाजा का खुला देखकर डर गई। वह अंदर गई तो वहां कोई नहीं था। लेकिन जब उसने वहां सियार के पैरों के निशान देखे तो वह समझ गई कि सियार उसके बच्चों को खा गया है।
वह तुरंत बढ़ई के पास गई और अपने सींग पैने करवा लाई। तेली के पास जाकर अपने सींगों को चिकना भी करवा लिया। अब बकरी सियार को ढूंढने लगी। उसे सियार के पेड़ के पास सोता हुआ मिला।
बकरी ने सियार से कहा- ‘मेरे बच्चे लौटा दो’, सियार बोला ‘तेरे बच्चे तो मैंने खा लिए और अब मैं तुझे भी खाउंगा”। बकरी गुस्से में आगे बढ़ी और सियार के पेट में अपने सींग घौंप दिए।
जैसे ही सियार का पेट फटा बकरी के चारों बच्चे बाहर निकल आए। सियार मर चुका था और बकरी बच्चों को लेकर घर चली गई। इसके बाद बकरी ने बच्चों को कान में बताकर जाने लगी कि आज वो कितनी बार गाना गाएगी।
(साभारः पंचतंत्र की मनोरंजक कहानियाँ, डायमंड प्रकाशन, सर्वाधिकार सुरक्षित।)
यह खबर आपको कैसी लगी
10 में से 4 वोट मिले
प्रमुख ख़बरें
- इटली में भूकम्प के झटके जारी, हजारों विस्थापित
- स्पेशल रिपोर्ट: गर्मी से झुलसा देश, इंडिया @45 डिग्री!
- पायलटों की हड़ताल का 15वां दिन, नुकसान 250 करोड़!
- मनमोहन के बाद कौन पर राहुल, प्रणब आगे
- KBP: संगमा बोले, एक नजर इधर, मैं भी हूं रेस में!
- जरूर देखें: आज सुर्खियों में रहने वाली अहम खबरें
- देखें, कैसे पिता ने बच्चे को वॉशिंग मशीन में धोया?
- KBP: ममता नहीं चाहतीं प्रणब दा राष्ट्रपति बनें!
- आइसक्रीम के लिए हेलीकॉप्टर समुद्रतट पर उतार दिया!
- यमन में आत्मघाती हमला, 50 मृत, सैकड़ों घायल
आज के वीडियो
यूपीः कांस्टेबल ने लुटेरों को पकड़ा, तो थानेदार ने पीट दिया
ख़बरें
सबसे ज्यादा पाठकों की राय
तस्वीरें
क्रिकेट समाचार
Live TV | Stock Market India | IBNLive News | IBNKhabar Hindi News | Cricket News | In.com | हमारे बारे में | हमारा पता | हमें बताइए | विज्ञापन | अस्वीकरण | गोपनीयता | शर्तें | साइट जानकारी
© 2011, Web18 Software Services Ltd. All Rights Reserved.











