21 अक्टूबर 2012
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त्योहार शुरु हो चुके हैं और आम आदमी पर महंगाई की मार कम होने के नाम नहीं ले रही है। त्योहार पर आम आदमी के लिए शक्कर की मिठास कम होने वाली है क्योंकी सरकार ने चीनी का आयात शुल्क महंगा करने का फैसला किया है जिससे खुदरा बाजार में शक्कर महंगी हो जाएगी।
कितनी बढ़ेगी इम्पोर्ट ड्यूटी?
केंद्रीय खाद्य मंत्री के वी थॉमस के मुताबिक घरेलू बाजार में चीनी की ओवर सप्लाई रोकने के लिए तैयार चीनी पर मौजूदा 10 फीसदी की आयात ड्यूटी को बढ़ाकर 20 फीसदी किया जाएगा। लेकिन साथ ही सरकार रॉ शुगर पर लगने वाली 10 फीसदी की आयात ड्यूटी को खत्म करने वाली है।
बढ़ सकती है एक्साइज ड्यूटी भी
इसके अलावा सरकार शुगर डीकंट्रोल के साथ ही चीनी पर एक्साइज ड्यूटी भी बढ़ा सकती है। खाद्य मंत्रालय एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने के पक्ष में है। माना जा रहा है कि एक्साइज ड्यूटी कम से कम 1 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ सकती है। दरअसल सब्सिडी की भरपाई करने के लिए एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का प्रस्ताव है। फिलहाल लेवी चीनी पर 64 रुपये प्रति क्विंटल की एक्साइज ड्यूटी लगती है। वहीं नॉन लेवी चीनी पर अभी एक्साइड ड्यूटी 98 रुपये प्रति क्विंटल है।
राशन की दूकान पर भी शक्कर महंगी
जहां पर सबसे सस्ती चीनी मिलती थी राशन की दुकान अब सरकार उसे भी महंगा करने की तैयारी कर रही है। सरकार के मुताबिक शक्कर की कीमत 13.20 रु से बढ़ाकर 25 रु किलो करने का प्रस्ताव है। मौजूदा वितरण प्रणाली में लगभग ६२ प्रतिशत का रिसाव है। चीनी के तेज़ी से बढ़ते दामों की जांच करने के लिए अब सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली में ४२,००० करोड़ रूपए खर्च करेगी। नई प्रणाली में उपभोक्ताओं को एस.एम.एस के द्बारा राशन स्टाक की जानकारी दी जाएगी।
यूपी के गन्ना किसानों की बढ़ सकती है मुश्किलें
सी बी पटौदिया का मानना है कि उत्तर भारत की चीनी मिलों को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस तरह के ऐलान होने से खास करके यूपी की चीनी मिलों को गन्ना किसानों को भुगतान करने में भी दिक्कत आ सकती है।
जब आई थी रंगराजन कमिटी की रिपोर्ट
इससे पहले रंगराजन कमिटी ने चीनी डीकंट्रोल पर रिपोर्ट जारी की।। रंगराजन कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में गन्ने के मौजूदा एफआरपी नियमों में बदलाव करने के सुझाव दिए। रंगराजन कमिटी के मुताबिक चीनी और चीनी उत्पादों के लिए रेवेन्यू शेयरिंग का मॉडल अपनाना बेहतर साबित हो सकता है। नए प्रस्ताव से किसानों को गन्ने के उत्पादों से मिलने वाले रेवेन्यू का 70 फीसदी मिलेगा। राज्यों में ऐलान किए गए समर्थन मूल्यों को खत्म करना चाहिए। साथ ही मौजूदा रूप में लेवी कोटा को खत्म कर देना चाहिए।
आर्थिक सुधार पड़ रहे हैं भारी
दरअसल ये सब हो रहा है सरकार के आर्थिक सुधारों के चक्कर में। आर्थिक सुधार की रफ्तार तेज करने के चक्कर में सरकार महंगाई को काबू करने में नाकाम रही है। पिछले तीन महीनों में महंगाई तीन गुना बढ़ी है। पिछले तीन महीने में अब तक गेंहू और आटे की कीमत में 37% उछाल आया है। वहीं चीन के दाम में 21 फीसदी उछाल आया।
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