21 मई 2013

न्यूजलैटर सब्सक्राइब करें

CLOSE

Sign Up

तेनालीराम: सर्दियों की सबसे अच्छी मिठाई कौनसी है?

Diamondpublication.com

तेनाली राम के बारे में:-(1520 ई. में दक्षिण भारत के विजयनगर राज्य में राजा कृष्णदेव राय हुआ करते थे। तेनाली राम उनके दरबार में अपने हास-परिहास से लोगों का मनोरंजन किया करते थे। उनकी खासियत थी कि गम्भीर से गम्भीर विषय को भी वह हंसते-हंसते हल कर देते थे। उनका जन्म गुंटूर जिले के गलीपाडु नामक कस्बे में हुआ था। तेनाली राम के पिता बचपन में ही गुजर गए थे। बचपन में उनका नाम ‘राम लिंग’ था, चूंकि उनकी परवरिश अपने ननिहाल ‘तेनाली’ में हुई थी, इसलिए बाद में लोग उन्हें तेनाली राम के नाम से पुकारने लगे। विजयनगर के राजा के पास नौकरी पाने के लिए उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा। कई बार उन्हें और उनके परिवार को भूखा भी रहना पड़ा, पर उन्होंने हार नहीं मानी और कृष्णदेव राय के पास नौकरी पा ही ली। तेनाली राम की गिनती राजा कृष्णदेव राय के आठ दिग्गजों में होती है।)


जाड़े की मिठाई

एक बार राजमहल में राजा कृष्णदेव राय के साथ तेनालीराम और राजपुरोहित बैठे थे। जाड़ों के दिन थे, सुबह की धूप सेंकते हुए तीनों बातचीत में व्यस्त थे। तभी एकाएक राजा ने कहा-‘जाड़े का मौसम सबसे अच्छा मौसम होता है। खूब खाओ और सेहत बनाओ।’ खाने की बात सुनकर पुरोहित के मुँह में पानी आ गया। बोला-‘महाराज, जाड़ों में तो मेवा और मिठाई खाने का अपना ही मजा है-अपना ही आनद है।’ ‘अच्छा बताओ, जाड़े की सबसे अच्छी मिठाई कौन-सी है?’ राजा कृष्णदेव राय ने पूछा। पुरोहित ने हलुआ, मालपुए, पिस्ते की बर्फी आदि कई मिठाइयाँ गिना दीं।

राजा कृष्णदेव राय ने सभी मिठाइयाँ मँगवाईं और पुरोहित से कहा-‘जरा खाकर बताइए, इनमें सबसे अच्छी मिठाई कौन सी है?’ पुरोहित को सभी मिठाइयाँ अच्छी लगती थीं। किस मिठाई को सबसे अच्छा बताता।

तेनालीराम ने कहा, ‘सब अच्छी हैं, मगर वह मिठाई यहाँ नहीं मिलेगी।’ ‘कौन सी मिठाई?’ राजा कृष्णदेव राय ने उत्सुकता से पूछा- ‘और उस मिठाई का नाम क्या है?’ ‘नाम पूछकर क्या करेंगे महाराज। आप आज रात को मेरे साथ चलें, तो मैं वह मिठाई आपको खिलवा भी दूँगा।’ राजा कृष्णदेव राय मान गए।

रात को साधारण वेश में वह पुरोहित और तेनालीराम के साथ चल पड़े। चलते-चलते तीनों काफी दूर निकल गए। एक जगह दो-तीन आदमी अलाव के सामने बैठे बातों में खो हुए थे। ये तीनों भी वहाँ रुक गए। इस वेश में लोग राजा को पहचान भी न पाए। पास ही कोल्हू चल रहा था।

तेनालीराम उधर गए और कुछ पैसे देकर गरम-गरम गुड़ ले लिया। गुड़ लेकर वह पुरोहित और राजा के पास आ गए। अँधेरे में राजा और पुरोहित को थोड़ा-थोड़ा गरम-गरम गुड़ देकर बोले-‘लीजिए, खाइए, जाड़े की असली मिठाई।’

राजा ने गरम-गरम गुड़ खाया तो बड़ा स्वादिष्ट लगा। बोले, ‘वाह, इतनी बढ़िया मिठाई, यहाँ अँधेरे में कहाँ से आई?’ तभी तेनालीराम को एक कोने में पड़ी पत्तियाँ दिखाई दीं। वह अपनी जगह से उठा और कुछ पत्तियाँ इकट्ठी कर आग लगा दी। फिर बोला, ‘महाराज, यह गुड़ है।’

‘गुड़...और इतना स्वादिष्ट! ’ ‘महाराज, जाड़ों में असली स्वाद गरम चीज में रहता है। यह गुड़ गरम है, इसलिए स्वादिष्ट है।’ यह सुनकर राजा कृष्णदेव राय मुस्कुरा दिए। पुरोहित अब भी चुप था।

(साभारः तेनालीराम की सूझबूझ, डायमंड प्रकाशन, सर्वाधिकार सुरक्षित।)

आखिरकार तेनालीराम ने कर ही दी कुत्ते की दुम सीधी

तेनालीराम ने खोली ठंड में पुरोहित की तपस्या की पोल

तेनालीराम: कोई भी आसानी से बन सकता है बेवकूफ?

facebook पर hindi.in.com पेज को LIKE किया क्या

 

यह खबर आपको कैसी लगी

10 में से 5 वोट मिले

पाठकों की राय

21 मई 2013

प्रमुख ख़बरें
आज के वीडियो
देखें, मौसम विभाग का अनुमान गर्मी से बेहाल होगा देश
देखें, मौसम विभाग का अनुमान गर्मी से बेहाल होगा देश
देखें, कैसे रेलवे घूसकांड छापे की खबर हुई लीक...
देखें, कैसे रेलवे घूसकांड छापे की खबर हुई लीक...
देखें, कैसे बनाएं एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में आपका करियर
देखें, कैसे बनाएं एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में आपका करियर


ख़बरें

सबसे ज्यादा पाठकों की राय

बाक़ी


Live TV | Stock Market India | IBNLive News | Cricket News | In.com | Latest Movie Songs |Latest Videos |Play Online Games | Rss Feed | हमारे बारे में  |   हमारा पता  |  हमें बताइए  |  विज्ञापन  |  अस्वीकरण  |  गोपनीयता  |  शर्तें  |  साइट जानकारी
© 2011, Web18 Software Services Ltd. All Rights Reserved.