15 फरवरी 2012
वार्ता
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वॉशिंगटन। अमेरिका ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अलग-थलग करने और उस पर अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करने के लिए दबाव बनाने के वास्ते भारत और उसके सहयोगी देशों से मदद मांगी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रेस सचिव जे कार्ने ने कल यहां संवाददताओं से कहा कि मुझे लगता है कि हम अपने सहयोगियों और साझेदारों के समक्ष पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि हमारे लिए ईरान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अलग-थलग करना और उसका परमाणु कार्यक्रम बंद करवाने के लिए उस पर दबाव बनाना कितना महत्वपूर्ण है।
“इजरायल ने ईरान के खिलाफ मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ा है”
कार्ने ने कहा कि अमेरिका इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत समेत दुनिया भर के देशों के साथ मिलकर आगे भी काम करता रहेगा। प्रेस सचिव ने बताया कि उन्होंने अमेरिका की यात्रा पर आये चीन के उप राष्ट्रपति शि जिंपिंग के साथ भी ईरान के मुद्दे पर चर्चा की है।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को हमने कई अन्य देशों के जैसे ही चीन के समक्ष भी उठाया है। यह हमारी कोशिश का हिस्सा है। एक ऐसी संगठित कोशिश जिसके परिणामस्वरूप ईरान पर इतने कडे प्रतिबंध लगाये जाएंगे जो पहले कभी नहीं लगे हैं। इन प्रतिबंधों का असर भी काफी व्यापक होगा।
अमेरिका ने फिर कहा, ईरान सारी दुनिया के लिए खतरा!
भारत ने हाल ही में ईरान के साथ अपने व्यापार संबंधों में इजाफा करने की घोषणा करते हुए कहा था कि वह इस माह के अंत तक अपना कारोबार प्रतिनिधिमंडल ईरान भेजेगा। यह प्रतिनिधिमंडल ईरान में भारत के लिए कारोबार की संभावनाएं तलाशेगा। भारत और ईरान के बीच फिलहाल 13.6 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है।
यहां तक की इस घोषणा के बाद भारत ने यह भी कहा था कि ओबामा प्रशासन की अनिच्छा के बावजूद ईरान के साथ उसके कारोबारी संबंध कायम रहेंगे। भारत के इस कदम को अमेरिका को चुनौती देने और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रहे ईरान को राहत देने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि अमेरिका समेत कई पश्चिमी देश ईरान पर परमाणु कार्यक्रम की आड़ में हथियार विकसति करने का आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम देश की असैन्य ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए है।
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वॉशिंगटन। अमेरिका ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अलग-थलग करने और उस पर अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करने के लिए दबाव बनाने के वास्ते भारत और उसके सहयोगी देशों से मदद मांगी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रेस सचिव जे कार्ने ने कल यहां संवाददताओं से कहा कि मुझे लगता है कि हम अपने सहयोगियों और साझेदारों के समक्ष पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि हमारे लिए ईरान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अलग-थलग करना और उसका परमाणु कार्यक्रम बंद करवाने के लिए उस पर दबाव बनाना कितना महत्वपूर्ण है।
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कार्ने ने कहा कि अमेरिका इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत समेत दुनिया भर के देशों के साथ मिलकर आगे भी काम करता रहेगा। प्रेस सचिव ने बताया कि उन्होंने अमेरिका की यात्रा पर आये चीन के उप राष्ट्रपति शि जिंपिंग के साथ भी ईरान के मुद्दे पर चर्चा की है।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को हमने कई अन्य देशों के जैसे ही चीन के समक्ष भी उठाया है। यह हमारी कोशिश का हिस्सा है। एक ऐसी संगठित कोशिश जिसके परिणामस्वरूप ईरान पर इतने कडे प्रतिबंध लगाये जाएंगे जो पहले कभी नहीं लगे हैं। इन प्रतिबंधों का असर भी काफी व्यापक होगा।
अमेरिका ने फिर कहा, ईरान सारी दुनिया के लिए खतरा!
भारत ने हाल ही में ईरान के साथ अपने व्यापार संबंधों में इजाफा करने की घोषणा करते हुए कहा था कि वह इस माह के अंत तक अपना कारोबार प्रतिनिधिमंडल ईरान भेजेगा। यह प्रतिनिधिमंडल ईरान में भारत के लिए कारोबार की संभावनाएं तलाशेगा। भारत और ईरान के बीच फिलहाल 13.6 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है।
यहां तक की इस घोषणा के बाद भारत ने यह भी कहा था कि ओबामा प्रशासन की अनिच्छा के बावजूद ईरान के साथ उसके कारोबारी संबंध कायम रहेंगे। भारत के इस कदम को अमेरिका को चुनौती देने और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रहे ईरान को राहत देने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि अमेरिका समेत कई पश्चिमी देश ईरान पर परमाणु कार्यक्रम की आड़ में हथियार विकसति करने का आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम देश की असैन्य ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए है।
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