23 अगस्त 2012
आईबीएन-7
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अहमदाबाद। आखिर कहां गए 104 भारतीय? उन्हें जमीन खा गई या फिर आसमान निगल गया। 104 भारतीयों की तलाश में जुटी पुलिस अब मान रही है कि इनमें से ज्यादातर की हत्या कर दी गई है। हम बता दें कि दो साल पहले ये 104 भारतीय दिल्ली से अवैध तरीके से अमेरिका जाने के लिए निकले थे। दलालों ने इन्हें दिल्ली से इस्तांबुल होते हुए ग्वाटेमाला भेजा था। ज्यादातर के घरवालों ने उनके ग्वाटेमाला उतरने से पहले बातचीत भी की। लेकिन उसके बाद से उनका कोई पता नहीं है। सूत्रों की मानें तो दिल्ली पुलिस को आशंका है कि इनमें से ज्यादातर नौजवान नहीं बचे हैं।
तुर्की एयरलाइंस से एक बैग अहमदबाद के एक शख्श सवेन रजनीकांत के नाम पर आया था। लेकिन लंबे इंतजार के बाद भी सवेन इसे लेने नहीं आया। और जब दो साल बाद दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया तो उसके साथ खुले कई और राज। ऐसा राज जिसमें अमेरिका में पैसे कमाने के सपने का बेरहम कत्ल था।
दलाली के लाखों रुपए थे। और जाल में फंसे पंजाब और गुजरात के 105 नौजवान थे। दिल्ली पुलिस ने अहमदाबाद के रहने वाले सवेन रजनीकांत के अलावा पंजाब के गुरमीत पाल सिंह, हैदराबाद के शशिकिरण रेड्डी और दिल्ली के सुजीत कुमार को गिरफ्तार किया।
इन्होंने खुलासा किया कि बैग में बरामद हुए 105 पासपोर्ट गुजरात और पंजाब के अलग अलग शहरों के 105 नौजवान लड़कों के हैं। इन्हें कमाने के लिए अमेरिका जाना था। लेकिन ये लड़के इस्तांबुल होते हुए ग्वाटेमाला ले जाए गए। उन्हें वहां से मेक्सिको के रास्ते अवैध तरीके से अमेरिका भेजा जाना था। खुलासा ये हुआ कि इन भारतीय नौजवानों को ग्वाटेमाला में स्थानीय स्पेनिश और मेक्सिकन दलालों को सौंप दिया गया। आशंका है कि ये दलाल उस अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का हिस्सा थे, जो चोरी-छिपे अमेरिका में ड्रग पहुंचवाते हैं और उसके लिए गरीब लड़कों को ड्रग्स के साथ जंगलों से गुजार कर अमेरिका की सरहद पार करवाते हैं।
पुलिस की पूछताछ में पता चला कि दलालों ने इन लड़कों कि परिवारों से छह से 12 लाख रुपए तक लिए हैं। लेकिन ये रुपए सिर्फ ग्वाटेमाला तक के थे। इसके बाद इनके परिवारों से ग्वाटेमाला से अमेरिका तक के और पैसे लिए जाने थे। ये पासपोर्ट उस पैसे की गारंटी थे। जो पैसे लेकर उन लड़कों के परिवारों को लौटाया जाना था। अमेरिका जाने वाले लड़कों का परिवार इस पासपोर्ट को वापस अमेरिका भेजता। लेकिन इसका मौका ही नहीं आया। क्योंकि ग्वाटेमाला पहुंचने के बाद से ही उनके बच्चों की खोजखबर नहीं मिली।
इस मामले में दिल्ली पुलिस सूरत पहुंची और प्रवीण भाई पटेल नाम के एक शख्स को हिरासत में लिया। प्रवीण का पासपोर्ट भी इन 105 लावारिस पासपोर्ट में शामिल था। प्रवीण अपने चचेरे भाई के साथ अमेरिका जा रहे थे। जब ग्वाटेमाला में उन्हें स्थानीय दलालों को सौंप दिया गया। कई दिन तक भूखे रखा गया। और जब भाई ने विरोध किया तो उसे गोली मार दी गई। अपने चचेरे भाई को गवांकर प्रवीण किसी तरह अमेरिका पहुंच गए। लेकिन वहां पकड़े गए। उन्हें आठ महीने जेल में रहना पड़ा। फिर वापस भारत डिपोर्ट किया गया। लेकिन प्रवीण के खुलासे ने दिल्ली पुलिस को चौंका दिया।
अब उसके सामने ये सवाल मुंह बाए खड़ा था कि क्या ग्वाटेमाला में कई भारतीय नौजवानों की हत्या कर दी गई है। सवाल कई जिंदगियों का है। दिल्ली पुलिस को आशंका है कि पिछले दो साल से अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पाए नाजवानों का भी वही हश्र हुआ है जो प्रवीण के चचेरे भाई का हुआ। या तो वो भूख प्यास के शिकार हो चुके हैं या फिर ड्रग तस्करों के गैंग की हैवानियत ने उन्हें अपना शिकार बना लिया है।
सूरत के रहने वाले प्रवीण भाई के मुताबिक 105 लोगों में वो भी शामिल थे जो दिल्ली से अमेरिका के लिए चले। ग्वाटेमाला में उनका और उनके भाई का पासपोर्ट ले लिया गया। उन्हें स्थानीय गिरोह के हवाले कर दिया गया। उन लोगों ने प्रवीण और उसके भाई समेत 300 लोगों को एक कंटेनर में भेड़बकरियों की तरह ठूंस दिया। मैक्सिको पहुंचने में तीन रात दो दिन तक उन लोगों को भूखे प्यासे पैदल चलाया गया। एक महीने तक बंधक बनाकर रखा गया। जैसे तैसे प्रवीण अमेरिका पहुंचे। प्रवीण बच गए। लेकिन बाकी लोग इतने खुशकिस्मत नहीं थे।
पंजाब के अमृतसर के मीरा कोट गांव के अरजीत ने बताया कि दो साल से लापता बेटे रवींद्र का इंतजार कर रही हैं। आखिरी बार उन्होंने अपने बेटे से 2 अक्टूबर, 2010 को बात की थी। होशियारपुर के गांव जहूरा का रहने वाले जसविंदर सिंह का परिवार भी पिछले दो साल से खून के आंसू रो रहा है। कश्मीर सिंह के लड़के जसविंदर को अमेरिका के ख्वाब दिखा कर दिल्ली ले जाया गया और फिर वहां से ब्राजील होते हुए मेक्सिको में छोड़ दिया गया।
पंजाब के रोपड़ का गांव टपरिया के दो परिवार भी अपने लापता हुए लाडलों के वापिस आने का इंतज़ार कर रहे है। यहां के दो लड़के मंजीत और रविंदर भी जसविंदर के साथ ही लापता हो गये।
दिल्ली पुलिस को जांच में पता चला कि करीब पचास पासपोर्ट पंजाब के खन्ना, रोपड़, जालंधर, कपूरथला, नवांशहर, माछीवाड़ा, अमृतसर, कपूरथला और होशियारपुर के लड़कों के हैं। तो बाकी पासपोर्ट गुजरात के मेहसाणा, सूरत, गांधी नगर और पुलौल शहर के रहने वालों के हैं।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक कई अंतर्राष्ट्रीय गिरोहों ने पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली सहित कई बड़े शहरों में स्थानीय एजेंटों को तैनात किया हुआ है। स्थानीय एजेंट रुपए मिलने के बाद लोगों को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद में सक्रिय गिरोह के हवाले कर देते हैं।
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